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Saturday, April 30, 2022

3 मई को है अक्षय तृतीया, मां लक्ष्मी को अर्पित करें 108 मखानों की माला फिर देखे चमत्कार




रेवांचल टाइम्स :


अक्षय तृतीया को आखा तीज कहा जाता है और आप सभी जानते ही होंगे यह एक हिंदू त्योहार है। यह त्यौहार वैशाख माह के शुक्ल पक्ष के समय पर तृतीया तिथि के दिन आता है। जी हाँ और इस बार इसे त्यौहार को 3 मई 2022 मंगलवार के दिन मनाया जाने वाला है। हालाँकि इस बार अक्षय तृतीया के साथ ही परशुराम जयंती का पर्व भी मनाया जाएगा। आप सभी को बता दें कि अक्षय तृतीया का पर्व हिंदुओं के लिए सबसे शुभ दिनों में से एक माना जाता है।

जी हाँ और मुहूर्त शास्त्र में यह बहुत शुभ दिन कहलाता है। आपको पता ही होगा अक्षय यानी जिसका क्षय न हो पाए अत: अक्षय तृतीया का दिन पूजा एवं दान कार्य के शुभ फलों को भी अक्षय गुणा फल देने वाला ही होता है। ऐसे में इस दिन ज्यादातर लोग कुछ न कुछ वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। वहीं मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्री लक्ष्मी जी की पूजा में मखाने का उपयोग बहुत शुभदायक माना जाता है, अक्षय तृतीया पर सोना, चांदी, वस्त्र, वाहन इत्यादि खरीदने से इनके शुभ फल प्राप्त होते हैं। केवल यही नहीं बल्कि इस दिन पर देवी लक्ष्मी जी को अर्पित किए जाने वाली वस्तुओं में मखाने का उपयोग उत्तम माना जाता है। कहते हैं मखाने का उपयोग भविष्य में समृद्धि और अधिक धन की प्राप्ति में सहायक होता है।

अक्षय तृतीया पूजा का मुहूर्त- सुबह 05:39 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक अत्यंत शुभ रहेगा। जी दरअसल तृतीया तिथि 3 मई 2022 को सुबह 05:18 आरंभ होगी ओर तृतीया तिथि 4 मई 2022 को प्रातः 07:32 बजे समाप्त होगी। इस दिन भक्त सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा करते हैं तथा लक्ष्मी एवं भगवान विष्णु को अगरबत्ती, चंदन का लेप, फल-फूल अर्पित करते हैं। अब हम आपको बताते हैं इस दिन किये जाने वाले उपाय।

अक्षय तृतीया के उपाय- कहा जाता है इस दिन श्री लक्ष्मी को 108 मखाने की माला अर्पित करना शुभता का प्रतिक होता है। जी हाँ और इस दिन श्री सूक्त का पाठ करना चाहिए। इसके अलावा श्री विष्णु भगवान का पूजन करना शुभ होता है। श्री विष्णु सहस्रनाम, विष्णु चालीसा का पाठ करते हैं। इसी के साथ श्री लक्ष्मी जी को तथा भगवान विष्णु को विशेष भोग लगाए।

कथाओं के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। अक्षय तृतीया के दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करते हैं। जी हाँ और इस दिन गंगा नदी में स्नान करना पवित्र माना जाता है और उसके बाद देवी लक्ष्मी, श्री विष्णु, भगवान गणेश का पूजन किया जाता है

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