Holika Dahan 2022: रात 10:31 के बाद न करें होलिका दहन, जानें कितने बजे से कर सकते हैं पूजन - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

 आवश्कता है  आवश्कता है ....

रेवांचल टाईम्स समाचार पत्र एव वेव पोर्टल में मध्यप्रदेश के सभी संभाग, जिला, तहसील, विकास खंडों, में संवाददाताओं की एंव विज्ञापनों व खबरों से सबंधित व्यक्ति संपर्क करें इन नम्बरों में 👉 9406771592/ 9425117297/ 8770297430/9165745947

Friday, March 11, 2022

Holika Dahan 2022: रात 10:31 के बाद न करें होलिका दहन, जानें कितने बजे से कर सकते हैं पूजन

 


रेवांचल टाईम्स :जैसे ही बसंत का महीना लगता है वैसे ही लोग रंगों का त्योहार होली का इंतजार करना शुरू कर देते हैं. हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक होली का त्योहार लोगों के बीच न केवल प्रेम को बढ़ाता है बल्कि रिश्तों को रंगीन भी बनाता है. रंग खेलने से पहले दिन रात को होलिका दहन होता है. माना जाता है कि इस दिन हिरण्यकश्यप की बहन होलिका  आग में जलकर मर गई थीं. इसलिए इस दिन होलिका दहन कर सभी बुराइयों को दूर किया जाता है. ऐसे में लोगों को होलिका दहन के शुभ मुहूर्त के बारे में पता होना चाहिए. आज का हमारा लेख इसी विषय पर है. आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम से बताएंगे कि होलिका दहन का शुभ मुहूर्त  क्या है. साथ ही होलिका दहन को मनाने के पीछे क्या कारण है, इसके बारे में भी जानेंगे. पढ़ते हैं आगे…

होलिका दहन का शुभ मुहूर्त

होली से एक रात पहले होलिका दहन होता है. इस साल 17 मार्च दिन गुरुवार की रात को होलिका दहन किया जाएगा. वहीं इस का शुभ मुहूर्त रात 9:20 से 10:31 तक है. लोग करीब सवा घंटे के बीच होलिका दहन कर सकते हैं. 

होलिका दहन से संबंधित कथा

प्रहलाद हिरण्यकश्यप का पुत्र भी था और भगवान विष्णु का अनंत भक्त भी. यह बात हिरण्यकश्यप को बिल्कुल पसंद नहीं थी कि वह भगवान विष्णु की आराधना करता है. हिरण्यकश्यप हर वक्त इस बात का विरोध करता था और प्रहलाद को अपनी पूजा करने के लिए कहता था. जब प्रहलाद ने इस बात को मानने से इंकार किया तो हिरण्यकश्यप ने यातनाएं देनी शुरू कर दी, जिससे भक्त प्रहलाद विष्णु भगवान की भक्ति से विमुख हो अपनी हार मान ले. इसके लिए भक्त प्रहलाद को हिरण्यकश्यप ने हाथी के पैरों से कुचलाया तो कभी पहाड़ो से धकेला. लेकिन विष्णु भगवान की भक्ति ने हर बार प्रहलाद की रक्षा की. अंत में हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर फाल्गुन पूर्णिमा के दिन प्रहलाद की हत्या की साजिश की और होलिका अपनी गोद में प्रहलाद को लेकर आग में बैठ गई. होलिका को वरदान मिला था कि आग उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाएगी. लेकिन विष्णु भगवान की भक्ति ने भक्त प्रहलाद को तो बचा लिया लेकिन होलिका जल के मर गई. उसके बाद हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लिया और भक्त पहलाद के प्राणों की रक्षा की. 

No comments:

Post a Comment