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Sunday, March 13, 2022

आंगनबाड़ी केंद्र में खुलेआम दारु-अण्डे की दुकान...


रेवांचल टाईम्स - मंडला सेमरखापा दानीटोला आंगनबाड़ी केंद्र में लगा महिनों से ताला कार्यकर्ता एवं सहायिका मामले से अंजान

         प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के मंशानुरूप हर बच्चा स्वस्थ्य एवं शिक्षित होना मुख्य लक्ष्य है।जिसको लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कदम सराहनीय है कि प्रत्येक बच्चे को जन्म से पोषण आहार को लेकर आंगनबाड़ी केंद्रों तथा स्कूलों में इसकी प्राथमिकता से व्यवस्था की गई है।वहीं इस लक्ष्य को चरम सीमा तक पहुंचाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग को सरकार ने इसकी जिम्मेदारी सौंपी है परन्तु आला-अधिकारियों द्वारा चुप्पी साधे हुए बच्चों की भविष्य एवं जिन्दगी से खिलवाड़ कर रहे है और सरकार की योजनाओं को बेचकर अपनी तिजोरियां भरी जा रही है।

सेमरखापा दानीटोला आंगनबाड़ी केंद्र में चल रही दारु-अण्डे की दुकान

जिला मुख्यालय के नजदीक ग्राम पंचायत सेमरखापा के अचली ग्राम अंतर्गत दानीटोला आंगनबाड़ी केंद्र में कार्यकर्ता एवं सहायिका की लापरवाही का नतीजा यह है कि आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण आहार की बजाय जुंआ और नशा का अड्डा बना हुआ है जहां दिन में वामन पत्तियों का खेल और शाम को वहां शराब और सिगरेट अण्डे के साथ पार्टी किया करते हैं बाद इसके उस दुकान को दुकानदार के द्वारा आंगनबाड़ी केंद्र में जमा दिया जाता है जिसकी फोटो खींचकर वायरल किया गया है।इतना सब होने पर भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका जिला मुख्यालय बैठक में भागीदार तो बनती है और साथ ही फर्जी जानकारी प्रस्तुत कर अपनी कार्यशैली की दस्तावेज प्रस्तुत कर अपने घर पहुंच जाती है,परन्तु यह ऐंसा नहीं कि मामले की जानकारी आला अधिकारियों को नहीं है कारण यह है कि उक्त केन्द्र के सहायिका पति का परियोजना अधिकारी के साथ दोस्ताना संबंध है साथ ही वह नजदीकी विभागीय कर्मचारी हैं जिससे उसके साथ-साथ कार्यकर्ता को भी लापरवाही करने की छूट दी गई है।जिसके एवज में उसकी पत्नी जो सेमरखापा दानीटोला आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के पद पर पदस्थ हैं उसे और उसके कार्यकर्ता को अपने फर्ज एवं दायित्व के प्रति लापरवाही की खुलेआम धज्जियां उडाने की छूट दी गई है।

आंगनबाड़ी केंद्र अब गिनती बढ़ाने के काम आ रही है

जिले में जहां आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के पोषक तत्व एवं प्राथमिक शिक्षा को लेकर सरकार ने यह योजना लागू की है तो वहीं आला-अधिकारियों ने अपनी हिस्सेदारी बसूल कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं की लापरवाहियों पर पर्दा डाल रहे हैं। जहां कलेक्टर लगातार केन्द्रों की  कर रहीं हैं समीक्षा दिनांक 24/02/2022 को कलेक्टर हर्षिका सिंह शासन के निर्देशानुसार महिला बाल विकास विभाग के माध्यम से चलाए जा रहे एडॉप्शन आंगनवाड़ी कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की उन्होंने सभी सीडीपीओ से कार्यक्रम के तहत उनकी परियोजनाओं में स्थित कुल आंगनवाड़ी केंद्रों तथा अब तक गोद लिए गए केंद्रों के बारे में जानकारी ली।बावजूद इसके विभाग के अधिकारियों ने नजरंदाज कर अनेकों फर्जी बिल निकालकर आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने पर बहुत बड़ा खुलासा सामने आ जावेगा।परियोजना द्वारा निरीक्षण कर इन्हें पूर्णतया प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया।उससे यह स्पष्ट होता है कि यह पूरी मिलीभगत जिला कार्यालय की रही है।महिला बाल विकास परियोजनाओं मे आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना हेतु जो शासन द्वारा राशि स्वीकृत कर दी गई थी।उसके पीछे शासन की यह मंशा थी कि जिले की हर परियोजनाओं में आंगनबाड़ी केन्द्रों को अच्छे तरीक़े से सुसज्जित किया जाये,ताकि उस पर नन्हे-नन्हे बच्चे आकर खेलें-कूदें एवं अध्ययन करना सीखें।तत्कालीन समय में जिन आंगनबाड़ी केन्द्रों का बीड़ा उठाया गया था उसके लिये संबंधित केन्द्रों को या परियोजना अधिकारियों को राशि दी जानी थी,लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से जिला कार्यालय ने इन सभी कार्यो को अपने हाथों में ले लिया और फिर पैसों की बंदरबांट हुई कि लोग हक्के-वक्के रह गये।कुछ लोगों ने सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज निकलवाये जब दस्तावेज लोगों के हाथ आये तो आश्चर्य स्वाभाविक था।

जिम्मेदार केन्द्र से अनभिज्ञ कहना है कि हम अकेले कहां-कहां देखें

मामले को लेकर जब मण्डला परियोजना अधिकारी अनूप नामदेव से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उस गांव में दो आंगनवाड़ी केन्द्र है जबकि उस गांव में तीन आंगनबाड़ी केंद्र है सेमरखापा आंगनबाड़ी केंद्र, अचली आंगनबाड़ी केंद्र,दानीटोला आंगनबाड़ी केंद्र, जहां जिम्मेदार अधिकारियों को उनके अधीनस्थ केन्द्रों की जानकारी ही नहीं है तो वह केन्द्र का बंद पाया जाना स्वाभाविक है।परियोजना अधिकारी से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका का नाम पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मेरे अन्डर में 316 कार्यकर्ता एवं सहायिका आते हैं और मैं सबका नाम याद नहीं रख सकता वहीं परियोजना अधिकारी को उक्त केन्द्र कहां पर है यह भी जानकारी नहीं होना एक बहुत बड़े लापरवाही की पुष्टि करता है जिसके चलते हम उनके अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा भी वही रवैया अपनाया जा रहा है।

         इनका कहना है-----

01-आंगनबाडी केंद्र बंद होने का मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है मैं जांच कराकर कार्यवाही करुंगा।

अनूप नामदेव

परियोजना अधिकारी मण्डला।


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