रेवांचल टाईम्स - म.प्र. के आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में भ्रष्ट सरकारी तंत्र की जेब में जनकल्याण की योजनायें कैद हो गई हैं। वर्तमान सरकार के समय में इस जिले में योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी लापरवाही मनमानी व धांधली की जा रही है। स्वच्छ भारत मिशन में आवंटित धन की होली खेली गई है और खेली जा रही है। फर्जी तरीके से ओडीएफ हो चुके गांवों की जांच नहीं की जा रही है। कृषि, उद्यानिकी की योजनाओं का पता नहीं चल रहा है। शिक्षा स्वास्थ्य की स्थिति बुरी तरह चरमरा गई है। सड़कों की हालत खस्ता हो गई है। स्कूल भवन सहित सभी तरह के सरकारी भवनों की हालत भी दयनीय हो गई है। रंगरोगन व मरम्मत का कार्य नहीं किया जा रहा है। रसोई गैस सबसिडी की राशि पिछले कुछ वर्षो से कई उपभोक्ताओं के बैंक खाते में जमा नहीं हो पा रही है किसान सम्मान निधि की राशि भी सभी किसानों के बैंक खातों में जमा नहीं हो पाई है। पूरे जिले में जहां देखो वहां अतिक्रमण की बाढ़ आ गई है। राजस्व संबंधी समस्याओं का अम्बार लगा हुआ है। सीएम हेल्पलाइन और जिलास्तरीय जनसुनवाई में प्राप्त शिकायतों व आवेदन पत्रों के निराकरण में भारी गोलमाल किया जा रहा है। खनिज सम्पदा लूटी जा रही है। शराब अवैध तरीके से गांव-गांव बिक रही है। खाद्य विभाग व अन्य संबंधित विभाग मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने के लिए ध्यान नहीं दे रहे हैं। पार्को, उद्यानों की हालत खस्ता है। नर्मदा तटों का विकास और पर्यटन विकास पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ढ़ेर सारे काम अधर में लटके हुए हैं। पंचायत चुनाव के आचार संहिता लगने के पूर्व नये-पुराने सभी कामों को पूरा करने के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्कूलों में खेल-कूद प्रतियोगिताएं बंद हो गई हैं। बच्चों को खेलकूद से वंचित किया जा रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों में पढ़ाई चौपट हो गई है। इस समय सबसे चर्चा मंडला जिले की तहसील नैनपुर के पठार क्षेत्र में संचालित सभी सरकारी स्कूलों की चल रही है। बेरोजगारी चरम पर पहुंच गई है कुल मिलाकर समस्याओं का अम्बार मंडला जिले में लगा हुआ है और शासन प्रशासन द्वारा समस्याओं के निराकरण के लिए परिणामकारी कार्यवाही नहीं की जा रही है। जनापेक्षा है कि समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण किया जावे।
वही जिले की ग्राम पंचायतों में जो विधायक निधि और सांसद निधि में भी जनप्रतिनिधियों के कार्यकर्ताओं के द्वारा पुल पुलिस सी सी सड़क ग्रेवल सड़क कार्य कराए जा रहे और उन निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तो भगवान ही मालिक है और अगर कोई गुणवत्ता को लेकर सवाल करता है तो उनका खुलेआम धमकी दी जा रही है, और सरकारी पैसो की किस तरह से बंदरबाट किया जा रहा है। और विधायक और सांसद महोदय जान कर भी अनजान बने हुए स्वीकृत कार्यो को लीपापोती कर सरपंच सचिब पर दबाब बना कर राशि ले ली जाती है और बेचारे सरपंच सचिब दवाब में आकर राशि दे भी देते है और राशि न निकलने पर उन जनप्रतिनिधि के कार्यकर्ताओं के द्वारा पंचायत की जांच करनेकी धमकी दी जाती है। आखिर इस तरह से कब तक शासकीय राशि का बंदरबांट होता रहेगा विकास के नाम पर ये बड़ा सवाल बना हुआ है...
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