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Saturday, March 5, 2022

मध्यप्रदेश में फर्जी प्रमाणपत्रों में मलाईदार पदों जमे हुए लोगो के ख़िलाफ़ कार्यवाही न होने पर हाईकोर्ट की ली शरण हाई कोर्ट ने दिए ये आदेश...


रेवांचल टाईम्स डेस्क - मध्यप्रदेश में सरकारी पद पाने को लेकर लोग अपनी जाति छोड़ कर दूसरी जाति का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी पद का लाभ लेरहे है लाख शिकायतें होने के बाद जांच नही होती है बल्कि जांच के नाम पर खाना पूर्ति करते हुए जिम्मेदार अधिकारी अपना निजी स्वार्थ के चलते कोई कार्यवाही नही करते है जिस्से फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर लोग अपनी पूरी नोकरी कर सेवा निवृत हो जाते है और जांच चलती रहती है और जो पात्र व्यक्ति है वो शोषण के शिकार होते है।

          शिकायत की जांच न होने की दशा में भुआ बिछिया निवासी समाज सेवी माननीय हाईकोर्ट जबलपुर की शरण ली और अधिकावक्ता गोपाल सिंह बघेल ने माननीय न्यायालय के समक्ष प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर आदिवासी कोटे से सरकारी नौकरी पाकर मलाईदार पद पर जमे होने का आरोप लगाते हुए मामले को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पेश किया है जिसे माननीय न्यायालय ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस विशाल धगत की एकलपीठ ने मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् सरकार के द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।


         यह जन याचिका मंडला जिले के विकास खंड भुआ बिछिया निवासी प्रहलाद उइके समाज सेवी की ओर से दायर की गई है। जिसमें कहा गया है कि नरसिंहपुर जिले में मुड़हा समाज के लोग पिछड़ा वर्ग में आते है, लेकिन मुड़हा समाज के लोग मुड़िया लिखने लगे, क्योंकि मुड़िया समाज के लोग प्रदेश में आदिवासी श्रेणी में आते हैं और यह आरोप है कि मुड़हा समाज के लोग आदिवासी का फर्जी जाति प्रमाण पत्र बनवाकर आदिवासी कोटे से शासकीय नौकरी कर रहे हैं, जिसकी शिकायत उनकी ओर से सभी वरिष्ठ अधिकारियों को कि गई पर जांच नही हुई।


हाईकोर्ट ने शासन से मांगा जवाब


 वही वरिष्ठ अधिकारियो से की गई, शिकायत पर लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। याचिका में कहा गया है कि अनावेक भगवान दास मुड़िया, पंकज मुड़िया व मुकेश मुड़िया क्रमशः सब इंजीनियर डिंडोरी व नरसिंहपुर में वर्तमान समय में कार्यरत है। आवेदक की ओर से कहा गया कि पूर्व में छानबीन समिति ने वर्ष 2002 में अनावेदक गणों के खिलाफ कार्यवाही करने के आदेश जारी किए थे, लेकिन आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिनसे आदिवासियो का हक मारा जा रहा है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने शासकीय अधिवक्ता को अब तक की गई कार्रवाई पर जवाब पेश करने के निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता गोपाल सिंह बघेल ने पक्ष रखा...

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