रेवांचल टाईम्स:होली के 8 दिन पहले होलाष्टक लग जाता है. ये फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से लग जाता है. इसके बाद से होलिका दहन की तैयारी हर घर में शुरू हो जाती है. होलाष्टक से लेकर होली पर्व (Holi Festival) के बीच के दिनों में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह 8 दिन मांगलिक या शुभ कार्यों के लिए अशुभ होते हैं. इन 8 दिनों में सभी ग्रहों का स्वभाव उग्र हो जाता है. यही कारण होता है कि शुभ कार्य के लिए ग्रहों का उग्र स्वभाव सही नहीं है. अगर इन दिनों कोई शुभ कार्य करें तो या तो उसका विपरीत परिणाम सामने आ सकता है या पूरा फल व्यक्ति नहीं प्राप्त कर पाता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि होलाष्टक में शुभ कार्य क्यों नहीं होते (Holashtak 2022 katha) हैं. पढ़ते हैं आगे…
होलाष्टक से जुड़ी कथा
होलाष्टक में शुभ कार्य ना करने के पीछे एक कथा प्रचलित है जो इस प्रकार है- हिरण्यकश्यप ने फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के दिन से पुत्र प्रहलाद को कई यातनाएं देना शुरू कर दिया था. वहीं भक्त प्रहलाद को मारने के लिए हिरण्यकश्यप ने कई षड्यंत्र भी रचे थे. लेकिन प्रहलाद पर श्री हरि विष्णु की कृपा थी, जिससे वह हर षड्यंत्र को मात देता गया. फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन में हिरण्यकश्यप की बहन होलिका जल गई लेकिन प्रहलाद बच गया क्योंकि अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक भक्त प्रहलाद पर कई यातनाएं हुईं. यही कारण है कि इन 8 दिनों कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है. यह 8 दिन बेहद अशुभ माने जाते हैं.
होलाष्टक का समय
नोट – इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है.रेवांचल टाईम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है. अधिक जानकारी के लिए एक्सपर्ट से संपर्क करें.
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