शासकीय भूमि बचाने जनहितार्थ 20 फरवरी से भूख हड़ताल पर बैठने जा रही नेहा....
रेवांचल टाईम्स - राजस्व विभाग की मिलीभगत शासकीय आबादी भूमि स्वामी कर दी गई.....? क्या दोषियों पर होगी कार्रवाई या फिर दोषियो को बचाने होगी लीपापोतीसिवनी जहां एक तरफ प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुले मंच से अनेकों बार कह चुके हैं कि मध्य प्रदेश को सुशासन राज्य बनाना है। और सुशासन राज्य बनाने में यदि कोई अधिकारी या नेता या फिर और कोई अड़ंगा लगाएगा तो फिर उसके खिलाफ कार्रवाईया होगी प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान खुले मंच से मसल पावर और रसूख का इस्तेमाल करने वालेे माफियाओं को दस फिट गाड़ने की बात भी कह चुके हैं परन्तु
वही सिवनी जिले की बात की जाए तो लखनादौन तहसील के धूमा में राजस्व विभाग के पटवारी,राजस्व निरीक्षक और तहसीलदारों की मिलीभगत से शासकीय आबादी मद की भूमि भू-माफियाओ के नाम भूमि स्वामी हक में दर्ज कर दी गई है। रसूख का इस्तेमाल कर रसूखदारों ने शासकीय आबादी मद की भूमि पर कब्जा करके शासकीय राजस्व अभिलेखों में पटवारी और तहसीलदार के साथ सांठगांठ कर भूमि स्वामी हक और तो कई रसूखदारों ने खसरा के 12 नंबर कालम पर अपना नाम और कब्जा लिखवा रखा है ।
अचंभा करने वाली बात तो यह है की जिस शासकीय आबादी मद के खसरो में रसूखदारों ने अपना नाम पटवारी और राजस्व अधिकारियों के सहयोग से दर्ज करवा रखा है उन्हीं खसरो में कई वर्षो से अपने सपनो के आसियानो की झोपडी बना कर रहने वाले गरीबों का नाम पटवारी राजस्व अभिलेख में आखिर क्यो दर्ज नही हुआ। धूमा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आबादी मद की शासकीय भूमि के कई खसरे है जिन पर अधिकांश में पुराने कब्जे और रहवासी मकान बने हुए हैं परन्तु वही पुराना थाना क्षेत्र में शासकीय आबादी भूमि खसरा नंबर 410 राजस्व अभिलेख में शासकीय भूमि दर्ज है । लेकिन पटवारी ,राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार की मिलीभगत से नियम विरुद्ध शासकीय भूमि के राजस्व अभिलेख के खसरा कालम 12 पर रसूखदार दिनेश साहू का नाम दर्ज कर दिया गया है । जबकि रसूखदार दिनेश साहू के द्वारा भूमि पर बड़ी-बड़ी गोदाम और कांप्लेक्स बनाकर व्यापार करने का काम किया जा रहा है। उसी खसरा नंबर पर कांप्लेक्स और गोदाम से सटे और भी अन्य गरीबों की झोपड़ी नुमा आशियाने हैं उन गरीबों का नाम ना भूमि स्वामी हक में दर्द है और ना ही राजस्व अभिलेख के 12 नंबर कालम मे दर्ज है। क्योंकि इन गरीबों के ऊपर पटवारी और तहसीलदार ने रहमत नहीं बरसाई। जनहितार्थऔर शासन की शासकीय भूमियों को भू-माफियाओं और रसूखदारों से बचाने लापरवाह राजस्व कर्मचारी और अधिकारियों पर कार्रवाई कराने 20 फरवरी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर अपने पति और बच्ची के साथ नेहा श्रीवास्तव बैठने जा रही नेहा।
वही शासन प्रशासन से नेहा श्रीवास्तव की एक ही मांग -निष्पक्ष प्रशासन का हो काम !
रसूखदारों का यदि शासकीय जमीनों में हो दर्ज नाम, तो गरीबों का भी किया जाए दर्ज नाम!!
और यदि नियम कानून आए आगे आड,तो फिर रसूखदारो व लापरवाहो को भी ना बक्सा जाए!!
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