रेवांचल टाईम्स :हिंदू धर्म में जितना महत्व त्योहारों का है उतना ही महत्व तिथियों और व्रतों का भी है. हर महीने दो बार आने वाली यानि दो पक्षों में आने वाली एकादशी की पूजा लोग पूरी श्रद्धा और नियम के साथ करते हैं. वहीं इस दिन लोग घर में सुख-समृद्धि बरकरार रखने के लिए एकादशी का व्रत भी करते हैं. बता दें कि माघ माह की शुक्ल पक्ष को जो एकादशी आती है उस पर लोग भगवान विष्णु के लिए व्रत रख उन्हें प्रसन्न करते हैं. इस एकादशी को जया एकादशी कहते हैं. इस दिन श्री हरि नाम का सुमिरन किया जाता है. इस बार जया एकादशी 12 फरवरी दिन गुरुवार को पड़ रही है. जानते हैं क्यों नहीं खाने चाहिए एकादशी के दिन चावल…
एकादशी पर क्यों नहीं खाए जाते चावल?
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि मेधा ने माता शक्ति के गुस्से से खुद को बचाने के लिए जिस दिन शरीर त्यागा और उनके अंग धरती में समाए, वो दिन एकादशी का था. ऐसे में मान्यता है कि चूंकि महर्षि मेधा जौ और चावल (Rice) के रूप में जन्में थे. इस कारण श्रद्धालु चावल और जौ को जीव मानकर उनका सेवन नहीं करते. एक मान्यता ये भी है कि एकादशी (Ekadashi) के दिन चावल महर्षि मेधा के मांस और रक्त के समान हैं. ऐसे में धर्म शास्त्रों के अनुसार, इस दिन चावल खाने से व्यक्ति का जन्म रेंगने वाले जीव के रूप में होता है.
एक तथ्य ये भी है कि चावल में पानी की मात्रा ज्यादा रूप में पाई जाती है. वहीं पानी पर चन्द्रमा का प्रभाव ज्यादा पड़ता है। ऐसे में चावल के सेवन से शरीर में पानी की मात्रा बढ़ सकती है. साथ ही मन चंचल भी हो सकता है, जिसके कारण व्यक्ति को व्रत करने में पेरशानी हो सकती है. इसलिए भी एकादशी (Ekadashi) के दिन चावल ना खाने की सलाह दी जाती है.
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