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संत का मिलन सिर्फ भगवत कृपा से संभव-:आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री प्रज्ञानानंद जी महाराज.......




रेवांचल टाईम्स - पूज्य महाराज श्री निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में  1 जनवरी 2022 से 7 जनवरी 2022 महामाया सेलिब्रेसशन लॉन सिवनी मध्यप्रदेश में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के द्वतीय  दिवस पर महाराज श्री ने भगवान श्री परमात्मा की लीलाओं का सुंदर वर्णन भक्तों को श्रवण कराया।महाभारत काल यानी द्वापरयुग के समय, इस समय कई ऋषि-मुनि जीवित थे। इन्हीं में से एक थे शुकदेव जी महर्षि वेदव्यास के पुत्र थे, और उनकी मां का नाम वाटिका था। उनका विवाह पीवरी से हुआ था। वह वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का सम्यक ज्ञान के ज्ञानी थे।



कथा व्यास के गौरव पूज्य आचार्य जी ने कथा का सार सुनाते हुए आगे कहा कि, शुकदेव जी ने ही अपने पिता वेदव्यास जी से महाभारत सुना और देवताओं को सुनाया था। शुकदेव जी ने ही राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवद पुराण सुनाया था। शुकदेव का जन्म विचित्र तरीके से हुआ, कहते हैं बारह वर्ष तक मां के गर्भ में शुकदेव जी रहे। एक बार शुकदेव जी पर देवलोक की अप्सरा रंभा आकर्षित हो गई और उनसे प्रणय निवेदन किया। शुकदेव ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। जब वह बहुत कोशिश कर चुकी, तो शुकदेव ने पूछा, आप मेरा ध्यान क्यों आकर्षित कर रही हैं। मैं तो उस सार्थक रस को पा चुका हूं, जिससे क्षण भर हटने से जीवन निरर्थक होने लगता है। मैं उस रस को छोड़कर जीवन को निरर्थक बनाना नहीं चाहता। कथा व्यास ने महाभारत कथा का द्रोपदी स्वयंवर सुनाया। इसके अलावा कथा में परीक्षित श्राप और श्रृष्टि वर्णन प्रसंग का प्रसंग भी सुनाया गया, आज कथा में मुख्यमंत्री जनकल्याणकरी योजना प्रकोष्ठ के सह सयोंजक तोमर ने श्रीमद्भागवत कथा में श्रवण कर पूज्य व्यास पीठ में विराजित निरंजनी पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानानंद  महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।


अखिल बन्देवार एंव संतोष बन्देवार के साथ रेवांचल टाईम्स की एक रिपोर्ट

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