रेवांचल टाइम्स - नैनपुर के समीप सालीवाडा ग्राम में एक प्राचीन छोटा सा दलदल स्थान है । जहां 12 महीने पानी भरा रहता है एवम वहां एक माता जी का मंदिर है जहां लोगो की मान्यता पूरी होती है इस स्थान की जमीन में चलने से स्पंज जैसा महसूस होता है इसलिये इसका नाम दलदली है
दलदली पांच दिवसीय मेला लोगो की आस्था एवं विश्वास का केंद्र यह दलदली मेला पूश माह के पूर्णिमा से शुरू होता है एवम 5 दिन तक रहता है हर साल हजारों की संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ महाराष्ट्र से लोग अपनी मंन्नत को लेकर इस स्थान पर आते हैं बताया जाता है इस पवित्र स्थान में नवदम्पति जिनको संतान प्राप्ति नही होती उनकी मन्नत पूरी होती हेमानन्त पूरी होने के बाद हर श्रद्धालु यहां आते हैं और पूजन पाठ बच्चों का मुंडन करते हैं यहा पर, एक ऐसा कुन्ड है जिसमें बारह महीने दलदल बना रहता है जिसमें पानी भी भरा रहता है वही दलदली माता स्थान है वही दलदली का कुंड जिसका पानी पीने से लोगों की मुराद पूरी होती हैं दलदली मां संतान दायिनी खासकर जिनकी संतान नहीं होती उन लोगों की मुराद पूरी करती है माता । यहां मेले में आने वालों के लिए मनोरंजन के लिए बड़े-बड़े झूला जादू मौत का कुआं बच्चों के लिए एक से बढ़कर एक खिलौने एवं खाने-पीने के जलपान की दुकानें भी सजती है इस मेले में इस पवित्र स्थल में लोग अपनी मुरादे मांगने आते हैं और पूरी होने पर वह प्रति वर्ष दलदली में यहां पहुंचते हैं यहां पर ग्राम रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि हमारी तीन पीढ़ियों से देखते चले आ रहे हैं यहएक ऐसा स्थान है जहां पर हर किसी की मुराद पूरी होती है यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता यहाँ हर किसी की मुराद पूरी होती है।
नैनपुर से राजा विश्वकर्मा की रिपोर्ट
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