प्रकृति की आराधना-उपासना का महापर्व छठ बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में मनाया जाने वाला लोकआस्था का त्योहार है। इस पर्व को मनाने के पीछे जो दर्शन है, वह विश्वव्यापी है। शायद यही कारण है कि आज इस पर्व के प्रति न सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी लोगों में आस्था देखी जा रही है। छठ पर्यावरण संरक्षण, रोग-निवारण व अनुशासन का पर्व है। इसका उल्लेख आदिग्रंथ ऋग्वेद में भी मिलता है।
छठ पूजा में सूर्य की उपासना की जाती है। साथ ही, कठिन व्रत व नियमों का पालन किया जाता है। इस तरह यह प्रकृति पूजा के साथ-साथ शारीरिक, मानसिक और लोकाचार में अनुशासन का भी पर्व है। दीपावली पर लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, तो छठ पर नदी-तालाब, पोखरा आदि जलाशयों की सफाई करते हैं। दीपावली के अगले दिन से ही लोग इस कार्य में जुट जाते हैं, क्योंकि बरसात के बाद जलाशयों और उसके आसपास कीड़े-मकोड़े अपना डेरा जमा लेते हैं, जिसके कारण बीमारियां फैलती हैं।
आज स्वच्छ भारत अभियान और नमामि गंगे योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मनपसंद परियोजनाओं में शुमार हैं। सैद्धांतिक रूप से मोदी सरकार की गंगा सफाई योजना का जो मकसद है, उसे बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड में लोग सदियों से समझते हैं। व्यावहारिक पक्ष की बात करें तो प्रधानमंत्री ने स्वच्छ भारत की जो परिकल्पना की है, वह जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। नीति व नियमों से किसी अभियान में लोगों को जोड़ना उतना आसान नहीं होता जितना कि आस्था व श्रद्धा से।
कटिस्नान से कई रोगों का निवारण : छठ में कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य का ध्यान करने की प्रथा है। जल-चिकित्सा में यह ह्यकटिस्नानह्ण कहलाता है। इससे शरीर के कई रोगों का निवारण होता है। भारत की अक्षांशीय स्थिति ऐसी है कि देश के हर भूभाग में सूर्य का भरपूर प्रकाश मिलता है। सूर्य को इसलिए भी रोगनाशक कहा जाता है, क्योंकि जिस सूर्य की किरणें जिस घर में सीधी पहुंचती हैं, उस घर में कीड़े-मकोड़ों का वास नहीं होता।
देश के कई शहरों में होती है छठ पूजा
दिल्ली के अलावा, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद समेत देश के विभिन्न महानगरों में पूर्वांचली प्रवासी धूमधाम से छठ मनाते हैं। यही नहीं, मॉरीशस, फिजी व अमेरिका समेत कई देशों में भी भारतीय प्रवासी छठ मनाने लगे हैं, जिसे देखकर विदेशी लोगों में इस पर्व के प्रति आकर्षण बढ़ा है। छठ को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए अगर केंद्र व राज्य सरकारें श्रद्धालुओं की मदद से देश के विकास में इस पर्व का योगदान सुनिश्चित करें तो यह एक सकारात्मक पहल होगी।
No comments:
Post a Comment