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Sunday, November 7, 2021

देवउठनी एकादशी के दिन तुलसी और शालीग्राम का होता है विवाह, पूजन के समय इन बातों का रखें ख्‍याल

 



देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi) कार्तिक मास (kartik maas) शुक्लपक्ष को मनाया जाता है. इस बार देवउठनी एकादशी नवंबर महीने के 15 नवंबर को मनाई जाएगी. इसे देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है. हिंदू धर्म में मान्‍यता है कि हर साल इस दिन माता तुलसी जी और भगवान विष्‍णु के शीलाग्राम अवतार के साथ विवाह (Tulsi Vivah) होता है. मान्‍यता है कि कार्तिक मास के दौरान पूजा-पाठ (Puja) करने का विशेष फल मिलता है और यही वजह है कि धर्म कर्म के काम के लिए इस माह का विशेष महत्व है.


Devuthani Ekadashi Tulsi Vivah : हिंदू धर्म में कार्तिक का महीना (Kartik Month) विशेष महत्व है. इस महीने में अगर पूजा पाठ किया जाए तो इसका फल आसानी से मिलता है और जीवन में सुख शांति आती है. इसी महीने शुक्‍लपक्ष को देवउठनी एकादशी (Devuthani Ekadashi 2021) भी है जिसे तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) का दिन भी मानते हैं. मान्‍यता है कि चतुर्मास के आरंभ होने पर भगवान विष्णु (Bhagwan Vishnu) योग निद्रा में चले जाते हैं और दुनिया का कार्यभार भगवान शिव के कंधे पर होता है. जबकि भगवान विष्‍णु कार्तिक मास की देवउठनी एकादशी के दिन चार माह के आराम के बाद जागते हैं. यही वजह है कि इस दिन को देवउठनी एकादशी के नाम से जाना जाता है. इस दिन से सभी शुभ और मांगलिक कार्य प्रारंभ किए जाते हैं.


तुलसी विवाह शुभ मुहूर्त 2021


इस साल तुलसी विवाह की तिथि 15 नवंबर 2021 यानी कि सोमवार को है. द्वादशी तिथि आरंभ 15 नवंबर 2021 यानी सोमवार सुबह 06 बजकर 39 मिनट से शुरू होगा, जबकि द्वादशी तिथि 16 नवंबर 2021 मंगलवार सुबह 08 बजकर 01 मिनट पर समाप्त होगी. एकादशी तिथि समापन 15 नवंबर को सुबह 06 बजकर 39 मिनट पर होगा और द्वादशी आरंभ होगी.




तुलसी पूजा में रखें इन बातों का ख्‍याल




-इस दिन भगवान विष्णु के शालीग्राम अवतार और तुलसी जी का विवाह किया जाता है.




-मान्‍यता है कि इस दिन हर सुहागिन स्त्री को तुलसी विवाह जरूर करना चाहिए.




– इस पूजा को सच्‍चे मन से करने पर अंखड सौभाग्य और सुख-समृद्धि का प्राप्ति होती है.




– तुलसी पूजा के समय मां तुलसी को सुहाग का सामान और लाल चुनरी जरूर अर्पित करना चाहिए.




– इस दिन तुलसी चबूतरे पर तुलसी पौधे के साथ शालीग्राम को रखें और तिल चढ़ाएं.




-तुलसी और शालीग्राम को दूध में भीगी हल्दी का तिलक अवश्य लगाएं.

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