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Tuesday, November 2, 2021

दीपोत्सव एवं उसकी मान्यताएं...



   

रेवांचल टाईम्स - वर्षा ऋतु आती है धरती को नहला कर उसे हरियाली की सुंदर चादर ओढ़ाकर चली जाती है | गोस्वामी तुलसीदास जीने बड़ी ही सुंदर चौपाई लिखी है राम चरित्र मानस मैं -वर्षा विगत शरद ऋतु आई ।लक्ष्मण देखहु परमसुख आई ॥वर्षा के पश्चात शरद ऋतु का आगमन और इसी के साथ ही आगमन होता है दीपावली त्यौहार का | दीपों पर आधारित होने के कारण इसे दीपोत्सव भी कहते हैं ।

     कार्तिक मास की अमावस्या की घोर अंधेरी रात दीपों की रोशनी से जगमग हो जाती है | इसका महत्व सामाजिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टि से है |कहा जाता है कि इस दिन राम 'लक्ष्मण 'और सीता लंका पर विजय प्राप्त कर वनवास काल पूर्ण करने के उपरांत अयोध्या लौटे थे ।जिसकी खुशी में अयोध्या वासियों ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था |दूसरी मान्यता यह है कि समुद्र मंथन के समय 14 रत्न निकाले जाने की कथा भी इससे जुड़ी हुई है |धनतेरस के दिन धन्वंतरि वैद्य की उत्पत्ति समुद्र मंथन से हुई थी |जिन्होंने आयुर्वेद के सिद्धांत का प्रतिपादन किया था ।इसके पश्चात आयुर्वेद का ज्ञान ब्रह्मा के मानस पुत्रों को फिर महर्षि चरक को हुआ था | यम चतुर्दशी को नरकासुर नामक दानव का वध हुआ था इसलिए इसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है |तीसरे दिन कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी जी स्वयं अमृत कलश लेकर उत्पन्न हुई थी अतः इसे लक्ष्मी के आगमन का त्योहार भी कहा जाता है |और भी मान्यताओं के अनुसार किसान जब खेत से गहाई कर अपनी फसल को घर लेकर आता है | इस खुशी में भी इसे धन के आगमन का पर्व कहा जाता है | चौथे दिन गोवर्धन पूजा की जाती है इस दिन कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली में उठाकर अतिवृष्टि से ब्रज वासियों की रक्षा की थी | पांचवे दिन भाई दूज का पर्व होता है जिसे यम द्वितिया भी कहा जाता है ।पौराणिक मान्यता के अनुसार यमुना ने अपने भाई यमराज को अपने ।


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