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हबीबगंज रेलवे स्टेशन...अब इस स्टेशन का नाम भी बदलेगी सरकार



   

रेवांचल टाइम्स :मध्य प्रदेश सरकार इन दिनों आदिवासी वर्ग को साधने के लिए नाम बदलने की राजनीति कर रही है. इसी के तहत अब सरकार प्रदेश के एक और रेलवे स्टेशन का नाम बदलने जा रही है. बता दें कि हाल के दिनों में यह तीसरा रेलवे स्टेशन होगा, जिसका नाम बदला जाएगा. इससे पहले प्रदेश सरकार भोपाल के हबीबगंज का नाम बदल चुकी और पातालपानी का नाम बदलने जा रही है.

फतेहाबाद चंद्रावतीगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलेगी सरकार
बता दें कि अब सरकार जिस स्टेशन का नाम बदलने जा रही है, वो है उज्जैन का फतेहाबाद चंद्रावतीगंज रेलवे स्टेशन. दरअसल फतेहाबाद नाम का विवाद 145 साल पुराना बताया जाता है. जानकारों के अनुसार, जब राजपूत योद्धाओं और औरंगजेब के बीच युद्ध हुआ था तो उसमें औरंगजेब की जीत (फतह) हासिल हुई थी. इस क्षेत्र में फतेह मस्जिद का भी निर्माण कराया गया था, जो आज भी मौजूद है.

जानकार बताते हैं कि क्षेत्र का असली नाम धर्मट है और होलकर शासक के समय में चंद्रावतीगंज रखा गया था. इसलिए सालों से इस स्टेशन को फतेहाबाद चंद्रावतीगंज कहा जाता रहा है. स्टेशन पर ये दोनों नाम लिखे हुए हैं. अब स्थानीय लोगों ने इस स्टेशन के नाम को भी बदलने की मांग उठा दी है. जिसके बाद सांसद अनिल फिरोजिया ने प्रधानमंत्री और रेल मंत्रालय के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा है. सांसद ने कहा है कि जल्द ही वह इस संबंध में सरकार को पत्र लिखेंगे. सासंद ने कहा कि गांव का नाम चंद्रावतीगंज है तो स्टेशन का नाम भी सिर्फ चंद्रावतीगंज किया जाए.

राजपूतों से जुड़ा है मामला
यह मुद्दा राजपूतों से जुड़ा हुआ है, इसलिए राजपूत करनी सेना के प्रदेश संगठन मंत्री शैलेंद्र सिंह झाला ने कहा है कि आक्रांता औरंगजेब ने अपनी झूठी जीत पर फतेहाबाद नाम दिया था. सरकार को ऐसी सभी जगहों के नामों पर संज्ञान लेना चाहिए और हम स्टेशन का नाम बदलने की मांग कर रहे ग्रामीणों का समर्थन करते हैं.

बता दें कि फतेहाबाद चंद्रावतीगंज रेलवे स्टेशन पर हाल ही में 245 करोड़ की लागत से नया ट्रैक बनाया गया है, जिसका सप्ताह भर पहले ही पीएम मोदी ने वर्चुअली लोकार्पण किया था. इस ट्रैक के बनने से उज्जैन और इंदौर के बीच की दूरी कम हो गई है.

क्या कहते हैं इतिहासकार
इतिहासकार प्रो. रमण सोलंकी का कहना है कि नाम बदलने की परंपराएं हिंदुस्तान के इतिहास में शुरुआत से रही हैं. जब जो शासक आता है, वो अपने हिसाब से नाम रखना चाहता है. प्रो. रमण सोलंकी ने कहा कि फतेहाबाद चंद्रावतीगंज का असली नाम धर्मट रहा है. 17वीं शताब्दी में जब औरंगजेब का हिस्से के लिए अपने पिता शहाजहां से युद्ध हो रहा था तो वह फतेहाबाद, शिवपुरी, ग्वालियर, आगरा होते हुए दिल्ली पहुंचा था.

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