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जंगल बचाने से नही तनख्वाह बचाने से मतलब रखते हैं बिरसा वनपरिक्षेत्र के अधिकारी...



रेवांचल टाइम्स - वनपरिक्षेत्र बिरसा/दमोह सामान्य अपने उदासी रवैया से बाज नही आने वाला है।आये दिन हरे भरे पेड़ पौधों की कटाई अब एक आम बात हो चुकी है।ऐसा ही एक बीट 1706 धोपघट बीट है।जिसके अंतर्गत ग्राम बोरी में 150 एकड़ से अधिक का वनभूमि पर अतिक्रमण है।इसकी शिकायत वन विभाग के समस्त अधिकारियों को बार बार करने से भी वन अधिकारियों के कान में जूं नही रेंगती।बड़े मुश्किल से 24 अगस्त 2021 को वन विभाग अपने कुम्भकर्णी नींद से जागी और राजस्व विभाग,पुलिस विभाग और ग्रामीणों की मदद से लगभग 50 एकड़ वन भूमि के अवैध अतिक्रमण को हटाने में सफलता प्राप्त की।और उक्त कब्जा स्थल में बांस के लगभग 12500 पौधें को रोपित भी किया गया।लेकिन 24 अगस्त के बाद से उक्त कब्जा स्थल में वन विभाग के कोई भी जिम्मेदार अधिकारी/कर्मचारी ने आज दिनांक तक झांक कर भी नही देखे।वन विभाग के इन्ही ढुलमुल रवैया और जंगल बर्बाद करने की मिलती छूट के चलते कब्जाधारियों का हौसला लगातार बढ़ते जा रहा है।उक्त कब्जा स्थल में एक कच्चा मकान भी है।जहां पर कब्जाधारियों के द्वारा मिलकर लगे हुए बांस के पौधे को उखाड़कर फेक दिया गया है।ग्रामीणों के द्वारा दोबारा उक्त कब्जा स्थल पर बांस का पौधा रोपित किया गया जिसे पुनः कब्जाधारियों के द्वारा नष्ट कर दिया गया।साथ ही ट्रेंच की खुदाई पूरी नही होने दिया गया।इन सब बातों को बीट गॉर्ड,डिप्युटी रेंजर,रेंजर को बार बार बताया गया,लेकिन कथित जिम्मेदार अधिकारियों के द्वारा इन सब बातों को नजरअंदाज कर दिया गया।यह पहली मर्तबा नही है जो इस तरह से ये अजगर,कामचोर वन विभाग के अधिकारी अतिक्रमण हटाने के नाम से मुंह फेरते होंगे।हर बार इनके पास हजारों बहाने होते हैं।इन्हें बोरी गांव के जंगल से नही बल्कि अपने तनख्वाह से ही मतलब है।अतिक्रमणकारियों को बल देने का एक और कारण है यह भी है कि यहां के डिप्युटी रेंजर जीवनलाल वरकड़े का एक ही स्थान एक ही परिक्षेत्र में 15 सालों से अधिक समय तक जमे रहना और आलस भरे कार्य,कार्य के प्रति गैर जिम्मेदाराना व्यवहार रहा है।सहायक परिक्षेत्र अधिकारी वरकड़े के द्वारा बोरी के अतिक्रमण हटाने को लेकर कोई रुचि दिखाया ही नही जाता है।बल्कि अपने से ऊपर के अधिकारियों को अतिक्रमण को लेकर मनगढंत कहानी बता देते हैं।अतिक्रमण हटाने के बजाय अधिकारियों के कान भरने में वरकड़े माहिर है।अगर ये सभी वन अधिकारी शुरू से ही ठोस उचित कार्यवाही कर देते तो ये दिन देखने को नही मिलता।ये सब कब्जा वन विभाग की मिलीभगत से ही सम्भव हुआ है।

       जहां पर कब्जा हटाया गया है उक्त स्थान पर चारों ओर से ट्रेंच खोदने का था।लेकिन आज दिनांक तक ट्रेंच का काम पूरा नही हुआ है।न ही कच्चे मकान को हटाया गया।इसी का बल पाकर कब्जाधारी हरे भरे पेड़ पौधों को काट रहे हैं व लगे हुए बांस के पौधे को क्षति पहुँचा रहे हैं। 


रेवांचल टाइम्स लांजी, बालाघाट से खेमराज सिंह बनाफरे


दही-बेसन वाले आलू 

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