रेवांचल टाइम्स - कांजी हाउस प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत पुराण में श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए कथावाचक हिमांशु जी महाराज ने बताया कि 'भक्त प्रह्लाद और ध्रुव ईश्वर के प्रति अटल विश्वास, भक्ति और सत्य की प्रतिमूर्ति हैं। दोनों ने माया-मोह छोड़कर एक ही आधार भगवान विष्णु को अपना आराध्य माना। उनकी भक्ति में इतनी शक्ति थी कि उनकी रक्षा के लिए स्वयं श्रीहरि विष्णु ने मृत्युलोक में कदम रखा था। वह हरि के सच्चे भक्त हैं। प्रभु की भक्ति करनी है तो इन दोनों के जीवन चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए। आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण के दौरान दी। शुक्ला परिवार की ओर से संयोजित सात दिवसीय पुराण के चौथे दिन भक्त प्रह्लाद-ध्रुव चरित्र और वामन अवतार प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि प्रभु की भक्ति करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है उन पर अटूट विश्वास। प्रह्लाद और ध्रुव ने प्रभु पर अटूट विश्वास करते हुए भक्ति का अनोखा उदाहरण प्रस्तुत किया। दोनों ही कठोरतम दंडों और यातनाओं से भी नहीं डरे और ईश्वर की आराधना करते रहे। ठीक उसी प्रकार हमें भी जीवन के संकटों से नहीं डरना चाहिए और भगवान पर विश्वास कर उनकी आराधना में लीन होना चाहिए। भगवान भक्तों की सच्ची पुकार सुनकर निश्चित ही उन पर कृपा बरसाते हैं। वर्तमान में बच्चों में अच्छे संस्कार के लिए उन्हें भक्त ध्रुव व प्रह्लाद की कथा अवश्य सुनानी चाहिए। इससे उनमें अच्छे भाव व संस्कार जन्म लेते हैं। इस दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर दिव्य कथा का श्रवण करते रहे। कथावाचक हिमांशु जी महाराज भेड़ाघाट वाले ने बताया कि पुराण में बुधवार को श्रीकृष्ण अवतार की कथा सुनाई जाएगी। शाम को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया।
नैनपुर से राजा विश्वकर्मा की रिपोर्ट
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