रेवांचल टाईम्स - जिले में अबैध उत्तखन्न माफियाओं के सामने बोना साबित हो रहा जिला खनिज विभाग सरकारी भूमि हो या निजी भूमि हो बेख़ौफ़ हो कर भूमाफियाओं के द्वारा उत्तखन्न किया जा रहा है वही जानकारी के अनुसार स्वीकृति विभाग के द्वारा दी कही जा रही हैं और भू माफियाओं के द्वारा नियम क़ानून को ताक में रखते हुए मनमानी करते हुए बिना विभाग का डर के जहां से मन हुआ वहाँ की भूमि खोद दी जाती है।
वही अपनी खनिज विभाग कभी कभार छोटी मोटी कार्यवाही कर अपनी पीठ खुद ही थप थपथपा रहे है और बड़े बड़े भू माफ़िया खुलेआम राजस्व की चोरी कर रहे है
वही जानकारी के अनुसार बम्हनी से लगी ग्राम पंचायत कजरवाड़ा जहां तालाब के नाम पर भारी मात्रा में अवैध उत्खनन पर कार्रवाई का मामला सामने आया है। जानकारी में ये सामने आई है कि कजरवाड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में शासकीय तालाब खोदने के नाम पर बेहिसाब उत्खनन किया जा चुका है, लेकिन अब तक कुछ ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई थी। जब इस बात की जानकारी खनिज विभाग को लगी तो मौके पर जिला खनिज अधिकारी दिव्येश मरकाम, निरीक्षक बीके पाटिल सहित अन्य अमला मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया जहां से दो ट्रैक्टर एवं एक डम्फर को जप्त किया। जबकि मौके पर दो फोकलेण्ड मशीन थी, लेकिन उनकी जप्ति न बनाकर सिर्फ औपचारिक कार्यवाही की गई। कार्यवाही के संबंध में जिला खनिज अधिकारी ने बताया कि अभी प्रकरण नहीं बनाया गया है सिर्फ पंचनामा बनाकर लाया गया है। अब सवाल ये उठतां है कि शासकीय तालाब जो तीन मीटर से अधिक नहीं खोदा जा सकता, लेकिन 40 फिट तक कैसे खुदाई हो गई ये जॉच का विषय है।
जिले में हो रहे अवैध उत्खनन में मौन स्वीकृति निश्चित खनिज विभाग ने दे रखी हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन इन माफियाओं को पूर्ण सहयोग कर रहे हैं। जबकि प्रत्येक सोमवार को होने वाली समय सीमा की बैठक में कलेक्टर के द्वारा हमेशा निर्देश दिये जाते हैं कि अवैध उत्खनन को रोकें और अवैध उत्खनन करनेवालों पर कार्रवाई करें, लेकिन कलेक्टर के निर्देशों को नजर अंदाज कर अवैध उत्खनन को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिससे सरकार को प्राप्त होने वाले राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन संरक्षण देने वालों की तिजोरी अवश्य भर रही है। जो मामला सामने आया है उस पर कलेक्टर को स्वयं ध्यान देना पड़ेगा तभी कार्यवाही ठोंस होगी और अवैध उत्खननकर्ता से राजस्व की वसूली तय होगी।
अवैध उत्खनन को लेकर कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने साफ तौर पर कहा है कि जिले के जिस जगह अवैध उत्खनन होगा, वहां तो बीट प्रभारी जिम्मेदार होंगे, अगर सरकारी जमीन पर उत्खनन होता है तो पटवारी व राजस्व निरीक्षक की भूमिका भी तय की जाएगी। वन विभाग की भूमि में अवैध उत्खनन पाया जाता है। तो संबंधित रेंजर व एसडीओ की जवाबदारी होगी और कहीं भी अवैध उत्खनन की शिकायत मिलती है तो खनिज विभाग की संलिप्तता मानी जाएगी, बावजूद इसके अवैध उत्खनन का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है, वहीं वैध कारोबारियों के लिए अवैध उत्खनन सिरदर्द बना हुआ हैं।
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