रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में आजादी से लेकर अब तक कितना और किन किन लोगों का विकास हुआ ये बात अब लोग दबी जुबान से कहने लगे है और समझने भी लगे है कि जो जनप्रतिनिधि सुबह शाम घर पर आके बोट मांगते है और बड़ी बड़ी वादे घोषणा करते है, और फिर जीतने के बाद ऐसे गायब होते है जैसे गधे के सिर से सींग वैसे तो पिछले 2 सालों से कोरोना काल में स्कूल बंद थे पर अब मध्य प्रदेश में स्कूल खोले जा रहे हैं ! परंतु मंडला जिले में बहुत सारे स्कूल ऐसे हैं जो खंडहर में तब्दील हो चुके हैं ! बहुत सारे स्कूल ऐसे भी हैं जहां पर शिक्षक ही नहीं हैं और शिक्षक विहीन स्कूलों में अतिथि शिक्षकों के सहारे स्कूल चलाना पड़ रहा है जो जिस स्कूल में शिक्षक पदस्थ थे वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए और अपने निजी स्वर्थ के चलते अपनी अपनी व्यवस्था बना लिए है और जिन बच्चों के कारण उन्हें रोज़ी रोटी मिली थीं उन्हें अपने हाल में ही छोड़ दिया गया ये शायद शिक्षा विभाग की मजबूरी है ! जहां पर शिक्षक हैं वहा पर नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है ऐसे ही मामला मंडला जिले के घुघरी विकास खंड के संकुल केंद्र नैझर के धोबाबार स्कूल मैं देखने को मिला कि वहां पर पदस्थ प्राथमिक शिक्षक बाल सिंह मसराम के द्वारा बनाया गया स्कूल आज खंडहर में तब्दील हो चुका है और स्कूल के खपरे एवम् लकड़ियों को बेच दिया गया है !
वही ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक की लापरवाही के चलते बच्चे आज पेड़ के नीचे बैठने और खुले आसमान के नीचे पढ़ने पर मजबूर हैं ? जानकारी के अनुसार स्कूल के मरम्मत के नाम पर आने वाली राशि का कहां उपयोग किया जाता है इस बात की जानकारी ना तो पालक शिक्षक संघ को है और ना ही ग्रामीणों को वही ग्रामीणों का कहना है कि लॉकडाउन के समय जब अन्य जगहों पर शिक्षकों के द्वारा मोहल्ला क्लास लगाई जा रही थी परन्तु धोबाबार में पदस्थ शिक्षक न ही मोहल्ला क्लास लगाए और न ही स्कूल में उपस्थित रहते थे परंतु यहां धोबाबार में शिक्षक मसराम के द्वारा विगत दी माहो में एक दिन भी स्कूल नहीं खोला गया ?
ना मास्क न सेनेटाइजर
स्कूल में जब शिक्षक से मिले तो उनके चेहरे पर ना मास्क था और नहीं सेनेटाइजर बच्चे खुले मुंह पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते हुए मिले कक्षा में शारीरिक दूरी का भी पालन नहीं किया जा रहा है ! बच्चों से ज्यादा लापरवाह शिक्षक दिखाई दिए ! प्रदेश सरकार के द्वारा शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए कई तरह के कदम उठाए जा रहे हैं पर शिक्षा देने वाला ही लापरवाह हो तो शिक्षा में सुधार आना संभव ही नहीं है ?
इसी तरह का मामला प्राथमिक शाला साल्हेघोरी में भी देखने को मिला जहां पर दो स्कूल होने के बावजूद भी बच्चे सामुदायिक भवन में बैठकर शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं ! प्राथमिक शिक्षिका शिया भट्ट ने बताया कि यह स्कूल शिक्षक विहीन स्कूल है जहां पर मुझे पी एस नैझर से प्रभार में भेजा गया है इस भवन मैं 20 सितंबर से स्कूल लगा रही हूं बच्चों की दर्ज संख्या लगभग 27 की है ! उन्होंने कहा मुझे यहां स्कूल लगाने में बहुत परेशानी है क्योंकि यहां पर बच्चों के खेलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है भवन के आगे सड़क होने के कारण हमेशा बच्चों के लिए खतरा बना रहता है !
इनका कहना है
हमें अभी तक शिक्षक के द्वारा की जा रही लापरवाही के विषय में कोई शिकायत नहीं मिली है शिकायत मिलने पर उनके ऊपर नियमानुसार कार्यवाही होगी ?
जन शिक्षक खान
मैं अभी ट्रांसफर होकर आया हूं मुझे सचमुच जानकारी मिली है कि बच्चों को पेड़ के नीचे बिठालकर पढ़ाया जा रहा है पर मैंने कार्यवाही की है तत्काल स्कूल भवनों की मरम्मत की जाएगी और जितना जल्दी हो सके शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा ...?
बी ओ ऊईके जी

No comments:
Post a Comment