केंद्र बताए नीट के लिए ईडब्ल्यूएस श्रेणी की आय-सीमा 8 लाख रुपए करने का आधार क्या : सुप्रीम कोर्ट - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

 आवश्कता है  आवश्कता है ....

रेवांचल टाईम्स समाचार पत्र एव वेव पोर्टल में मध्यप्रदेश के सभी संभाग, जिला, तहसील, विकास खंडों, में संवाददाताओं की एंव विज्ञापनों व खबरों से सबंधित व्यक्ति संपर्क करें इन नम्बरों में 👉 9406771592/ 9425117297/ 8770297430/9165745947

Friday, October 8, 2021

केंद्र बताए नीट के लिए ईडब्ल्यूएस श्रेणी की आय-सीमा 8 लाख रुपए करने का आधार क्या : सुप्रीम कोर्ट



नई दिल्ली । देश की शीर्ष अदालत ने चिकित्‍सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट परीक्षा में आरक्षण के मुद्दे पर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) की आय सीमा आठ लाख रुपए वार्षिक तय करने के सरकार के फैसले पर उससे तीखे सवाल पूछे। कोर्ट ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय तथा कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूछा गया है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी तय करने के लिए वार्षिक आय सीमा आठ लाख रुपए निर्धारित करने का क्या आधार था। केंद्र सरकार की ओर से बताया गया है कि ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए आठ लाख रुपए की वार्षिक आय सीमा तय करना ‘राष्ट्रीय जीवन निर्वाह व्यय सूचकांक’ पर आधारित नीतिगत विषय है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना की पीठ ने केंद्र से स्पष्ट करने को कहा कि आयसीमा तय करने का क्या आधार और मानदंड है और क्या इस विषय पर विचार-विमर्श किया गया है या अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में क्रीमी लेयर को तय करने की सीमा से आठ लाख रुपए आय का आंकड़ा ले लिया गया है।केंद्र और चिकित्सा परामर्श समिति (एमसीसी) के 29 जुलाई के नोटिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर शीर्ष अदालत सुनवाई कर रही थी, जिनमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण प्रदान करने की बात कही गई थी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मेडिकल कॉलेजों की अखिल भारतीय कोटा (एआईक्यू) सीटों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने से पहले केंद्र को शीर्ष अदालत की मंजूरी लेनी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने उन क्षेत्रों में प्रवेश करके सीमाओं का उल्लंघन किया है जो इस मुद्दे से अलग थे। न्यायालय ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह 25 अगस्त को पारित उच्च न्यायालय के समूचे आदेश को रद्द नहीं कर रहा है या इसके गुण-दोष पर कोई राय नहीं रख रहा है बल्कि ईडब्ल्यूएस कोटा पर शीर्ष अदालत की मंजूरी के संबंध में की गई टिप्पणियों को खारिज कर रहा है।

No comments:

Post a Comment