पितृ पक्ष में सर्व पितृ अमावस्या का विशेष महत्व होता है। सर्व पितृ अमावस्या के दिन उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु की तिथि पता नहीं होती है। सर्व पितृ अमावस्या को आश्विन अमावस्या, बड़मावस और दर्श अमावस्या भी कहते हैं। इस साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या 06 अक्टूबर, बुधवार को है।
सर्व पितृ अमावस्या का महत्व-
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, जिन परिजनों को अपने पितरों की देहांत तिथि ज्ञात नहीं है, वह सर्व पितृ अमावस्या के दिन श्राद्ध और तर्पण कर सकते हैं। सर्व पितृ अमावस्या पितृ पक्ष का अंतिम दिन होता है। इस दिन पितरों को विदाई दी जाती है। इस दिन पितरों को विदाई देते समय उनसे किसी भी भूल की क्षमा याचना भी करनी चाहिए।
सर्व पितृ अमावस्या के दिन क्या करें-
मान्यता है कि श्राद्ध या पितृ पक्ष के दौरान पितर धरती पर आते हैं और उनका किसी भी रूप में अपने वंशजों के घर पर आगमन हो सकता है। ऐसे में पितरों की शांति और उनका आशीर्वाद पाने के लिए गीता के सातवें अध्याय का पाठ करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका पूरा फल पितरों को समर्पित होता है, ऐसे करने से पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
जानिए 30 सितंबर-6 अक्टूबर तक की श्राद्ध तिथियां-
दसवां दिन: नवमी श्राद्ध (मातृनवमी): 30 सितंबर (गुरूवार) 2021
ग्यारहवां दिन: दशमी श्राद्ध: 01 अक्टूबर (शुक्रवार) 2021
बारहवां दिन: एकादशी श्राद्ध: 02 अक्टूबर (शनिवार) 2021
तेरहवां दिन: द्वादशी श्राद्ध, संन्यासी, यति, वैष्णवजनों का श्राद्ध: 03 अक्टूबर 2021
चौदहवां दिन: त्रयोदशी श्राद्ध: 04 अक्टूबर (रविवार) 2021
पंद्रहवां दिन: चतुर्दशी श्राद्ध: 05 अक्टूबर (सोमवार) 2021
सोलहवां दिन: अमावस्या श्राद्ध, अज्ञात तिथि पितृ श्राद्ध, सर्वपितृ अमावस्या

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