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विश्व रेबीज दिवस पर पालतू जानवरों के लिए दिए गए मुफ्त टीके

 





पशुपालन विभाग बिछिया द्वारा पशु चिकित्सालय में तहसील स्तरीय शिविर का आयोजन



रेवांचल टाइम्स-मण्डला जिले के विकास खंड बिछिया में 28 सितंबर को विश्व रेबीज दिवस पर तहसील स्तरीय शिविर आयोजन कर पालतू जानवरों के लिए निःशुल्क टीके लगाए गए। इस शिविर को डॉ. दीपाली परते पशु चिकित्सालय बिछिया, डॉ. वर्षों तरवरे  मवई, डॉ.अनामिका वरकड़े घुटास, डॉ. दुष्यन्त सिंह मरावी रामनगर द्वारा आयोजित किया गया था इस आयोजन के मुख्य अतिथि यू. एस. तिवारी उपसंचालक मण्डला, डॉ. आर. एन. कुशरो मण्डला रहे। पशुपालकों को रेबीज के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. दीपाली परते ने बताया कि मनुष्यों और जानवरों पर रेबीज के प्रभाव के विषय में जागरूकता बढ़ाने के लिए, बीमारी की रोकथाम और रेबीज को नियंत्रित करने के प्रयासों के बारे में जानकारी और सलाह प्रदान करने के लिए मनाया जाता है पर अच्छी बात ये हैं की मण्डला जिले के विकास खंड बिछिया में पशुपालन विभाग द्वारा पशु चिकित्सालय बिछिया में पहली बार बड़े उत्साह के साथ लगभग सभी विभागों के बड़े अधिकारियों के मौजूदगी में विश्व रेबीज दिवस मनाया गया साथ ही पशुपालन विभाग द्वारा तहसील स्तरीय शिविर का भी आयोजन किया गया जिसमें कुत्तों को निःशुल्क टीकाकरण किया गया। वही इस शिविर के बारे अधिक जानकारी देते हुए बिछिया पशु चिकित्सालय के नियंत्रण अधिकारी डॉ. दीपाली परते ने बताया की इस तहसील स्तरीय रेबीज टीकाकरण शिविर आयोजन इसलिए किया गया है रेजीब जैसे गम्भीर बीमारियों के प्रति जागरूक हो। साथ ही लोग पालतू जानवरों को पाल लेते है पर अच्छे से देख भाल नही कर पाते। अगर कोई व्यक्ति कुत्ता पालता है तो उस कुत्ते का समय समय पर स्वास्थ्य परीक्षण कर समय  पर टिके भी लगवाना अनिवार्य होता है अक्सर देखने को मिलता है की लोग जानकारी व जागरूकता अभाव में रेबीज जैसे गम्भीर बीमारियों के शिकार हो जाते है। आगे डॉ दीपाली परते ने बताया कि अगर हम भारत की बात करें तो यहां भी रेबीज एक बड़ी समस्या है। एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल लगभग 20,000 लोगों की मृत्यु रेबीज की वजह से हो जाती है। रेबीज जानवरों से ही मनुष्यों में फैलता है तथा मनुष्यों के लगभग 90 प्रतिशत मामलों में कारण कुत्ते का काटना ही होता है। कुत्ते के काटने के बाद रेबीज के लक्षण एक से तीन महीने में दिखाई देने लगते हैं। रेबीज वाले मरीज को शुरू के एक-दो दिन में बुखार, भूख न लगना, कमजोरी, चिड़चिड़ापन आदि की समस्या होने लगती है। ऐसे व्यक्ति के मुंह से लार भी अधिक निकलने लगता है। अगर इनमें से कोई लक्षण किसी व्यक्ति को है तो फौरन डॉक्टर को दिखाए। रेबीज से बचने के लिए सही समय पर प्रिवेन्टिव उपाय करने जरूरी हैं। यानी उसके वायरस को मरीज के शरीर में बढ़ने से रोका जा सकता है और रेबीज से बचा जा सकता है। साथ ही इस आयोजन में पूरा स्टाप उपस्थित रहा।

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