"अपर मंडल रेल प्रबंधक ने किया गोंदिया नैनपुर एवं मंडला फोर्ट का निरीक्षण"
रेवांचल टाइम्स :- बुधवार को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अपर मंडल रेल प्रबंधक ए.के.सूर्यवंशी ने ईतवारी से तिरोड़ी, गोंदिया से नैनपुर एवं नैनपुर से मंडला फोर्ट रेलवे स्टेशन का विंडो ट्रेलींग निरीक्षण (खिड़की अनुगामी निरीक्षण) किया।
अपने निरीक्षण के दौरान उन्होनें ट्रैक की स्थिति और फिटनेस को देखा। सभी स्टेशन में पहुंचने पर सभी जिले एवं तहसील क्षेत्र की जनता ने एक बार फिर रेल अफसर से पूछा की रेलवे ट्रेक पर यात्री ट्रेनों का संचालक कब शुरू होगा, तो रेल अफसर इस पूरे मामले में पल्ला झाड़ गये। हालांकि उन्होनें कहा कि राज्य सरकार रेल मंत्रालय से अनुमति नहीं ले रही है। मतलब राज्य सरकार की ट्रेनों के संचालन में धुक-धुक हो रही है।
माना जा रहा है कि राज्य सरकार कोविड-19 की तीसरी लहर को लेकर किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाह रही है। जिस कारण वह जानबूझकर बालाघाट, एवं मंडला जिला जो महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से लगा हुआ है यहां ट्रेनों के संचालन को लेकर रूचि नहीं दिखा रही है। गौरतलब हो कि कोविड-19 के प्रसार की रोकथाम के लिए करीब 16 महीने पहले देश भर के यात्री ट्रेनों पर ब्रेक लगाया गया था। हालांकिं बाद में तमाम ट्रेनों का संचालन शुरू भी किया गया, परंतु तिरोड़ी से इतवारी,कटंगी से गोंदिया, जबलपुर नैनपुर गोंदिया एवं नैनपुर से मंडला ट्रेन का संचालन बंद पड़ा है। इस बीच सभी मुख्य स्टेशनों के बीच नया रेलपथ बनकर तैयार किया जा चुका है एवं इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य भी पूरा हो गया है एवं लगभग सभी रेलपथ का सीआरएस भी हो चुका है किन्तु इसके बावजूद अब तक यात्री ट्रेनें शुरू नहीं की गई है।
इस बीच कई बार डीआरएम के दौरे भी हुए उन्होनें अपने दौरे में क्षेत्र की जनता को आश्वस्त किया था कि अगस्त माह के अंतिम तक ट्रेनों का संचालन शुरू होगा। अगस्त बीत गया और अब सितबंर शुरू है पंरतु ट्रेनों के संचालन के कोई आसार नहीं दिख रहे है। लेकिन सिर्फ पुनः जब डीआरएम नैनपुर आए एवं क्षेत्र की जनता ने यात्री ट्रेनों के पुनः परिचालन हेतु सवाल किया तो जवाब में उन्होंने कहा कि,
"हमें अधिक फायदा गुड्स ट्रेनों से है जिसका परिचालन हम निरंतर कर रहे हैं एवं यात्री ट्रेनों से हमें कोई मुनाफा नहीं है। ऐसा कहते हुए उन्होंने पल्ला झाड़ लिया।"
वहीं अपर रेल मंडल प्रंबधक ने भी अपने दौरे में बातों-बातों में कह दिया कि राज्य सरकार रेल मंत्रालय से ट्रेनों के संचालन की अनुमति नहीं ले रही है। अगर, रेल अफसर की इस बात में सच्चाई है तो जिले के भाजपा नेताओं को चाहिए कि वह प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को जिले की जनता की व्यथा सुनायें और ट्रेनों का संचालन शीघ्र शुरू करवायें।
उल्लेखनीय हो कि बालाघाट, एवं मंडला जिले की जनता शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार के लिए पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के नागपुर, गोंदिया और छत्तीसगढ़ के रायपुर एवं मंडला जिले की जनता अधिकतर जबलपुर, इंदौर, भोपाल, पर निर्भर करती है। इसके लिए अलावा इन दोनों जिले के निवासियों की नाते-रिश्तेदारी भी इन दोनों ही राज्यों एवं शहरों में है। जिसके चलते हर दिन जिले के लोगों का इन दोनों ही राज्यों और शहरों की तरफ आना-जाना लगा रहता है। अभी ट्रेनों का संचालन बंद होने की वजह से लोग निजी वाहनों और बसों से सफर कर रहे है। यह सफर ट्रेन किराये से 5 गुना महंगा पड़ रहा है। जिसके चलते दोनों ही जिले की जनता नेताओं के आगे नतमस्तक होकर ट्रेनों का संचालन शुरू करने की गुहार लगा रही है।
बाडग्रेज संघर्ष समिति, राम सेना समाज सेवी संगठन, श्रमजीवी पत्रकार संगठन, सभी अपनी अपनी क्षमता अनुसार आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन इन गुहार और आंदोलनों का नेताओं पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
ऐसा इसलिए क्योंकि रेलवे के डीआरएम अगस्त के महीने में ट्रेनों का संचालन होने का भरोसा दे चुके थे और अब अपर मंडल रेल प्रबंधक कह रहे हैं कि राज्य सरकार अनुमति नहीं ले रही है। फिलहाल अभी भी रेल अधिकारियों के निरीक्षण से यह तय नहीं हो पा रहा है कि, यात्री ट्रेनों को संचालन कब से शुरू होगा।
भाजपा के कद्दावर नेताओं को जनता के सामने आकर बताना चाहिए कि आखिरकार ट्रेनों के संचालन में रोड़ा कौन अटका रहा है।
"क्या वाकई में राज्य सरकार मंडला एवं बालाघाट जिले में ट्रेन का संचालन नहीं होने देना चाहती?"
"या फिर रेल के अफसर अपना बचाव करने के लिए राज्य सरकार पर ठिकरा फोड़ रहे हैं ?"
✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट ✒️

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