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Sunday, September 12, 2021

ग्राम सुड़गाँव में ऋषि पंचमी का पर्व मनाया गया बड़े ही धूमधाम से.. देखें वीडियो...




रेवांचल टाईम्स - मंडला आदिवासी बाहुल्य जिले के गाँव गाँव में ऋषि मनाई गई वही आज विकासखंड मोहगाँव अंतर्गत ग्राम सुडगाँव के लोगों द्वारा  सभी देवी, देवता, खिला मुठावा, पाठ पीढ़ा, मेढ़ो, खैरखुट, पाठ बाबा, भुर्सा पाठ, कैरी के देवता, भेयी भुईया ,बड़ा देव ,बजरंग बली सहित सभी देवी देवताओं में पूजन अर्चन की गई।

 हिंदू पंचाग में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ऋषि पंचमी मनाई जाती है. वैसे हर साल गणेश चतुर्थी  के अगले दिन ही ऋषि पंचमी का पर्व मनाया जाता है. सनातन धर्म में ऋषि पंचमी का विशेष महच्व है. इस दिन सप्त ऋषियों की पूजा-अर्चना की जाती है. ऋषि पंचमी त्योहार नहीं बल्कि व्रत के रूप में मनाई जाती है. जाने-अनजाने हुई गलतियों और भूल से मुक्ति पाने के लिए लोग ये व्रत जरूर करते हैं. मान्यता है कि इस दिन जो भी व्यक्ति ऋषियों की पूजा-अर्चना और स्मरण करता है उन्हें  पापों से मुक्ति मिल जाती है. कहते हैं हरतालिका तीज  के दो दिन और गणेश चतुर्थी के एक दिन बाद ये पर्व मनाया जाता है. इस बार 11 सितंबर को मनाया गया है, आइए जानते हैं इस साल ऋषि पंचमी का पर्व का शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है.

ऋषि पंचमी शुभ मुहूर्त 

ऐसा माना जाता है कि ऋषि पंचमी का व्रत करने से अगर किसी महिला से रजस्वला (महामारी) के दौरान अगर कोई भूल हो जाती है, तो इस व्रत को करने उस भूल के दोष को समाप्त किया जा सकता है. ऋषि पंचमी के व्रत और पूजा की खास बात ये है कि इसे करने के लिए किसी खास समय की जरूरत नहीं है. शुभ मुहूर्त 11 सितंबर को
ऋषि पंचमी के लिए पूरा दिन ही शुभ है. आप किसी भी समय पूजा आदि कर सकते हैं।  

ऋषि पंचमी के करें इनकी पूजा 

पारंपरिक रूप से ऋषि पंचमी के दिन सप्त ऋषियों की पूजा की जाती है. सप्त ऋषि मतलब सात ऋषि. इन सात ऋषियों के नाम हैं- ऋषि कश्यप, ऋषि अत्रि, ऋषि भारद्वाज, ऋषि विश्वमित्र, ऋषि गौतम, ऋषि जमदाग्नि और ऋषि वशिष्ठ. कहते हैं समाज के उत्थान और कल्याण के लिए इन ऋषियों ने अपना सहयोग दिया था. उनके इस महत्वपूर्ण योगदान के प्रति सम्मान जताने के लिए ऋषि पंचमी के दिन व्रत और पूजा-अर्चना की जाती है। 

 ऋषि पंचमी हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। इस दिन नाग देवता या सर्प की पूजा की जाती है और उन्हें दूध से स्नान कराया जाता है। लेकिन कहीं-कहीं दूध पिलाने की परम्परा चल पड़ी है। जिसमें ग्रामवासी ने एक जुटता हो ऋषि पंचमी का त्योहार मनाया गया और ग्राम के पंडा पिरमा कोर्राम ,गोकल परते, संतोष मरकाम , ढोलक मास्टर प्रेमसिंह सैयाम, टिमकी वादक मंगल धुर्वे , बरुवा सीता राम सैयाम, पोहप सिंह भवेदी, चैनसिंह मलगाम , ग्राम के सदस्य कल्याण परते, परमा सिंह परते ,हनुमान सिंह, लखन सिंह, चैतू सिंह कोर्राम, गोपाल सिंह, सुखदीन मलगाम, गया दास सोनवानी, शोभेलाल,  हन्नु सिंह, पहल सिंह मार्को, सुखलाल सैयाम, फग्गन सिंह मरावी, समाजसेवी इन्द्रमेन मार्को सहित ग्राम के सभी नागरिक गण उपस्थित रहे।

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