रेवांचल टाईम्स - फर्जी अंक सूची का सरगना पुलिस की गिरफ्त में आ चुका अब आरोपी से लगभग साढ़े पांच सौ फर्जी मार्कसीट और सर्टिफिकेट बनाकर बेच चुका है।
वही जानकारी के अनुसार क्राइम ब्रांच और पुलिस ने मिलकर एक फर्जी मार्कशीट एवं सर्टिफिकेट बनाने वाले फरार आरोपी को गिरफ्तार किया। आरोपी अभी तक साढ़े पांच सौ फर्जी मार्कशीट एवं सर्टिफिकेट बनाकर एक करोड़ रुपए से ज्यादा कमा चुका है। शक है कि आरोपी हैं, के अन्य साथी भी इस गोरखधंधे में शामिल हैं. उनके बारे में पूछताछ की जा रही है।
पुराने अपराधियों का पता लगाने के लिए सक्रिय किए विशेष मुखबिर से क्राइम ब्रांच टीम को सूचना मिली कि तिलकनगर क्षेत्र में एक व्यक्ति पैसे लेकर फर्जी मार्कशीट व सर्टिफिकेट बनाने का काम करता है। फरियादी ने जब उसकी मार्कशीट को मिलान ऑनलाइन किया तो पता चला कि उसके साथ धोखा हुआ है और उसने इस मामले की शिकायत तिलक नगर पुलिस को कर दी। जिसके बाद क्राइम ब्रांच और तिलक नगर पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई को अंजाम देकर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया ।इस मामले में एक फरियादी ने तिलक नगर मे धारा 420, 467,468 का केस भी दर्ज करवाया ह था। जिसमें मुख्य आरोपी सतीश पिता उमाशंकर गोस्वामी, 'व्यासफला जूनी इंदौर फरार था। क्राइम ब्रांच व तिलक नगर पुलिस नें संयुक्त कार्यवाही करते हुये तिलक नगर क्षेत्र से आरोपी सतीश पिता उमाशंकर गोस्वामी को पकड़ा। आरोपी के कब्जे से सात मॉनीटर, 6 सीपीयू, दो प्रिंटर, 14 फर्जी सर्टिफिकेट, 50 मार्कशीट के कोरे कागज व एक मोबाइल, 2 रजिस्टर; जिसमें फर्जी ए सर्टिफिकेट बनाए हुए कुल 554 नामों का उल्लेख म है जब्त किए गए। आरोपी ने पूछताछ में बताया कि पिछले 4-5 वर्षों से 10 वीं, 12वीं, स्नातक की ट फर्जी मार्कशीट बनाने का कार्य कर रहा था।
इन यूनिवर्सिटी के बनाए जाते थे फर्जी सर्टिफिकेट
आरोपी द्वारा महाराष्ट्र बोर्ड ऑफ हायर नी सेकंडरी एजुकेशन, राजस्थान बोर्ड, विलियम क केरी यूनिवर्सिटी, मेवाड यूनिवर्सिटी, सनराईस 7, यूनिवर्सिटी, संघाई यूनिवर्सिटी, डीआरसीबी।
हर मार्कशीट के लिए तय थे
अलग-अलग रेट...
पता चला है कि सतीश ने इसके लिए बाकायदा ऑफिस खोल रखा था। कोई छात्र उसके यहां एडमिशन लेने आता या डिग्री, डिप्लोमा करने की बात कहता, तो वह उसे झांसे में लेकर सिर्फ मार्कशीट दे देता था। इसके एवज में वह मोटी रकम वसूलता था। पुलिस के मुताबिक आरोपी 10वीं और 12वीं की फर्जी मार्कशीट बनाने के लिए 10 से 15 हजार रुपए लेता था। इसके अलावा ग्रेजुएशन और अन्य मार्कशीट बनाने के लिए भी रुपए तय थे। ग्रेजुएशन की मार्कशीट के लिए 15 हजार रुपए लेता था। मध्यप्रदेश बोर्ड और यूनिविर्सटी के ज्यादा पैसे वसूलता था।
रमन यूनिवर्सिटी, ओपीजीएस यूनिवर्सिटी, एसआरके यूनिवर्सिटी, आईसेक्ट यूनिवर्सिटी, • आरके डीएफ यूनिवर्सिटी आदि के फर्जी सर्टिफिकेट बनाये जाते थे। जिसके एवज में छात्रों से मोटी रकम वसूलकर 10वीं, 12वीं स्नातक की फर्जी मार्कशीट दी जाती थी। अभी तक हुई पूछताछ में आरोपी द्वारा कुल 554 लोगों के फर्जी सर्टिफिकेट बनाकर लगभग 1.5 करोड़ रुपए आरोपी द्वारा लिये गए हैं। आरोपी से पूछताछ जारी है अन्य साथियों के बारे में खुलासे होने की संभावना है।

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