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Monday, September 6, 2021

शिक्षक विहीन शालाओं मे कैसे होगा बच्चों उध्दार मुख्यालय के नजदीकी शालाओं मे शिक्षकों की भरमार...


रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मण्डला में प्रदेश सरकार बच्चों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर नये-नये प्रयोग कर अनेकों दिशानिर्देश दे रही  है ताकि बच्चों की गुणवत्ता युक्त शिक्षा व्यवस्था हो सके और बच्चे शिक्षित होकर भविष्य का निर्माण कर सकें। पर इस आदिवासी बाहुल्य जिले मे सरकार के दिशानिर्देश खोखले साबित होते नजर आ रहे है। यहां सरकार की मंशा अनुसार जिले मे बैठे विभागीय अधिकारी/कर्मचारी   केवल  के कागजी घोड़े दौड़ाकर खाना पूर्ति मे लगे हुये हैं। पर जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। 

      जैसा की विदित है कि कोरोना महामारी के चलते करीब ढेड़ दो साल से बच्चों के स्कूल बंद होने से शिक्षा व्यवस्था चौपट हो गई हैं । जिससे बच्चों के अभिभावकों मे काफी चिन्ता लकीरें नजर आ रहीं थी पर जैसे ही सरकार ने स्कूल खोलने के लिए हरी झंड़ी दिखाई वैसे ही बच्चों एवं अभिभावकों मे काफी उत्साह देखने को मिल रहा है। शायद उन्हें यह नही पता की जिले के बहुत से स्कूलों शिक्षकों की कमी है।  कहीं उनका बच्चा जिस स्कूल मे पढ़ रहा वहां के स्कूल मे  शिक्षक हैं की  नहीं है। यह चिंता उनके मन मे  बनी हुई है।अगर शिक्षक बिहीन शाला है तो  उनके बच्चे  की पढ़ाई  कैसे होगी।


शिक्षकों की पूर्ति हेतु हो रहे हैं स्थानांतरण-


शासन ने शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए शिक्षा विभाग मे व्यापक स्थानांतरण किये गये हैं। ताकि शिक्षक बिहीन स्कूलों मे शिक्षक की व्यवस्था हो सके। सूत्रों की माने तो इस आदिवासी जिला मे यह व्यवस्था चौपट नजर आती दिख रही है कारण अधिकांश शिक्षक ग्रामीण क्षेत्रों मे नहीं जाना चाहते है जिससे लिये वे हर तरह से सैटिंग मे लगे हुए   हैं। जिसका माजरा सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कार्यालय मे रोज देखने मे मिल रहा है। अब देखना है कि उनकी सैटिंग और पैसों की झनझनाहट काम आती है या जिले मे बैठे विभाग आला अधिकारी ईमानदारी।  जो उनके मनसूबों मे पानी फेरते हुये बच्चों के भविष्य का ख्याल करते हुए। शिक्षकों को कमी वाले स्कूलों मे पदस्थ करते हैं या नहीं ......? 


जिले मे बहुत सी शिक्षक विहीन हैं शाला-


इस जिले मे विगत कई सालों से यह समस्या बनी हुई है। जिसकी  कमी दूर करने के लिए अतिथि शिक्षक के भरोसे शिक्षा व्यवस्था की जा रही थी। पर अभी तक अतिथि शिक्षक रखने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा कोई आदेश या निर्देश नही दिये गये। तो अब शिक्षक विहीन स्कूलों की कैसे होगी पढ़ाई यह बहुत बड़ा प्रश्न है? उदाहरण स्वरूप  जिले के चार विकासखंड मोहगांव, निवास, घुघरी और मवई मे लगभग 145  स्कूल शिक्षक बिहीन है। जब 4  विकास खण्ड की ये  स्थिति है तो पूरे जिले की क्या होगी ? तो फिर यहां अध्ययनरत बच्चों की शिक्षा किस तरह से संचालित होगी यह बहुत बड़ा प्रश्न है। और यह कहना गलत नही है की शिक्षा विभाग मे बैठे आला अधिकारी बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर से नही चूक रहे हैं।


मुख्यालय के नजदीक स्कूलों मे शिक्षकों भरमार-


जिला मुख्यालय या विकास खण्ड मुख्यालय के नजदीकी स्कूलों मे आवश्यकता से अधिक शिक्षक काम कर रहे हैं। सूत्रो की माने तो जिला या विकास खण्ड मुख्यालय के नजदीकी शालाओं मे शिक्षक अतिशेष है।जिसका जीता जागता उदाहरण मण्डला विकास खण्ड है यहां जानकारी के मुताबिक लगभग 132 अतिशेष शिक्षक काम कर रहे हैं। जिनमें अधिकांश शिक्षक सेटिंग करके  ग्रामीण क्षेत्रों के  स्कूलों से मुख्यालय  के नजदीकी स्कूल मे स्थानांतरण करवाया लिया है या फिर संलग्नीकरण करवा लिया है। जिससे मुख्यालय के पास के स्कूलों मे जहां दो शिक्षक की आवश्यकता है वहां पांच-छः शिक्षक काम कर रहे हैं।  जिसकी सही जानकारी विभाग छिपकर आंकड़े दे रहा है।      बच्चों  के भविष्य को लेकर जिले के बुध्दिजीवीयों विचारनीय बात है। क्योंकि यह प्रथा से दूर ग्रामीणों क्षेत्रों के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।  


शिक्षकों को गैरशिक्षकीय कार्य मे संलग्न होना-


जिले मे देखने को मिल रहा है कि कुछ शिक्षकों से गैर शिक्षकीय कार्य कराया जा रहा है। जबकि म.प्र.शासन के निर्देश हैं कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य मे न लगाया जाये। पर इस जिले मे बहुत से शिक्षकों से गैरशैक्षणिक कार्य कराया जा रहा है जिसके लिए उन्हें आफिसों मे संलग्न (अटेच) कर दिया गया है।  शिक्षा विभाग के जिला या ब्लॉक मुख्यालय के कार्यालयों  मे अधिकांश शिक्षक कार्य कर रहे। इन शिक्षकों उनकी मूल पदस्थापना वाले स्कूल भेज दिया जाये और उन्हें शैक्षिणिक कार्य मे लिया जाये तो बहुत कुछ शिक्षकों की समस्या का समाधान हो सकता है। इस विषय को लेकर शिक्षा विभाग मे बैठ अधिकारियों को विचारणीय बात है। 



जिले के मुखिया कलेक्टर महोदया से जन मांग है कि जिले की चरमराती शिक्षा व्यवस्था को पटरी मे लाने हेतु उचित दिशा निर्देश देते हुये शिक्षक विहीन स्कूलों मे शिक्षकों की नियुक्ति वहां की भरपाई की जावे।



इनका कहना है-


1- हमारे विकास खण्ड मे लगभग 41 शाला शिक्षक विहीन है।  एवं 80 शाला एक शिक्षकीय हैं। यहां शिक्षकों की पूर्ति जल्द की जावे। ताकी शिक्षा ठीक हो सके।


एच.एस.परते, 

विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, मवई, मण्डला।


2- जिला प्रशासन से अनुरोध है यहां शिक्षक विहीन शालाओं मे शिक्षकों की नियुक्ति की जावे। यहां करीब 22 शाला शिक्षक विहीन है। और लगभग 42 एक शिक्षकीय विद्यालय है।


आर.एन. पटेल

विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, निवास, मण्डला।


3- इस विकास खण्ड मे 49 विद्यालय शिक्षक विहीन है जिसकी पूर्ति होना आवश्यक है।


लाल जू सिंह उईके

विकास शिक्षा अधिकारी, घुघरी, मण्डला।


4- मोहगांव ब्लॉक मे करीब 34 शाला शिक्षक बिहीन है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिसकी पूर्ति हो आवश्यक है।


आर.एस.भगत

विकास खण्ड शिक्षा अधिकारी, मोहगांव, मण्डला.



जिले की शिक्षा व्यवस्था को लेकर अगला अंक पढ़ें.....।

रेवांचल टाईम्स से एस पी तिवारी की रिपोर्ट

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