रेवांचल टाईम्स - प्राप्त जानकारी अनुसार शहडोल संभाग के तीनो जिले शहडोल, उमरिया, अनूपपुर मे आदिवासी विभाग द्वारा संचालित केंद्र शासकीय व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र व प्रशिक्षण सह उत्पादन केंद्र जो की बेरोजगार आदिवासी युवकों एवम युवतियों हेतु वर्ष 1999-2000 से संचालित था l आदिवासी विकास के नाम पर इन जिलों में शासन द्वारा संचालित करोडो की योजनाएं में बन्दर बाट किये जाने की आ शंका जताई जा रही हैl वही जानकारी के अनुसार आदिवासी योजना के नाम पर जिले के आदिवासी विकास कार्यालय में करोडो का उपभोग कर रहे है वही इन जिलों में सूचना अधिकारी अधिनियम 2005 की जानकारियां मांगने पर जानकारी प्रदाय नही की जाती है।
वही जिले के आदिवासी विकास कार्यालय से जानकारी प्रदान न करने हेतु नये नये नुश्के आजमा रहे है l और आवेदकों को समय पर समय देते हुए ऑफिसों के चक्कर पे चक्कर लगावा जा रहा है और इसके बाद भी जानकारी नही दिया जा रही है या कहे कि किये गए शासन की योजनाओं में किये गए भ्रष्टाचार को छुपाने के नए नए आयाम तलाश रहे है इन भृष्ट अधिकारी कर्मचारियों को नियम कानून का कोई डर नजर नही आ रहा है।
संभागीय ब्यूरो जय प्रकाश जी द्वारा जब सूचना के अधिकार के अनुसार जानकारी मांगी तो अलग अलग जिलों मे अलग अलग नियम कायदे बताये जा रहे अनुप्पुर जिले मे प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की स्पष्ट रूप से युल्लंघन करते हुए जानकारी नही दी जा रही जिससे अधिकारी व कर्म चरियों को बचाया जा सके l
वही शहडोल जिले मे करोडो के आबंटन वाले खाते की जानकारी नही दी जा रही जबकि मामला प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास है समय बीतने के बाद भी कोई पत्र व्यवहार नही किया जो की अधिकारियों की मिली भगत की और इसारा कर रही है
अति तो तब हो गयी जब उमरिया जिले के सहायक आयुक्त आदिवासी विकास द्वारा ये लिखकर जानकारी दी गयी की इन केंद्रो से संबंधी जानकारी कार्यालय मे अनुपलब्ध है सोचने मजबूर है क्या संपूर्ण मध्य प्रदेश का भी यही हाल है जबकि इन सहायक आयुक्त को करोडो का आबंटन आदिवासी विकास विभाग भोपाल द्वारा प्रदान किया गया है l आदिवासी का विकास हुआ नही लेकिन इनके विकास के करोडो गायब है और कोई सुध लेने को तैयार नही करोडो का गमन कर इन केंद्रो को ताले जड़ दिये गये ताकि फिर कोई इनकी जानकारी न ले सके जबकि संम्भाग का आदिवासी वही के वही कोई विकास नही लेकिन उपर बैठे अधिकारी अपनी अपनी डफली बजा रहे l
रेवांचल टाईम्स से संभागीय ब्यूरो जय प्रकाश की रिपोर्ट

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