रेवांचल टाइम्स - राष्ट्रीय किसान मोर्चा जिला प्रभारी करण सिंह लोधी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि दिनांक 16 अगस्त को बालाघाट के अंबेडकर चौक में राष्ट्रीय किसान मोर्चा के तत्वधान में किसान विरोधी काले कानून के विरोध में जन आक्रोश रैली प्रदर्शन का कार्यक्रम आयोजित किया गया है किसान मोर्चा जिला प्रभारी करण लोधी द्वारा बताया गया कि मार्च 2020 में केंद्र की बीजेपी सरकार ने वरुणा महामारी के नाम देश में लॉक डाउन की घोषणा की वरुणा मतलब कोई रोड पर ना निकले ऐसा फूल फोरम प्रधानमंत्री मोदी ने खुद नेशनल टीवी पर ही बतला देश के लोगों को तथा किसानों को घरों में कैद करके 5 जून 2020 को किसानों के विरोध में खेती से जुड़े 3 अध्यादेश जारी किया इसके पहले 2012 में यह तीनों काले कृषि बिल ब्राह्मणवादी कांग्रेस सरकार ने लोकसभा में पेश किया था जिसका विरोध उस समय यही भारतीय जनता पार्टी कर रही थी इनका ले कृषि अध्यादेश का विरोध राष्ट्रीय किसान मोर्चा ने 16 अगस्त 2020 को राष्ट्रवादी जिला स्तरीय धरना आंदोलन किया परंतु इसके बावजूद भी सितंबर 2020 में केंद्र की बीजेपी सरकार ने लोकसभा में बहुमत के दम पर तीनों असंवैधानिक कृषि बिल पास किया परंतु राज्यसभा में कुल सदस्य संख्या 245 में से बीजेपी पृणित छृक् गठबंधन के पास केवल 115 सदस्य संख्या थी और अन्य पार्टियों की 5 सीट थी ऐसे गणित होने के बावजूद भी कांग्रेश पार्टी ने राज्यसभा में बिल के विरोध में वोट करने के बजाय वर्क आउट किया अर्थात काले कृषि कानून बनाने में सहायता की वास्तविक रुप से संविधान के अनुसार खेती यह मामला राज्य सरकार के अधीन है संविधान के कृषि के संबंध में कानून बनाने का अधिकार राज्य सरकार को दिया है नहीं केंद्र सरकार को इसके बावजूद भी केंद्र सरकार ने राज्यो के अधिकारो पर अतिक्रमण करके यह काले कानून बनाए गए हैं यह तीनों असंवैधानिक काले कृषि कानून निम्न प्रकार से है
(१) कृषक उपज व्यापार वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2020 या नया मंडी कानून
इस कानून के तहत सरकार ने यदि कंपनी को सरकारी मंडी के बाहर अपना खरीदी केंद्र खोलने अपनी निजी मंडी बनाने या देश भर में कहीं से भी किसान से सीधे खरीदी करने की छूट दे दी है इसके साथ ही खरीदी बिक्री पर टैक्स पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है इसलिए व्यापारी व कंपनियों को राज्य केंद्र से कोई लाइसेंस या परमिट लेने की जरूरत नहीं होगी
(२) मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान ९ सशक्तिकरण और सुरक्षा) अधिनियम 2020
इस कानून के तहत किसानों और खरीददार के बीच फसल और पशुओं के लिए पहले ही करार किया जाएगा यह करार फसल के मामले में 1 साल से लेकर 5 साल तक के लिए होगा इसमें खास बात यह है कि किसानों खरीददार कंपनी के बीच जो भी करार होगा उसमें सरकार या किसी अदालत को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं होगा आगे यह कानून कहता है कि आंधी बारिश ओला जैसी किसी भी प्राकृतिक आपदा से अगर फसल खराब हो गई हो तो खरीददार कंपनी की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी
(३) आवश्यक वस्तु अधिनियम 2020
इस कानून के तहत गेहूं चावल जैसे अनाज दाल दाल तिलहन आलू प्याज जैसे भोजन के लिए आवश्यक चीजों की व्यापारियों व उद्योगपतियों को जमाखोरी करने की छूट दे दी है केवल युद्ध और आपदा जैसे हालात में ही सरकार इनकी जमाखोरी पर रोक लगा सकती है
इन सभी मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मोर्चा के तत्वाधान में बालाघाट के अंबेडकर चौक में जन आंदोलन व प्रदर्शन किया जाएगा
रेवांचल टाइम्स लांजी बालाघाट से खेमराज सिंह बनाफरे

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