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Sunday, July 11, 2021

आदेश मिला स्थगन का, राजस्व विभाग और पुलिस ने कर आया बेदखल... जिम्मेदारों ने साधी चुप्पी....

 



रेवांचल टाईम्स - इन दिनों भूमि माफियाओं की बाढ़ सी आई हुई वही जिला प्रशासन नगर प्रशासन को न कोई कार्यवाही ओर न देखने तक कि फुर्सत नही है।

           वही जानकारी के अनुसार फुर्ती इतनी की खुद नायब साहब और थाना प्रभारी राहुल बघेल ने सम्भाल लिया मोर्चा....


स्थगन आदेश में बेदखली की कार्रवाई करने के बाद अपनी पीठ थपथपा ने के लिए पुलिस ने जारी किया प्रेस नोट...


लापरवाहो पर कार्रवाई नहीं हुई तो महिला आयोग और मानव अधिकार आयोग में होगी शिकायत......


सिवनी-लखनादौन तहसील के धूमा उपनगर राजस्व निरीक्षक मंडल धूमा के अंतर्गत में राजस्व विभाग इन दिनों या तो मूड फुड़वा रहा है या कहें की फोड़ रहा है, तो अब आप पढ़ कर अचंभित हो जायेंगे, और ऐसा हम नही कहते, बीते दिनों से हो रहे कुछ वाक्यात इसकी गवाही खुद दे रहे हैं| पहला मामला लखनादौन तहसील के ही सलैया गांव में बीते दिनों दो पक्षों के जमीनी विवाद में कब्जा दिलाने गई टीम में 3 पटवारी, राजस्व निरीक्षक और मालजमादार को कब्जा वारंट-क्रमांक 112 /दिनांक 25 2021दिया गया की प्रकरण क्रमांक 03 870 2020-21 आदेश दिनांक 8 से 21 के अनुसार ग्राम सलैया पटवारी हल्का नंबर 7 राजस्व निरीक्षक मंडल धूमा तहसील लखनादौन में स्थित खसरा नंबर 163 रखवा 0.08 हेक्टेयर भूमि पर अनाआवेदक मनीष पटेल के कब्जा पर अनावेदक को कब्जा की गई भूमि से बेदखल करते हुए आवेदक को कब्जा सौंपकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने नायब तहसीलदार धूमा वृत द्वारा आदेश जारी किया गया ।जबकि उक्त बेदखली कार्रवाई में मालजमादार और स्वयं कार्यपालक मजिस्ट्रेट यानी कि नायब तहसीलदार को मौजूद होना था लेकिन वहां पर पूरी भूमिका राजस्व निरीक्षक और 3 पटवारियों को दे दी गई और फिर वहां पर विवाद उत्पन्न हुआ और मार पिटाई तक की नौबत आ गई और मामला बाद में थाने तक पहुंच गया वहां वहां जो हुआ वो दुःखद था । और लापरवाही के कारण ही हुआ।और वहीं एक बार फिर लापरवाही देखने में आई है । जहां केवल अस्थाई स्थगन आदेश को बेदखली आदेश बता कर धूमा थाना प्रभारी और नायब तहसीलदार की मौजूदगी में निर्माणाधीन कार्य को तोड़फोड़ करते हुए आनावेदक के परिवार की एक लड़की के साथ पुलिस के द्वारा घसीटकर मारपीट कर  घायल करदेने  की खबर सामने आई है।





जिम्मेदारों ने ही किया नियम विरुद्ध कार्य.. श्रीमान आपने ये क्या कर दिया

 

न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी लखनादौन जिला सिवनी के अस्थाई आदेश क्रमांक 642 दिनांक 9 साथ 2021 को अस्थाई स्थगन आदेश जारी किया गया जिसमें स्पष्ट लेख था कि ग्राम धूमा स्थित भूमि खसरा नंबर 146/1,470 रखवा क्रमशः 0.01, 0.20 हेक्टेयर भूमि पर अन आवेदक सुरेश रामदेव के द्वारा आ वेदिका के स्वामित्व एवं आधिपत्य की भूमि पर अनाधिकृत रूप से लगभग 5 फीट चौड़ी 100 फुट लंबी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है प्रथम दृष्टया आवेदक का आवेदन स्वीकार कर न्यायालय नायब तहसीलदार धूमा के राजस्व प्रकरण क्रमांक- 0014/अ-70/2021 पारित आदेश दिनांक 5/4/ 2021 पर अपील प्रकरण में आगामी तिथि तक प्रश्नआधीन भूमि पर विपक्ष किसी भी प्रकार का अनाधिकृत कब्जा ना करें यथास्थिति बनाए रखने हेतु आस्थाई स्थगन आदेश जारी किया गया था।

परंतु राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी माने जाने वाले नायब तहसीलदार के द्वारा की गई कार्रवाई पूरे क्षेत्र में सवाल खड़े कर रही है कि आखिरकार आदेश मिला स्थगन का, और कर दी तोड़ फोड़, और तो और एक्सिक्यूटिव मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में.. अब शासन प्रशासन से सवाल करना और उस पूरे मामले पर प्रशासनिक जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई की सभी को अपेक्षा है।


जहां बेदख़ली करनी है वहां हो रहा है धड़ल्ले से निर्माण,


मध्यप्रदेश शासन के यशस्वी मुख्यमंत्री की मंशा है की भू माफियाओं पर कार्रवाई हो और शायद यही कारण है कि जबलपुर हाईकोर्ट से एक आदेश भी जारी हुआ है जो मध्य प्रदेश शासन के मुख्य सचिव को लिखा गया है वह भी धूमा स्थित शासकीय भूमि पर अवैध कब्जों के संबंध में और इसके पहले भी न्यायालय तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लखनादौन के कई प्रकरणों में शासकीय भूमि के अवैध कब्जों को लेकर बेदखली आदेश जारी किए गए पर उन आदेशों पर अमल राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम के द्वारा नहीं की गई। न्यायालय के बेदखली आदेशों पर नायब तहसीलदार और थाना प्रभारी कार्रवाई करने जुगत नहीं लगा पा रहे हैं लेकिन हां कल के अस्थाई स्थगन आदेश को बेदखली आदेश बताकर निर्माणाधीन कार्य में तोड़फोड़ सामने से करवा कर अन आवेदक परिवार की लड़की से की गई पुलिस की बर्बरता वही लगे सीसीटीवी कैमरों में सेव हो गई है। आखिर जिन कार्यों को बड़ी ही जिम्मेदारी से और शासन के हितों पर ध्यान रखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा पर खरे उतरने के बजाय यदि जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी नियम विरुद्ध तरीके से अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए सार्वजनिक रूप से न्यायालयों के आदेश को अलग ढंग से प्रस्तुत करते हुए इस तरह की घटनाओं को अंजाम देंगे तो प्रशासन पर और शासन पर सवाल उठने लाजमी है। सिवनी जिले के लखनादौन जनपद पंचायत के धूमा ग्राम पंचायत के अंतर्गत ऐसे कई प्रकरण हैं जिनमें शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा और निर्माण को लेकर बेदखली के आदेश स्वयं नायब तहसीलदार लखनादौन और अनु विभागीय कार्यालय से जारी किए गए हैं परंतु उन पर इतनी तत्परता से कार्य अभी तक नहीं दिखाना किया गया है लेकिन कल के अस्थाई स्थगन पर बेदखली की कार्रवाई कर दी गई और बेचारी अन आवेदक परिवार की एक लड़की को घायल तक होना पड़ा और लखनादौन के शासकीय अस्पताल में अपना इलाज तक करवाना पड़ा यह प्रशासन को गंभीरता से सोचने की और लापरवाह हूं पर कार्रवाई करने की बात है।


ग्राम पंचायत धूमा 8 जून की नायब तहसीलदार न्यायालय से बेदख़ली आदेश करा चुकी है, इसकी जानकारी पटवारी से लेकर sdm तक को है पर मजाल है, कोई वहाँ जाकर देख ले


पंचायत की अतिक्रमण भूमि जिस पर बेदख़ली आदेश हुआ है, वहां बीम डल गयी सेंटिंग कस गयी कल लेंटर भी हो जाएगा पर साहब को क्या, तब कहां चली जाती है इतनी तत्परता,


क्या है मामला??? 


तो सुनिए, हम बताते है  कल सुरेश नामदेव के परिजनों के मुताबिक रात में करीब 9 बजे sdm का स्टे ऑर्डर पहुँचा, घर पर बच्ची अकेली थी , फिर भी नोटिस तामील हो चुका था और सुबह से काम बंद था, पर राजस्व विभाग को एक निजी भूमि की इतनी चिंता, कि  आव देखा न ताव, पहुँच गए अमला लेकर, और तोड़ दिया निर्माण, जबकि अनुविभागीय कार्यालय लखनादौन से केवल अस्थाई स्थगन आदेश किया गया था उक्त विवादित भूमि में जो भी निर्माण हो रहा है केवल उस निर्माण पर रोक लगा दी जाए और संबंधित तिथि पर अपना जवाब दिया जाए।


अब सवाल तो उठेंगे साहब????


क्योंकि स्टे ऑर्डर में ये कहीं नहीं लिखा था की पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम जाकर अन आवेदक को कब्जा की गई भूमि से बेदखल कर दिया जाए या फिर निर्माणाधीन कार्य को तोड़ दिया जाए। अस्थाई स्थगन आदेश में यह भी नहीं लिखा था की आप मौके पर जाईये, और निर्माण तोड़ आईये, और इतना ही नही घर वालो के साथ मुड़ फुटोअल भी करिये,



एक आदेश नायब तहसीलदार का जिसमे आदेश हुआ पर कागजो में, यथार्थ में, कार्यवाही नहीं हुई ।

और एक आदेश sdm का,जिसमे अपीलार्थी को न्याय दिया गया है,और अस्थाई स्थगन आदेश जारी किए गए पर उस पर बेदखली की कार्रवाई  कर दी गई।


 

आप कार्य पालिक दंडाधिकारी है जिसे न्यायाधीश भी कहा जाता है, न्याय कीजिये न्याय......

 इतना ही नहीं अस्थाई स्थगन आदेश पर पुलिस विभाग और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम के द्वारा थाना प्रभारी और स्वयं कार्यपालक दंडाधिकारी यानी कि नायब तहसीलदार की मौजूदगी में अस्थाई  स्थगन आदेश  के बदले बेदखल की कार्रवाई करते हुए पुलिस विभाग के द्वारा अपनी पीठ थपथपा ने के लिए एक प्रेस विज्ञप्ति तक जारी कर दी गई जिसमें स्पष्ट लिखा है कि राजस्व अमले एवं धूमा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई द्वारा धूमा में हटाया गया अवैध निर्माण पुलिस के द्वारा जारी प्रेस नोट में यह भी लिखा गया है कि उक्त भूमि पर स्थगन होने के बाद भी निर्माण कार्य निरंतर जारी होने पर पटवारी धूमा द्वारा अवैध निर्माण बेदखली हेतु प्रतिवेदन थाना प्रभारी धूमा को दिया गया उक्त प्रतिवेदन के परिपालन में नायब तहसीलदार श्री मार्को को राजस्व निरीक्षक श्री धुर्वे पटवारी एवं अन्य राजस्व अमले के साथ सुरक्षा व थाना प्रभारी एवं टीम द्वारा मौके पर जाकर सुरेश नामदेव का अवैध निर्माण शांतिपूर्ण तरीके से ध्वस्त कराया गया अब एक प्रश्न  यहां पर उठता है की अवैध निर्माण बेदखली हेतु प्रतिवेदन थाना प्रभारी धूमा को पटवारी धूमा द्वारा दिया गया जिसमें प्रतिवेदन के पालन में थाना प्रभारी और तहसीलदार श्री मार्को को राजस्व निरीक्षक और अन्य पटवारी राजस्व अमले के साथ सुरक्षा व थाना प्रभारी मौके पर जाकर प्रतिवेदन के पालन में अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया गया ।और एसडीएम कोर्ट लखनादौन के स्थगन आदेश की अवहेलना करने पाए जाने पर अनावेदक पर धारा 188 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में भी ले लिया गया। प्रेस नोट में यह भी लिखा गया है कि उक्त कार्रवाई में थाना प्रभारी धूमा राहुल बघेल एवं स्टाफ ,नायब तहसीलदार श्री मार्को ,राजस्व निरीक्षक एवं अन्य राजस्व अमले का योगदान रहा है।जबकि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व लखनादौन से अस्थाई स्थगन आदेश किया गया था ।

जबकि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कार्यालय से केवल अस्थाई स्थगन आदेश जारी हुआ था ना कि बेदखली आदेश इस पूरे मामले में पद के दुरुपयोग करने की पूरी रूपरेखा सामने आ रही है केवल अस्थाई स्थगन आदेश को बेदखली आदेश बनाकर राजस्व विभाग और पुलिस विभाग के द्वारा जो कार्रवाई की गई है जिसमें एक अनावेदक परिवार की महिला घायल तक हो गई है यह प्रशासन के लिए और शासन के लिए गंभीर बात है प्रशासन को और जिम्मेदार शासन को इस पूरे मामले में संज्ञान लेने की आवश्यकता है मानव अधिकार आयोग और महिला आयोग को भी इस पूरे मामले पर हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है यदि न्यायालय से या फिर किसी प्रशासनिक कार्यालय से कोई आदेश होता है तो उस आदेश में अमल होना या उस आदेश का पालन होना बहुत जरूरी है लेकिन यदि आदेश के विपरीत जिम्मेदार ही पद के दुरुपयोग करते हुए आदेश का दुरुपयोग करते हुए गलत तरीके से उक्त आदेश का पालन करा आते हैं तो यह शासन प्रशासन के लिए गंभीर बात है पूरे मामले में शासन प्रशासन को गंभीरता दिखानी चाहिए और लापरवाही करने वाले राजस्व विभाग और पुलिस विभाग पर तत्काल जांच बिठा कर कार्रवाई कर देनी चाहिए। ताकि शासन प्रशासन के तहत इस तरह की गलत नतीजों से प्रशासनिक आदेशों निर्देशों की धज्जियां ना उड़ सके और लोगों में न्यायालय की प्रति प्रशासनिक कार्यालयों के प्रति विश्वास दे बनी रहे। पूरे मामले पर प्रशासन को शासन को गंभीरता दिखाने की आवश्यकता है।

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