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Wednesday, July 7, 2021

भानपुर बिसौरा पंचायत में उन्नीस लाख से ऊपर गबन करने का आरोप जल्द मिल सकती है संबंधित आरोपियों को कोर्ट का नोटिस...

 


रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिले मंडला में भ्रष्टाचार से सबंधित कोई ये पहला मामला नही अगर इस जिले की एक एक पंचायत की गंभीरता से जांच हो जाये तो करोड़ो के बिल जनप्रतिनिधियों के नाम ही लगे हुए है इस भ्रष्टाचार में बहुत हद तक जनप्रतिनिधियों ने पूरा सहयोग किया है।

           वही सूत्रों से जानकारी के अनुसार ग्राम की संसद कही जाने वाली ग्राम पंचायत जिनके पास ग्राम स्तर की मूलभूत सुविधाओँ को मूर्तरूप देने और मजदूर वर्ग को ग्राम में ही रोजगार देने जैसे सैकड़ों काम आसानी से किये जाकर ग्राम के चहुमुखी विकास का इतना अधिकार है कि_अगर ईमानदारी से कार्य संपन्न किये जाएं तो किसी के हस्तक्षेप की जरुरत ही नहीं है।

पर दुर्भाग्य से आज ऐसा फलीभूत होता नहीं  दीख रहा?

 क्योंकि लालच/कमीशन का खेल जिसमें छोटे बड़े चाटुकार छुटभैये नेता से लेकर सरपंच/सचिव अगर किसी भ्रष्टाचार के मामले में फँस जाएं और मामला तहसील/जनपद या जिले के अधिकारियों के ऑफिस में पहुँच जाता है तो आरोपियों की सत्तासीनों तक पहुँच और राजनीतिक दबाव के चलते पेशी दर पेशी बजाने के वावजूद हाथ में सिफर ही आता है।

और फिर मामलों का आवेदक जो न्याय की आस के साथ सरकार के राजस्व की हानि को संबंधितों से बसूलने और आम जनता के हक़ पर डाका डालने वाले की शिकायत करता है तो न समय पर निराकरण ही हो पाता है न ही दोषियों को कोई सजा ही मिल पाती है? और अपीलार्थी शिकायत करते 2 थक हारकर कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हो जाता है।

इन तमाम प्रक्रियाओं में इतना समय बर्वाद हो जाता है कि पंचायतों और इसके प्रतिनिधियों का कार्यकाल ही पूर्ण हो जाता है। पर न्याय पाने कितना भी समय क्यों न लग जाये पर न्याय जरूर मिलता है। और दोषियों को उचित दण्ड भी।।

ऐसा ही एक मामला मंडला जिले की निवास जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भानपुर बिसौरा में हुये भ्रष्टाचार का है । जहाँ की सरपंच श्रीमती द्रोपती बाई पिछले कार्यकाल से लेकर वर्तमान में भी सरपंच पद पर हैं। उक्त ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचार के मामले कई बार अखबारों की सुर्खियों में रहे। पर तत्कालीन जनपद के जिम्मेदारों से लेकर जिले के आला अधिकारियों द्वारा आज तक संबंधित सरपंच- सचिव पर कोई कठोर कार्यवाही न किये जाने से एक ओर जहाँ फरियादी को निराशा हाथ लगी वहीँ उक्त पंचायत के सरपंच/सचिव और अधिकारियों की कथित मिलीभगत भी स्पष्ट प्रदर्शित होती है।  

उक्त ग्राम पंचायत के बिसौरा निवासी समाजसेवी अशोक नामदेव ने इस पंचायत के सरपंच के ऊपर तमाम विकास कार्यो में लीपापोती कर करोड़ों की राशि के गबन का आरोप सबूत के साथ जनवरी वर्ष 2019 को जनपद में लगाई गई सुचना के अधिकार से मिली जानकारी के आधार पर लगाया है, जनपद से मिली प्रमाणित प्रति के अनुसार बिसौरा के सरपंच/सचिव ने कूट रचित दस्तावेज लगाकर (फर्जी बिल वाउचर) आदि से (19.97891) उन्नीस लाख संतान्वे हजार आठ सौ इंकान्वे रुपये के विभिन्न योजनाओं में हेराफेरी कर अलग अलग मद से डकार लिया गया। और गाँव का  विकास मुँह ताकता रह गया।

          यही कारण है कि इस पंचायत की सरपंच की कारगुजारियों के चलते आज भी अनेकों  कार्य जो सीधे जनोपयोगी हैं जिसमें श्मशान घाट भी सामिल हैं जो अधूरे पड़े हैं।  

अपीलार्थी उक्त गबन के मामले की निःपक्ष जाँच हेतु तत्कालीन सीईओ और जुलाई 2016 को निवास डिवीज़न मजिस्ट्रेट कार्यालय में दी एवं निवास थाना में एफ आई आर दर्ज भी करवाई जिस पर निवास पुलिस द्वारा 420/467/471/409/120B के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया जाना कहा गया? पर राजनीति आड़े आयी और 

जाँच ठन्डे बस्ते में चली गई। ऐसे में आवेदक द्वारा जन सुनवाई केम्प में अधिकारियों जन प्रतिनिधियों के समक्ष शिकायत की गई पर ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हुई। पुनः मंडला जिला पंचायत और एस.पी.महोदय को भी जाँच हेतु दस्तावेज पेशकर न्याय की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला? 

पुनः मंडला कलेक्टर को भी 7/2016 को दस्तावेज सहित शिकायत की गई जिसे के कलेक्टर द्वारा गंभीरता से लिया जाकर एफ आई आर के आदेश दिये पर? कथित तौर से राजनितिक दवाब के चलते डी एम का आदेश भी हवा हो गया। और आज भी उक्त सरपंच महोदया द्वारा स्वछंद होकर जनकल्याणकारी योजनाओं के पैसों की होली खेलना जारी है।

आवेदक थक हारकर पंचायत के लोगों के साथ सरपंच द्वारा राशि के बंदरबांट के विरुद्ध न्याय पाने धरना प्रदर्शन भी किया परंतु जिम्मेदारों/अधिकारियो के कान में जूं तक नहीं रेंगी? 

ये तो पुराने कार्य की बानगी है? इसी वर्ष कराये गये निर्माण कार्य जिसमें कंक्रीट रोड/आंगनवाड़ी भवन/स्नान घाट निर्माण/और विधायक निधि से पुलिया निर्माण जो लगभग दस लाख राशि के अलावा इसी मद की राशि तीन लाख पिचहतर हजार खर्च कर नल जल विस्तारीकरण के नाम पर कुछ पाइप बिछाकर इतिश्री कर दी गई?

           आवेदक द्वारा इस मामले में न्याय पाने  करीब पाँच वर्षों तक लगातार प्रशासन और जन नेताओं के चक्कर काटते हुये परेशान और हतास होकर जबलपुर माननीय न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य हुआ और मार्च 2021 को जबलपुर हाईकोर्ट में मामले को पेश कर दिया है।

अब कोर्ट तत्कालीन प्रतिनिधियों सहित ग्राम बिसौरा भानपुर पंचायत की सरपंच द्रोपती तत्कालीन सचिव जनपद सीईओ कलेक्टर मंडला एस पी मंडला (EOW)/ सहित पंचायती राज ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य सचिव_ को नोटिस भेजकर जवाब तलब करने की तैयारी में है। 

अब देखना यह है की उक्त कई लाखों के किये भ्रष्टाचार की मुखिया को दण्डित करने से रोकने कौन कौन चेहरे सामने आते हैं।

साथ ही यह भी प्रतीक्षित है की वर्तमान विधायक निधि से मिली राशि को सरपंच द्वारा किये बंदरबांट को माननीय निवास विधायक जी संज्ञान में लेते हैं या नहीं? विकास का इतना अधिकार है कि_अगर ईमानदारी से कार्य संपन्न किये जाएं तो किसी के हस्तक्षेप की जरुरत ही नहीं है।

पर दुर्भाग्य से आज ऐसा फलीभूत होता नहीं  दीख रहा?

 क्योंकि लालच/कमीशन का खेल जिसमें छोटे बड़े चाटुकार छुटभैये नेता से लेकर सरपंच/सचिव अगर किसी भ्रष्टाचार के मामले में फँस जाएं और मामला जनपद या जिले में पहुँच जाता है तो समझ लीजिये कि अधिकारी/बाबुओं की बाँछे खिल जातीं हैं।

और फिर मामलों का आवेदक जो न्याय की आस के साथ सरकार के राजस्व की हानि को संबंधितों से बसूलने और आम जनता के हक़ पर डाका डालने वाले की शिकायत करता है तो न समय पर निराकरण ही हो पाता है न ही दोषियों को कोई सजा ही मिल पाती है? और अपीलार्थी शिकायत करते 2 थक हारकर कोर्ट की शरण में जाने को मजबूर हो जाता है।

इन तमाम प्रक्रियाओं में इतना समय बर्वाद हो जाता है कि पंचायतों और इसके प्रतिनिधियों का कार्यकाल ही पूर्ण हो जाता है। पर न्याय पाने कितना भी समय क्यों न लग जाये पर न्याय जरूर मिलता है। और दोषियों को उचित दण्ड भी।।

ऐसा ही एक मामला मंडला जिले की निवास जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत भानपुर बिसौरा में हुये भ्रष्टाचार का है । जहाँ की सरपंच श्रीमती द्रोपती बाई पिछले कार्यकाल से लेकर वर्तमान में भी सरपंच पद पर हैं। उक्त ग्राम पंचायत के भ्रष्टाचार के मामले कई बार अखबारों की सुर्खियों में रहे। पर तत्कालीन जनपद के जिम्मेदारों से लेकर जिले के आला अधिकारियों द्वारा आज तक संबंधित सरपंच- सचिव पर कोई कठोर कार्यवाही न किये जाने से एक ओर जहाँ फरियादी को निराशा हाथ लगी वहीँ उक्त पंचायत के सरपंच/सचिव और अधिकारियों की कथित मिलीभगत भी स्पष्ट प्रदर्शित होती है।  

उक्त ग्राम पंचायत के बिसौरा निवासी समाजसेवी अशोक नामदेव ने इस पंचायत के सरपंच के ऊपर तमाम विकास कार्यो में लीपापोती कर करोड़ों की राशि के गबन का आरोप सबूत के साथ जनवरी वर्ष 2019 को जनपद में लगाई गई सुचना के अधिकार से मिली जानकारी के आधार पर लगाया है, जनपद से मिली प्रमाणित प्रति के अनुसार बिसौरा के सरपंच/सचिव ने कूट रचित दस्तावेज लगाकर (फर्जी बिल वाउचर) आदि से (19.97891) उन्नीस लाख संतान्वे हजार आठ सौ इंकान्वे रुपये के विभिन्न योजनाओं में हेराफेरी कर अलग अलग मद से डकार लिया गया। और गाँव का  विकास मुँह ताकता रह गया।

         यही कारण है कि इस पंचायत की सरपंच की कारगुजारियों के चलते आज भी अनेकों कार्य जो सीधे जनोपयोगी हैं जिसमें श्मशान घाट भी सामिल हैं जो अधूरे पड़े हैं।  

अपीलार्थी उक्त गबन के मामले की निःपक्ष जाँच हेतु तत्कालीन सीईओ और जुलाई 2016 को निवास डिवीज़न मजिस्ट्रेट कार्यालय में दी एवं निवास थाना में एफ आई आर दर्ज भी करवाई जिस पर निवास पुलिस द्वारा 420/467/471/409/120B के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया जाना कहा गया? पर राजनीति आड़े आयी और 

जाँच ठन्डे बस्ते में चली गई। ऐसे में आवेदक द्वारा जन सुनवाई केम्प में अधिकारियों जन प्रतिनिधियों के समक्ष शिकायत की गई पर ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ हुई। पुनः मंडला जिला पंचायत और एस.पी मंडला को भी जाँच हेतु दस्तावेज पेशकर न्याय की गुहार लगाई गई, लेकिन कोई हल नहीं निकला? 

        पुनः  कलेक्टर को भी 7/2016 को  दस्तावेज सहित शिकायत की गई जिसे माननीय कलेक्टर द्वारा गंभीरता से लिया जाकर एफ आई आर के आदेश दिये पर? कथित तौर से राजनितिक दवाब के चलते डी एम का आदेश भी हवा हो गया। और आज भी उक्त सरपंच महोदया द्वारा स्वछंद होकर जनकल्याणकारी योजनाओं के पैसों की होली खेलना जारी है।

आवेदक थक हारकर पंचायत के लोगों के साथ सरपंच द्वारा राशि के बंदरबांट के विरुद्ध न्याय पाने धरना प्रदर्शन भी किया परंतु जिम्मेदारों/अधिकारियो के कान में जूं तक नहीं रेंगी? 

          ये तो पुराने कार्य की बानगी है? इसी वर्ष कराये गये निर्माण कार्य जिसमें कंक्रीट रोड आंगनवाड़ी भवन स्नान घाट निर्माण और विधायक निधि से पुलिया निर्माण जो लगभग दस लाख राशि के अलावा इसी मद की राशि तीन लाख पिचहतर हजार खर्च कर नल जल विस्तारीकरण के नाम पर कुछ पाइप बिछाकर इतिश्री कर दी गई?

        आवेदक द्वारा इस मामले में न्याय पाने  करीब पाँच वर्षों तक लगातार प्रशासन और जन नेताओं के चक्कर काटते हुये परेशान और हतास होकर जबलपुर माननीय न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य हुआ और मार्च 2021 को जबलपुर हाईकोर्ट में मामले को पेश कर दिया है।

अब कोर्ट तत्कालीन प्रतिनिधियों/ सहित ग्राम बिसौरा भानपुर पंचायत की सरपंच द्रोपती तत्कालीन सचिव/जनपद सीईओ कलेक्टर मंडला एस पी मंडला (EOW) सहित पंचायती राज ग्रामीण विकास विभाग के मुख्य सचिव_ को नोटिस भेजकर जवाब तलब करने की तैयारी में है। 

अब देखना यह है की उक्त कई लाखों के किये भ्रष्टाचार की मुखिया को दण्डित करने से रोकने कौन कौन चेहरे सामने आते हैं।

साथ ही यह भी प्रतीक्षित है की वर्तमान विधायक निधि से मिली राशि को सरपंच द्वारा किये बंदरबांट को माननीय निवास विधायक जी संज्ञान में लेते हैं या नहीं?

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