रेवांचल टाईम्स - 12 जुलाई को भगत सिंह वार्ड पुरानी थोक सब्जी मंडी के पीछे झुग्गी झोपड़ीयो में निवासरत लोगो की आवाज बनकर सामने आई आम आदमी पार्टी के द्वारा कलेक्टर को सोपा गया ज्ञापन जिसमे जिला अध्यक्ष दुर्गेश विश्वकर्मा द्वारा बताया गया कि पुरानी थोक सब्जी मंडी के पीछे स्तिथ झुग्गी झोपड़ी 1975 से स्तिथ है , जिन्हें 1998 में एक वर्षीय पट्टा मिला था जिसका ना तो नवीनीकरण हुआ ना ही स्थाई पट्टा मिला , जबकि उक्त झुग्गी झोपड़ी वाले लगातार नगर पालिका को टेक्स दे रहे है , बिजली कनेक्शन है , राशन कार्ड धारक भी है , मतदाता है जिलाध्यक्ष दुर्गेश विश्वकर्मा द्वारा सवाल उठाया गया कि , इतना सब कुछ होने के बाद भी क्या कारण है कि उन्हें ना तो स्थाई पट्टा मिला और ना ही प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ ।
उक्त झुग्गी झोपड़ी वाले नगरीय जीवन-जी रहे है । उक्त झुग्गी झोपड़ी पाल-पट्टी , टूटी-फूटी दीवार , आधी-अधूरी छत जीर्णशीर्ण झुग्गियों में रह रहे है । ऐसी स्तिथि में पता नही किस तूफान में उनका घर बिखर जाए , बरसात में बरसाती कीड़े साप - बिछु उनकी झोपड़ियों मे घुस जाए , ऐसे में बच्चों सहित तमाम परिवारों का उस जगह जीवन यापन करना बमुश्किल है । झुग्गी निवासियों को हर मौसम का प्रतिकूल सामना करना पड़ता है । आर्थिक स्थिति इतनी ठीक नही है के वे अपना घर स्वयं के खर्चे से बना सके। वास्तविक रूप से उक्त गरीब झुग्गी झोपड़ी वालों को स्थाई पट्टा मिलना चाहिए था लेकिन अभी तक स्थाई पट्टा नही मिला शत प्रतिशत हकदार वो ही किन्तु इनका हक़ छीन कर नगरपालिका के जनप्रतिनिधि अपने अपने लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना लाभ दिला रहे । अभी तक वहाँ भाजपा कांग्रेस द्वारा उनकी आवाज उठाने के बजाए दबा दी गयी , आज फिर दुगनी छमता के साथ आम आदमी पार्टी गरीब मजदूर झुग्गी झोपड़ी वालों के हक व अधिकार के लिए आगे आकर उनका उनका हक दिलाने के लिए सामने आई एवं झुग्गी झोपड़ी निवासियों की आवाज उठाई । उक्त ज्ञापन कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष दुर्गेश विश्वकर्मा, संगठन मंत्री अधिवक्ता आरिफ कुरैशी , रघुवीर सनोडिया,रिजवान अहमद कुरेशी, अधिवक्ता मनीष बर्वे, श्याम कश्यप, राजश्री मुन्नी बाई जीत कुमारी फातमा अंजुम द्रोपति चौधरी ज्योति,झुग्गी झोपड़ी निवासी सहित तमाम कार्यकर्ता उपस्थित रहे । उक्त प्रेस विज्ञप्ति सह मीडिया प्रभारी प्रफुल्ल बिटले द्वारा जारी की गई ।
विनोद दुबे के साथ रेवांचल टाईम्स की रिपोर्ट


No comments:
Post a Comment