रेवांचल टाइम्स :- कोरोना महामारी का देश की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है, जिससे महंगाई आसमान छू रही है. वहीं, अब आम जनता को सफर में भी महंगाई की मार झेलनी पड़ रही है. दरअसल, मंडला जिले में यात्री ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद होने के कारण लोगो को मजबूरन बसो में सफर करना पड़ रहा है और इधर बस का किराया भी अधिक बढा दिया गया है। मानो ऐसा प्रतीत होता है कि परिवहन विभाग को भनक तक नहीं लगी है. बस संचालक यात्रियों से तय किराए में 40 रुपये बढ़ाकर ले रहे हैं. पहले यात्रियों को नैनपुर-बालाघाट के 80 रूपये देना पड़ते थे. अब उन्हें 120 रुपये देना पड़ रहे हैं. वहीं नैनपुर-मंडला की बात करें तो पहले 50 रुपये किराया लगता था लेकिन अब 80 रुपय लिया जा रहा है।
बता दें, लॉकडाउन के दौरान सड़क परिवहन को भी पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. हालांकि, अब एक बार फिर से बसे चलने लगी हैं.
वहीं, नैनपुर से आसपास के जिलों के बीच चलने वाली बसों को शुरू हुए करीब 15-20 दिन हुए हैं. इस बीच बस संचालकों ने बसों का किराया बढ़ा दिया है. कुछ दिन पहले ही नैनपुर से समीप के जिलों के बीच चलने वाली बसों में ड्राइवर व कंडेक्टर को बढ़ी हुई किराया सूची थमा दी गई है. इसी सूची के अनुसार यात्रियों से किराया भी वसूला जाने लगा.
एक तरफ रेलवे और मंडला जिले के जनप्रिनिधियों की लापरवाही के चलते यात्री ट्रेनों का आवागमन प्रारंभ नहीं हो पा रहा है। जिसके चलते मंडला जिले के आदिवासी, गरीब, मजदूर वर्ग, एवं निम्न वर्ग को ज्यादा किराया देकर बसों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। लेकिन इसके लिए ना हीं रेलवे और ना हीं मंडला जिले के जनप्रिनिधि इस ओर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
यह मंडला जिले का दुर्भाग्य ही है कि जिले में दो सांसद होने के बावजूद भी जिसमें एक लोकसभा और दूसरी राज्यसभा सांसद हैं, और एक सांसद महोदय केंद्र में मंत्री भी हैं।
फिर भी जिले की जनता को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिऐ परेशान-हलाकन होना पड़ रहा है।
नैनपुर की नगर पालिका से लेकर केंद्र तक बीजेपी की सरकार है लेकिन जिले की जनता के दोनों हांथ खाली ही है।
नैनपुर से होकर कुछ साप्ताहिक ट्रेनें चलाई गई हैं जो गरीब जनता के किसी भी काम की नहीं हैं। जब इन साप्ताहिक ट्रेनों का परिचालन चालू हुआ तो नैनपुर नगर पालिका अध्यक्ष एवं बीजेपी कार्यकर्ता ने बड़े जोश में बैंड और आतिस्बाजी से ट्रेन के प्रथम आगमन पर स्वागत किया था और कहा था कि हमारी पार्टी, सांसद, एवं प्रधानमंत्री जी के सफल प्रयास से ट्रेनों का पुनः परिचालन शुरू हुआ है। और जल्द ही यात्री पैसेंजर ट्रेन भी प्रारंभ हो जाएंगी। लेकिन जनता ने भांप लिया था कि यह सिर्फ जुमला (लालीपाप) ही है।
कोरोना काल और बढ़ती महंगाई से आम आदमी का बुरा हाल है. पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार बढ़ोतरी के बाद अब निजी बस ऑपरेटर ने भी किराया बढ़ा दीया है. बस का सफर महंगा होने से आम आदमी की जेब पर भी इसका असर पड़ रहा है।
पेट्रोलियम पदार्थो की बढ़ती कीमत का असर आम आदमी की जेब पर पडऩे लगा है। जिले में पेट्रोल की कीमत 110.25 रूपए और डीजल की कीमत 102.44 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं। डीजल की कीमत बढऩे से ऑटो चालकों ने किराया डेढ गुना कर दिया है। वहीं, बसों का किराया पहले से ही ज्यादा वसूला जा रहा है। लंबी दूरी की बसों में किराया वृद्धि 75 प्रतिशत तक हो गई है। सार्वजनिक परिवहन महंगा होने से समाज के हर तबके पर बुरा असर पड़ रहा है। कोरोना संक्रमण, लॉकडाउन व कोरोना कफ्र्यू से आर्थिक रुप से कमजोर हुए लोगों के लिए किराया वृदिध भारी पड़ रही है। ज्यादा किराया वसूलने को लेकर जनता में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
यात्रियों से सिवनी जाने के लिए 120, मंडला जाने के लिए 80, बालाघाट के लिऐ 120 रुपए तक चार्ज लिया जा रहा है। जबकि मंडला का किराया 50, सिवनी का 85, और बालाघाट का 80 रुपए था। ऐसे में यदी यह बस मालिकों की मनमानी है तो अब परिवहन विभाग को यात्रियों के साथ हो रही इस धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई करने की जरूरत है।
और यदि परिवहन विभाग द्वारा ही किराया बढ़ाया गया है तो जिले के जनप्रिनिधियों कों जल्द से जल्द यात्री पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन पुनः प्रारंभ करने के विसय में तत्काल विचार करना चाहिए जिससे आम जनता को बढ़ते किराए से राहत मिले।
✒️ नैनपुर रेवांचल टाइम्स से शालू अली की रिपोर्ट✒️

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