रेवांचल टाईम्स :- जिले के वरिष्ठतम अधिकारियों की नही है इनके सामने कोई बख्त बड़बोल रेत माफियाओं के। वही रेत माफिया के आतंक से अधिकृत ठेकेदार भी परेशान, रेत खदानों के ठेका होने के बावजूद भी दबंग लोग लगे है अवैध उत्खनन करने में।
जिला कलेक्टर-एसपी को लिखा खत शिशिर खंडार ने अवैध उत्खनन रोकने के लिए उत्खनन ना रुकने पर होगा ठेकेदार को तगड़ा नुकसान।
क्षेत्र के नामचीन रेत माफिया पर दर्ज है चौरई एसडीएम को कालिख पोतने सहित दर्जनों आपराधिक प्रकरण।
छिंदवाड़ा के चांद में रेत की कालाबाजारी को अंजाम देने वाले रेत माफिया वैसे तो जिले भर में सक्रिय है परंतु जिले के तहसील चाँद से अवैध रेत निकाल कर सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपयों का चूना लगाया जा रहा है। इधर जीवनदायनी कही जानी वाली इन नदियों का सीना रातोंदिन रेत माफिया छलनी करने में लगे हैं। अवैध रूप से चल रहे इस रेत उत्खनन कार्य से जहां शासन को लाखों रुपए के रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है, वहीं अधिकृत ठेका कंपनी को भी नुकसान पहुंच रहा है।
इसके साथ ही नदियों के अस्तित्व पर संकट के बादल गहराते जा रहे है।
प्रशासन की ढुलमुल नीति व अन्यत्र दबाव के चलते रेत माफियाओं के विरुद्ध ठोस कार्यवाही ना होने से उनके हौसले बुलंद है।
जबकि इसी मामले में कंपनी के प्रबंध संचालक शिशिर खंडार ने जिला कलेक्टर .एसपी और खनिज अधिकारी को पत्र प्रेषित कर माफियाओं द्वारा किए जा रहे अवैध रेत खनन की जानकारी से अवगत कराया है साथ ही पत्र के माध्यम से उन्होंने छिंदवाड़ा जिले की रेत खदानो से हो रहे अवैध खनन व उसके विक्रय पर त्वरित रोक लगाये जाने की मांग भी की है।
प्रेषित पत्र में उन्होंने विस्तार से उल्लेख भी किया है कि शासन से 06 जून 2020 को छिंदवाड़ा जिले के चाँद तहसील की रेत खदानो से रेत खनन कर विक्रय किए जाने का अनुबंध सिर्फ शिशिर खंडार के साथ हुआ है वर्तमान मे रेत खनन पर प्रतिबंध लगा हुआ था फिर भी कुछ लोगों के द्वारा जिले में नदी नालो से रेता का अवैध खनन कर उसका विक्रय किया जा रहा है, जिससे शासन को राजस्व की भारी क्षति पहुंच रही है।
इस प्रकार से रेत की अवैध बिक्री किए जाने से जब 01 अक्टुबर से रेत खनन पर प्रतिबंध खुल गया हैं तो ऐसे में नदी नालो मे हमारे लिए रेता नहीं बचेगी और हमे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इस मामले में उचित जाँच कराकर अवैध रेत खनन एवं उसके विक्रय पर त्वरित पाबंदी लगायी जाए जिससे राजस्व की हानि को रोका जा सके तथा नदी नालो से हमें पर्याप्त रेत प्राप्त हो सके।
गौरतलब हो कि चाँद क्षेत्र के कुख्यात रेत तस्कर दबंगाई के लिए जाने जाते हैं चाँद का यह खेमा कई वर्षो से दबंगाई कर अवैध रेत खनन के कार्य को एकाधिकार रूप से संचालित करते आ रहा है।अतः किसी ओर को रेत का ठेका मिल गया तो इन्हें भारी तकलीफ हो रही हैं ये चाहते हैं कि रेत का ठेका निरस्त हो जाये ताकि इनका अवैध खनन का कार्य सुचारू रूप से संचालित होता रहे।
इन चर्चित रेत माफियाओं के काले कारनामो की लंबी फेहरिस्त हैं इन तस्करों के विरुद्ध कई प्रकरण दर्ज हैं जिसमे चौरई एसडी एम को कालिख पोतने का कांड भी शामिल हैं जो न्यायालय में लंबित है।
ऐसे कई जघन्य अपराधों में संलिप्त तथाकथित रेत माफियाओं अवसरवादियों को सफेदपोश नेताओ का संरक्षण होना कोई युक्तिसंगत बात नही है क्योंकि वे एक दूसरे के पूरक होते है समाज मे बात तो यह उठती है कि आखिरकार जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पुलिस अधिकारियों के इन रेत माफियाओं जघन्य अपराध के पुजारियों पर ठोस कार्यवाही करने में हाथ क्यू काँपते है या उन्हें हाथ डालने से ओले पड़ने का भय समाया है।
गौरतलब होवे की कार्यवाही ना होने की दशा में जनता की उसी सोच को बल मिलता नजर आता है कि कही प्रशासनिक तंत्र इन रेत माफियाओं गुंडों की कठपुतली तो नही बन गया।

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