रेवांचल टाईम्स :- आदिवासी बाहुल्य जिला डिंडोरी के अंतर्गत आने वाले जनपद मुख्यालय बजाग स्थित सामुदायिक चिकित्सालय इन दिनों सवालों के घेरे में है। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही और कार्यप्रणाली लगातार क्षेत्र वासियों के चिंता का सबब बनते जा रही है। सर्वविदित है कि तहसील मुख्यालय और इसके आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार कोरोनावायरस के मरीज मिल रहे हैं। बजाग मुख्यालय पर कोविड केयर सेंटर का ना होना और डिंडोरी जानने से डरने के साथ विभागीय कर्मियों के द्वारा सही जानकारी ना दिए जाने के चलते लोग अस्पताल पहुंच कर इलाज कराने से बचना चाहते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोनावायरस गांव गांव में पहुंच चुका है और अब कोविड की जांच ना होने के चलते बिना जांच हुए बिना ही मौत के शिकार हो रहे हैं।
आज जनपद मुख्यालय बजाग अंतर्गत आमाडोंगरी केरीटोला निवासी दिनेश कुमार विश्वकर्मा पिता माखन विश्वकर्मा उम्र 30 वर्ष की आक्सीजन लेवल कम होने के चलते मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार इनका पूरा परिवार बीमार है पर स्वास्थ्य विभाग की नाकामी और असंवेदनशीलता ही कहें कि लोग डर के कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बजाग में जाकर इलाज नहीं करा रहे हैं। जबकि विभाग की ग्राउंड स्तर की रिपोर्टर आशा कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा कोई जानकारी एकत्रित नहीं की जा रही है। सही डिटेल्स ना मिलना और गांव गांव कोविड की जांच ना हो पाना अब लोगों की जान पे आ गया है।
लगातार खबर लिखे जाने के बाद भी प्रशासन और विभाग की कान में जू तक नहीं रेंग रहा है। एक बिना काम के डाक्टर के सहारे बजाग वासियों का भविष्य चौपट किया जा रहा है और सरकार लोगों को मरते हालातों में छोड़कर मद मस्त हाथी की तरह घूमती और सोती हुई दिखाई दे रही है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार बजाग क्षेत्र में हर गांवों में कोरोना के मरीजों सैकड़ों की तादाद में है। एक ओर जहां विभाग के पास जांच करने को बहुत ही कम किट है वहीं दूसरी ओर वन ग्रामचांडा में आज 8 लोगों के एक साथ पोजिटिव आने की जानकारी लोगों को सदमे में ला रही है। क्षेत्रीय ग्रामीण गरीबी और लाचारी का जीवन जीने को मजबूर हैं। लोगों की जान का कोई मोल नहीं रखा जा रहा है ऐसे में अगर कोई भी ऊंच नीच होता है तो पूर्ण रूप से विभाग और सरकार जिम्मेदार होगा।

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