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Thursday, April 8, 2021

राज्य सूचना आयोग की बड़ी कार्यवाही..... सूचना के अधिकार RTI की उड़ा रहे धज्जियां.......संभाग के अधिकारियों पर गिरी गाज.........



रेवांचल टाईम्स - सूचना के अधिकार कानून के प्रति सरकारी अधिकारियों की बेरुखी और राज्य सूचना आयोग के आदेशों की उपेक्षा सागर संभाग के तीन अफसरों को भारी पड़ी। वन विभाग और कृषि विभाग के दो अफसरों पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना किया गया है। राज्य सूचना आयुक्त विजय मनोहर तिवारी ने कृषि विभाग के तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी बीएल कुरील और वन विभाग के तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी हुकुमसिंह ठाकुर पर सूचना के अधिकार कानून की धारा 20 (1) के तहत यह जुर्माना लगाया गया। पन्ना नगर पालिका के उपयंत्री सुरेश साहू पर भी 25 हजार का जुर्माना किया गया है। सभी मामले चार साल पुराने हैं। आयोग के आदेश विभागों के प्रमुख सचिवों को भी भेजे गए हैं। आयोग का अनुभव है 15 साल बाद भी सरकारी विभागों में कई लोक सूचना अधिकारियों को कानून में अपनी स्पष्ट भूमिका का सामान्य ज्ञान ही नहीं है। न वे 30 दिन की समय सीमा में आवेदकों को कोई जवाब देते और न ही जानकारी देेते। यहां तक कि खारिज करने योग्य आवेदनों पर भी कोई निर्णय नहीं लेते। प्रथम अपीलीय अधिकारियों के आदेश तक बेफिक्र बने रहते हैं। सालों बाद अपील आयोग में आने पर उनके पास कोई तर्कसंगत जवाब नहीं होते। इसलिए वे सुनवाइयों से नदारद रहते हैं। आयोग ऐसे अधिकारियों को लेकर सख्त है। 


पन्ना नगर पालिका परिषद के उपयंत्री सुरेश साहू को भी 25 हजार रुपए का जुर्माना किया गया है। अपीलार्थी वीरेंद्र सिंह ने अक्टूबर 2017 में निर्माण कार्यांे से संबंधित जानकारी चाही थी। यह जानकारी उपयंत्री से संबंधित होने के कारण उन्हीं के पास संधारित थी लेकिन उन्होंने लोक सूचना अधिकारी को उपलब्ध नहीं कराई। आयोग में दूसरी अपील में भी 13 सुनवाइयां चलीं। यह भी एक रिकॉर्ड है, क्येांकि आमतौर पर आयोग के स्तर पर इतनी अधिक सुनवाइयों की नौबत आती नहीं है। आयोग ने साहू को जुर्माने का नोटिस देने के बाद व्यक्तिगत सुनवाई के कई मौके दिए, लेकिन वे हाजिर ही नहीं हुए। आयोग ने इसे एक गंभीर प्रकरण माना, जिसमें सूचना के अधिकार कानून और आयोग के आदेशों की अवहेलना की गई। आयोग ने उपयंत्री सुरेश साहू को समलोक सूचना अधिकारी मानकर जुर्माना किया।


दमोह के आवेदक कृष्णकांत ने अगस्त 2016 में वन विभाग से झालौन रेंज के बारे में चार बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी, जो 30 दिन की समय सीमा में देने के योग्य थी। जब लोक सूचना अधिकारी ने कोई निर्णय नहीं लिया तो प्रथम अपीलीय अधिकारी ने जानकारी देने के आदेश दिए। उस आदेश का भी पालन नहीं हुआ। इसलिए यह प्रकरण आयोग के समक्ष आया। आयोग के समक्ष बताया कि आयोग में पहली सुनवाई अगस्त 2020 में हुई थी। उपस्थित अधिकारी ने बताया कि दो दिन पहले ही जानकारी भेज दी गई है। यानी चार साल 10 दिन के विलंब से जानकारी दी गई। लेकिन इस विलंब का कारण नहीं बताया गया। आयोग ने तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी को जुर्माने का नोटिस देकर जवाब मांगा। सुनवाई के लगातार चार अवसर दिए जाने के बावजूद तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी हुकुमसिंह ठाकुर आयोग में हाजिर नहीं हुए। न ही कोई जवाब भेजा। इस रवैए पर आयोग ने गहरी नाराजगी जताते हुए जुर्माने का फैसला सुनाया और इस फैसले को सर्विस बुक में दर्ज करने के आदेश दिए।


किसान कल्याण और कृषि विकास विभाग के तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी बीएल कुरील को भी मार्च 2017 के एक मामले में धारा 20 (1) का नोटिस जारी हुआ था। उन्हें सुनवाई के चार मौके दिए गए, लेकिन हर बार वे नदारद रहे। दमोह के आवेदक भरत चौबे ने कृषि विकास अधिकारी की लॉग बुक और टूर डायरी के बारे में जानकारी चाही थी, जो देने योग्य थी। प्रथम अपील आदेश का भी पालन नहीं किया गया। आयोग के समक्ष प्रकरण आने पर लेाक सूचना अधिकारी ने किसी और प्रकरण पर अपना जवाब पेश किया, जबकि सुनवाई किसी दूसरे प्रकरण की थी। जुर्मानेे के नोटिस पर जवाब के लिए उन्हें भी लगातार चार मौके दिए गए। आयोग ने अपने आदेश और सूचना के अधिकार कानून की उपेक्षा को गंभीरता से लेते हुए धारा 20 (1) के तहत दोषी मानकर जुर्माने का फैसला सुनाया।


-'सूचना के अधिकार के तहत आवेदक एकमुश्त अनेक आवेदन एक ही दिन में लगाते हैं। सूचना अधिकारियों को हरेक पर अलग निर्णय लेना चाहिए। इसकी समय सीमा है। उनके स्तर पर क्रियान्वयन की स्थिति से यह स्पष्ट है कि उन्हें कानून में अपनी भूमिका का समुचित ज्ञान नहीं है। वे ऐसे एकमुश्त आवेदनों से परेशान होकर कोई निर्णय ही नहीं लेते। यह स्थिति उनके लिए जुर्माने की धारा 20 (1) की तरफ ला रही है। जबकि कई अस्पष्ट जानकारी वाले आवेदन वे अपने स्तर पर आसानी से खारिज कर सकते हैं, लेकिन यह भी उन्हें ज्ञात नहीं है। आयोग की सुनवाइयों की उपेक्षा भी गंभीर है।


अखिलेश बन्देवार के साथ रेवांचल टाईम्स की एक रिपोर्ट

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