कोरोना में 14 दिनों की लिमिट क्या है? पॉजिटिव होने के बाद क्या-क्या होता है शरीर में? - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

रेवांचल टाइम्स अखबार पाठकों से अनुरोध करता है कि आप अपने सुझाव हम तक जरूर भेजें.. ताकि आने वाले समय मे हम आपकी मदद से और भी बेहतर कार्य कर सकें... साथ ही यदि आपको लेख अच्छा लगे तो इसे ओरों तक भी पहुंचाए.. प्रकाशन हेतु ख़बरें, विज्ञप्ति मोबाइल- 9406771592 पर व्हाट्सएप्प करें

Monday, April 19, 2021

कोरोना में 14 दिनों की लिमिट क्या है? पॉजिटिव होने के बाद क्या-क्या होता है शरीर में?



नई दिल्ली: भारत के साथ-साथ दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस का कोहराम जारी है. तेजी से बढ़ रहे मामलों की वजह से दुनिया के टॉप शहरों की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं ने भी दम तोड़ दिया है. भारत की स्थिति की बात करें तो दिन-प्रतिदिन बद से बदतर होती जा रही है. अब तक भारत में 1 करोड़ 53 लाख से भी ज़्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. पिछले 24 घंटे की बात करें तो भारत में लगभग 2 लाख 75 हजार से भी ज्यादा नए मामले दर्ज किए गए हैं. जबकि 1614 लोगों ने दम तोड़ दिया. भारत में कोरोना की ये दूसरी लहर चल रही है. कोरोना पेशंट को 14 दिन का समय रिकवर होने में लगता है.

आपको बताते हैं कि आखिर 14 दिन की लिमिट का क्या है मतलब?
कोरोना के ज्यादातर मरीजों की स्थिति 14 दिनों के भीतर बेहतर हो जाती है, लेकिन 10 फीसदी मरीज़ ऐसे भी हैं जिनकी हालत दूसरे हफ्ते तक आते-आते काफी खराब हो जाती है.




वायरस की जानकारी
कोरोना की वजह से लोगों के मन में तरह-तरह के सवाल उठ रहे हैं. लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक करने के लिए एक्सपर्ट्स कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां भी दे रहे हैं. एक्सपर्ट बताते हैं कि जो मरीज शुरुआती दो हफ्तों तक ठीक रहते हैं, उनकी तबीयत लगातार बेहतर होती जाती है. कोरोना वायरस के मरीजों की तबीयत बिगड़ने में बिल्कुल समय नहीं लगता, जबकि रिकवर होने में काफी लंबा वक्त लग जाता है.

कोरोना मरीजों को हो सकती हैं ये परेशानियां
संक्रमण शुरू होने के 9 दिन बाद मरीज को सेप्सिस हो सकता है. यह 7 से 13 दिनों के बीच हो सकता है.
संक्रमित होने के 12 दिन बाद मरीज Infant respiratory distress syndrome (आईआरडीएस) से पीड़ित हो सकता है. आईआरडीएस 8 से 15 दिनों के बीच हो सकता है.
कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद मरीज के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है.
लक्षण दिखने के बाद 3 से 13 दिनों के बीच वेंटिलेटर पर जाने की नौबत भी आ सकती है.
मरीज को 10 से 17 दिन के बीच हृदय से संबंधित गंभीर दिक्कतों का भी सामना करना पड़ सकता है.
10 से 17 दिनों के बीच किडनी की बीमारी यानी (Acute kidney injury) से भी जूझना पड़ सकता है और 13 से 19 दिनों के बीच कोरोना का मरीज अन्य संक्रमणों का भी शिकार हो सकता है.




सावधानी

सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें यानी दो गज़ दूरी बनाएं.

बार बार साबुन से हाथ धोते रहे या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करते रहें.

बिना मास्क के घर से बाहर न निकलें.

जितना जल्दी हो सके वैक्सीन लगवा लें.

No comments:

Post a Comment