रेवांचल टाइम्स :- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा जन जन तक सस्ती दवाइयों की उपलब्धता के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि परियोजना का शुभारंभ विगत 4 वर्ष पूर्व किया गया था , जिसके तहत भारत वर्ष में सात हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्र खोले गए ,बड़े हर्ष का विषय है कि मंडला जिले में एकमात्र जन औषधि केंद्र ग्राम अंजनिया में खोला गया है। लेकिन नैनपुर नगर में इस योजना का लाभ जनता को क्यों नहीं दिया जा रहा यह प्रश्न आज नैनपुर की जनता के मन में उठ रहा है जन औषधि केंद्र में सभी प्रकार की दवाइया 50% से लेकर 90% तक ब्रांडेड दवाइयों की अपेक्षा कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इन दवाइयों की गुणवत्ता ब्रांडेड दवाइयों की तरह ही होती है आज लगभग सभी घरों में दवाइयों की आवश्यकता होती है अगर हम जन औषधि की जेनेरिक दवाइयों का उपयोग करते हैं तो निश्चित ही बड़ी बचत कर सकते हैं जन औषधि केंद्र का उद्देश्य ही जन जन तक सस्ती दवाइयां उपलब्ध कराना है इनकी गुणवत्ता में किसी प्रकार की कमी नहीं है हमें इन्हीं दवाइयों का उपयोग करना चाहिए इनके अलावा महिलाओं के मासिक धर्म में होने वाली परेशानियों में उपयोग में आने वाले बाजार में बिकने वाले महंगी सेनेटरी पैड की तुलना में जन औषधि के सस्ते सेनेटरी पैड उपयोग करने एवं बाजार से कम कीमत में आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।
जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड या फार्मा की दवाईयों के मुकाबले सस्ती होती है, जबकि प्रभावशाली उनके बराबर ही होती है। प्रधानमंत्री जन औषधि अभियान मूलत: जनता को जागरूक करने के लिए शुरू किया गया हैं ताकि जनता समझ सके कि ब्रांडेड मेडिसिन की तुलना में जेनेरिक मेडिसिन कम मूल्य पर उपलब्ध हैं साथ ही इसकी क्वालिटी में किसी तरह की कमी नहीं हैं। साथ ही यह जेनेरिक दवायें मार्केट में मौजूद हैं जिन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सकता हैं।
इस योजना में आम नागरिकों को बाजार से 60 से 70 फीसदी कम कीमत पर दवाइयां मुहैया कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार देशभर में 1000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र खोलेगी।
आम जनता के लिए जन औषधि केंद्र काफी मददगार साबित हो रहा है। देखा जाए तो सरकार के लाभ प्रयास के बाद भी मरीजों का शोषण रूकने का नाम नहीं ले रहा है।
शासन के निर्देश के बावजूद चिकित्सकों में कोई सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि निजी प्रेक्टिस से लेकर बाहर की दवाएं लिखना उनके आदत में शामिल हैं। लाख सर्तकता के बाद भी मरीजों का शोषण होता रहता है।
- नैनपुर नगर के निवासीयों का कहना है कि मरीज को लेकर जाने के बाद जब हम डाक्टर से जन औषधि केंद्र की दवा लिखने को कहते हैँ, तो जवाब होता है कि वह दवा काम नहीं करती। अगर ठीक होना है तो बाहर की अच्छी दवा खाओ।
वैसे तो नैनपुर नगर पालिका से लेकर केंद्र सरकार तक भाजपा की सरकार है और नगर के जनप्रतिनिधि मोदी के नाम का सहारा लेकर नगर में वोट मांगने निकल जाते हैं और नगर की जनता उन पर विश्वास करके अपना बहुमूल्य मत देती है और उन्हें विजई बनाती है लेकिन केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ दिलाने की जब बारी आती है तो नगर के प्रतिनिधि हमेशा गायब दिखाई देते हैं। मोदी सरकार द्वारा ऐसी अनेकों योजनाएं हैं जिसका फायदा जनता तक नहीं पहुंच पाता है, और केवल सरकारी कर्मचारी एवं राजनेताओं के द्वारा इन योजनाओं का लाभ लेकर अपनी जेबें भरी जाती है।
जन औषधि केंद्र एक ऐसी योजना है जिसकी सहायता से नगर में एक जन औषधि केंद्र खोला जाए जिसमें लगभग ढाई सौ प्रकार की दवाइयां उपलब्ध की जाती है और मार्केट रेट से 60 प्रतिशत कम दाम में कम दवाइयां मरीजों को आसानी से प्राप्त हो जाती है।
जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब मजदूर व्यक्ति को ज्यादा धन खर्च ना करते हुए कम दाम में अच्छी से अच्छी दवाइयां उपलब्ध हो जाती हैं।
लेकिन हमारे नगर के प्रतिनिधि नगर में जन औषधि केंद्र खुलवाने में असमर्थ नजर आ रहे हैं वैसे तो ऐसे कई एनजीओ हैं जो भाजपा से जुड़े हुए हैं उनकी मदद से यह योजना आसानी से नगर में खुलवा कर जनता तक इसका लाभ पहुंचाया जा सकता है।लेकिन इस ओर किसी भी राजनेता या प्रतिनिधि का ध्यान नहीं जाता और निरंतर गरीब मजदूर परिवार वर्ग महंगी दवाइयां लेने में मजबूर हो रहा है।

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