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Wednesday, March 31, 2021

कुपोषण से मुक्ति दिलाने प्रत्येक बच्चे एवं परिवार का फॉलोअप करें - हर्षिका सिंह





भ्रमण में मिले फीडबैक के आधार पर कलेक्टर ने जारी किये विस्तृत आदेश




मण्डला, 31 मार्च 2021

भ्रमण के दौरान कुपोषित बच्चों तथा उनके परिवारजनों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर कलेक्टर हर्षिका सिंह ने कुपोषित तथा अति कुपोषित बच्चों के दस्तावेजीकरण, पोषण आहार वितरण, स्वास्थ्य परीक्षण, परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने तथा स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय आदि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किये हैं। उन्होंने कहा है कि कुपोषण से मुक्ति दिलाने प्रत्येक बच्चे एवं परिवार का फॉलोअप सुनिश्चित करें।

कलेक्टर हर्षिका सिंह ने निर्देशित किया कि प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र पर उस आंगनवाड़ी केन्द्र के अंतर्गत चिन्हांकित अति कुपोषित बच्चों के लिए अलग से रिकार्ड मेंटेन करें। सभी परियोजना अधिकारी, सुपरवाईजर एवं सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा उनके क्षेत्रांतर्गत निवासरत कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चों के दैनिक स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज, ऊंचाई एवं वजन से संबंधित दस्तावेज प्रति दिवस अपडेट करायें। उक्त दस्तावेज में कुपोषित एवं अति कुपोषित बच्चे की माता का नाम तथा उनके नियमित हीमोग्लोबिन जांच की रिपोर्ट भी संलग्न रखी जाए। अति कुपोषित बच्चे यदि एन0आर0सी0 में भर्ती किए जाते हैं तो एन आरसी में भर्ती संबंधी कार्यवाही इंद्राज करें तथा रिलीव होने के उपरांत स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से दिया गया प्रमाण पत्र भी रिकार्ड में संलग्न रखें।

कुपोषित बच्चे के परिवार को आय के स्त्रोत से जोड़ें

कलेक्टर हर्षिका सिंह ने निर्देशित किया कि कुपोषित तथा अति कुपोषित बच्चे के परिवार को आय के स्त्रोत से जोड़ने हेतु शासन की विभिन्न हितग्राहीमूलक योजना से जोड़ा जाना है। इस हेतु संबंधित क्षेत्र के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी जिम्मेदार होंगे। शासन की विभिन्न योजना अथवा विभिन्न आय के स्त्रोत से जोड़ने हेतु ऐसे परिवारों को प्राथमिकता से लिया जाए।

स्वच्छ जल तथा शौचालय की उपलब्धता सुनिश्चित करें

जारी आदेश में कहा गया है कि कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को निर्देशित किया गया है कि प्रत्येक कुपोषित परिवार तक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था अनिवार्यतः करवाई जाए। स्वच्छ भारत मिशन के ब्लॉक समन्वयक तथा संबंधित क्षेत्र के जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि कुपोषित बच्चे के घर में शौचालय अवश्य हो। प्रत्येक पंचायत में कुपोषित बच्चों पर पर्याप्त निगरानी रखी जाए। इस कार्य के पर्यवेक्षण हेतु एक समिति बनाई जाए जिसमें संबंधित पंचायत के सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, पटवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता एवं एएनएम, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तथा ग्राम कोटवार सम्मिलित रहेंगे। उद्यानिकी विभाग एवं एनआरएलएम के अमले को निर्देशित किया जाता है कि प्रत्येक कुपोषित परिवार के घर पर मुनगा के पौधे लगाए जाएं साथ ही पात्रतानुसार फल, सब्जी के पौधे अथव बीज उपलब्ध कराये जाएं। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं द्वारा भी ऐसे परिवारों को उनके विभाग की हितग्राही मूलक योजनाओं के माध्यम से उन्हें लाभांवित किया जाए।

5 अप्रैल तक पूर्ण करें परिवार सर्वे

श्रीमति सिंह ने निर्देशित किया कि सभी कुपोषित बच्चों की सूची तैयार करने तथा उनके परिवार से संबंधित सर्वे का कार्य 5 अप्रैल तक सुनिश्चित करते हुए उक्त सूची को संबंधित क्षेत्र के जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, मुख्य नगरपालिका अधिकारी, उपसंचालक कृषि, उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, सहायक संचालक मत्स्य, उद्यानिकी, महाप्रबंधक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग तथा ब्लॉक समन्वयक स्वच्छ भारत मिशन के साथ साझा किया जाए। सभी अधिकारी 5 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच इन सभी परिवारों को नियमानुसार अपने विभाग की योजनाओं से लाभांवित करेंगे।

5 से 15 अप्रैल के मध्य पूर्ण करें स्वास्थ्य परीक्षण निर्देश में कहा गया है कि 5 अप्रैल से 15 अप्रैल के दरम्यान मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यह सुनिश्चित करगें कि सभी बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण हो जाए तथा एनआरसी में भेजे जायें तथा सामुदायिक सहयोग से कुपोषण से मुक्त किए जाने वाले बच्चों की अलग-अलग सूची तैयार हो जाए। विभिन्न आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के माध्यम से कुपोषण श्रेणी परिवर्तन को लेकर स्पष्टता नहीं होने के कारण सही रिपोर्ट ऑनलाइन पोर्टल में इंद्राज नहीं की जा रही है। इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग जिला एवं पंचायत स्तर के कर्मचारियों का उन्मुखीकरण कार्यक्रम कराना सुनिश्चित करें। कुपोषित बच्चे प्रति दिवस आंगनवाड़ी केन्द्र में नहीं आ रहे है। अतः संबंधित क्षेत्र के आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को निर्देशित किया जाए कि कुपोषित बच्चे प्रति दिवस आंगनवाड़ी केन्द्र में आएं तथा उनकी देखभाल की जाए।

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