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Monday, March 15, 2021

कहो तो कह दूँ - इस हिसाब से तो सारे के सारे अफसर ही रिटायर हो जायेंगें


रेवांचल टाईम्स डेस्क :- केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने ये क्या सलाह दे दी मध्य  प्रदेश के मंत्री ओम प्रकाश सकलेचा जी को, कह दिया  कि हमने तो अपने मंत्रालय में एक स्कीम शुरू कर दी है कि यदि कोई प्रोजेक्ट तीन महीने के भीतर  स्वीकृत   नहीं होता है तो उस अफसर को रिटायर कर दिया जाता है  जिसके  कारण प्रोजेक्ट की स्वीकृति में देर हुई है, लगता है गडकरी जी ने अपने  मंत्रालय  में एक कमरे में नारियल लेकर रख लिए हैं  क्योंकि  जिस को भी  रिटायर  किया जाता है  उसकी टेबल पर एक नारियल और रिटायरमेंट का आदेश पंहुचा दिया जाता है l  गडकरी जी ये तो बड़ी ही खतरनाक सलाह दे गए आप, अरे भाई अफसर तो होता ही है किसी भी काम को अटकाने ,लटकाने,  उसमें गलतियाँ  निकालने  के लिए, उसे ट्रेनिंग ही इस बात की दी जाती है कि किसी भी काम को कैसे लम्बा  खींचा  जाए, कैसे  लोगों को पचासों  चक्कर  लगवाए जाएँ ,  कैसी नोटशीट  चलाई जाए कि मसला विवाद में आ जाए और काम लटक जाए l आप नक्शा पास करवाने चले जाओ, आप नामांतरण करवाने  चले  जाओ,  आप लायसेंस बनवाने  पंहुच  जाओ, आप कोई उद्योग धंधा लगाने के लिए  लोन   लेने  चले  जाओ किसी प्रोजेक्ट की एनओसी लेने चले जाओ  ऐसा नया तरीक खोज कर लाते है ये अफसर कि आदमी वो विचार  ही  हमेशा  के लिए त्याग देता है, यदि कोई ज्यादा जुगाड़ वाला होता है  और  सीधे मंत्री के पास पंहुच जाता है तो अफसर  ऐसी नोटशीट पुटअप करते हैं  कि मंत्री जी की  सांसे थम जाती है ऐसे ऐसे कानूनों का वर्णन नोटशीट में रहता है कि मंत्री जी के  पसीने छूट  जाते हैंl जब  नामांतरण,  खसरा की  नक़ल, लायसेंस जैसे छोटे छोटे और सड़े  से कामों को अफसर लटका सकते है तो बड़े प्रोजेक्टों को अटकाना तो उनके बाए हाथ का काम होता है, बीच बीच में उन्हें ट्रेनिंग के लिए भी बुला लिया जाता है कि कहीं ऐसा तो नहीं  कि वे  कामों  को लटकाने की आदत भूल गए हों, इसलिए उनके लिए "रिफ्रेशर कोर्स" चलाया जाता है ताकि वे कामों  को  लटकाने और अटकाने  की  अपनी  आदतों को फिर से "रिफ्रेश" कर लें l  गडकरी जी ने कह दिया कि  हमने अपने मंत्रालय में ये व्यवस्था कर दी है अब आप अपने मध्य प्रदेश में  ये व्यवस्था लागू कर दो, लेकिन गडकरी जी ये तो सोचो की यदि ये व्यवस्था प्रदेश में लागू कर  दी गयी तो हरेक  डिपार्टमेंट के तमाम अफसर रिटायर हो  जाएंगे,  नारियल देते देते प्रदेश भर में नारियल की "शॉर्टेज" हों जाएगी,  रिटायर्मेंट के  आदेश  निकालते निकालते  "कम्प्युटर  हैंग" हो जाएगा  और  "प्रिंटर" की स्याही  सूख  जाएगी लेकिन  रिटायरमेंट  के आदेश पूरे नहीं हो पाएंगे, वैसे भी लाल फीताशाही और नौकरशाही किसी ने इन अफसरों के लिए प्रयोग किया है तो  गलत  नहीं किया हैl अपना तो कहना हैं कि ऐसा जुलुम मत करो  गडकरी  जी, एक बार इन अफसरों को  रिटायर कर भी दोगे  तो  दूसरी नई पौध सामने आ जाएगी आप कब तक किस  किस को  रिटायट  करते रहोगे इसलिए ये काम अपने  मंत्रालय  तक ही सीमित  रखो  यंहा जैसा चल रहा है चलने  दो, वैसे भी यहां  के लोगो को इसकी आदत सी पड़ गयी हैं कि जब तक उनका काम अटकता लटकता नहीं है उन्हें भी मजा नहीं आता l


बड़ा ही तिलस्मी है ये कोरोना  


कोरोना  का सिस्टम तो अपने को आज तक समझ में ही नहीं आया, बचपन में हम लोग तिलस्मी जादूगरों  की  कहानियां  पढ़ते थे कि कैसे एक मिनिट में  जादूगर  गायब हो जाता था और फिर प्रगट हो जाता था, गुफा के दरवाजे  अपने आप खुल जाते  थे, बड़ा मजा आता था इन कहानियों को  पढ़ने में, सोचते थे कि क्या कभी वास्तविक जीवन में भी  ऐसा  तिलिस्म देखने मिल जाएगा तो बचपन की वो इच्छा   पूरी कर दी कोरोना ने l जैसे ही  कहीं  चुनाव  होता है कोरोना न जाने कौन  सी  गुफा में जाकर  छिप जाता है, हजारों लाखों  लोग रैलियों में बिना सोशल डिस्टेंसिंग के निकल जाते है लेकिन दयालू  कोरोना  उनको  छूता  तक नहीं है फिर  जैसे  ही चुनाव ख़त्म हो जाते है कोरोना एकदम से प्रगट हो जाता है l चाहे बिहार का चुनाव हो, बंगाल का चुनाव हो या किसी अन्य प्रदेश के होने  वाले  चुनाव हों कोरोना उस इलाके के  आसपास  भी नहीं फटकता, बंगाल, केरल, तमिलनाडु,  और जंहा जंहा चुनाव होने वाले है वंहा से कोरोना ने अपनी टिकिट कटवा ली है और वापस अपने प्रदेश में आ गया है, कहा जा रहा है कि  प्रदेश  के कई शहरों में  नाइट कर्फ्यू  लगाना पड़ेगा इसका  मतलब हैं कि कोरोना सिर्फ रात को ही अपने घर से  बाहर  निकलता है यानि वो सिर्फ "नाईट ड्यूटी" करता हैं  दिन भर जब सड़कों पर आदमियों का सैलाब रहता है तब वो अपने घर के भीतर बंद रहता हैं  और जैसे ही रात का अन्धेरा  होता हैं  सड़्कें  सुनसान  हो जाती है तो  कोरोना फिल्म  "राजा रानी" का ये गाना गाते गाते  बाहर  निकलता हैं  "जब  अँधेरा  होता है आधी रात के बाद, एक कोरोना निकलता हैं   कोरोना,  कोरोना,  कोरोना


सुपर हिट ऑफ़ द  वीक 


"पूरे दिन क्रिकेट क्रिकेट, तंग आ गई हूँ  मैं, आज ही घर छोड़कर जा  रही  हूँ"  श्रीमती  जी ने गुस्से में  आकर कहा


"पहली बार क़दमों का बेहतरीन इस्तेमाल" श्रीमान जी ने उत्तर दिया

                                              चैतन्य भट्ट

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