रेवांचल टाईम्स :- औद्योगिक क्षेत्र मनेरी के भूमिजा इस्पात कंपनी में 10 -11 की दरमियानी रात भयानक विस्फोट हुआ जिसमें कारखाना मालिक द्वारा कुल 7 मजदूरों के कार्य करने की बात कही गई?
जिनमें से एक गंभीर होकर अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया बाकि छः को गंभीर हालत में जबलपुर चिकित्सालय भेजा गया।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इतने बड़े कारखाने और लोहे की सरिया बनाने वाले वायलर में गर्म पिघला लोहा डालने और निकालने में इतने कम संख्या में लेवर कैसे कार्य कर सकती है? जबकि सत्यता यह है कि इस फैक्टरी में दर्जनों से भी ज्यादा संख्या में वर्कर काम कर रहे हो सकते हैं?
वही सूत्र तो यह भी बता रहे हैं की कई अन्य जिलों के भी इस घटना में मजदूर कार्यरत थे। जिनकी जानकारी कारखाना प्रबंधन द्वारा छुपाई जा रही है। और अन्य की भी मौत हो सकती है। जाँच दल और प्रशासन जब इनकी हाजरी रजिस्टर खंगालेगी तब तस्वीर साफ़ हो पायेगी?
और यह कार्यवाही भी तुरंत हो जाना था।
उक्त दर्दनाक हादसे की जाँच कर सत्यता जानने और कार्यवाही करने के निर्देश डी एम मंडला ने पुलिस और तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को दिये हैं। पर इस जाँच में राजनीति हावी होकर पेंच में उलझाकर अप्रत्याशित देर भी की जा सकती है?
लेकिन हम इसकी कल्पना ही कर रहे हैं,और इंतजार है सिर्फ इस बात का कि मृतक और घायलों को उचित न्याय मिल सके।
यहाँ ये समझना भी जरुरी है कि किसी भी कंपनी या कारखाने में दिन या रात के समय मजदूरों के साथ 2 इक न एक सुपरवायजर (तकनीकी सलाहकार) होता ही है जिसके मार्गदर्शन में सभी मजदुर कार्य करते हैं और इसको रखे जाने का उद्देश्य ही तकनिकी खामियों पर नजर बनाये रखकर कुशल मार्गदर्शन देते हुये कार्य करवाये। जो इस कारखाने के संचालक ने नहीं रखा था, या रखा भी गया तो इसको और खुद को बचाने के कारण इस ओर ध्यान नहीं दिया गया जाकर प्रशासन की आँख में धूल झोंकने का काम भी किया गया।
और बलि का बकरा एक कोटवार को बनाया गया जो हादसे की जगह से ढ़ाई किलोमीटर दूर रहता है ? जिसे समय पर किसी ने बताया ही नहीं?फिर जब रात्रि के समय घटना घटित हुई तब अगर ग्राम कोटवार आधी रात को खबर दे भी देता तब भी पुलिस क्या रात्रि में समय पर पहुँच जाती?
और क्या जिम्मेदार वहाँ बैठकर पुलिस का इंतजार करता?
इसका उदाहरण हमारे सामने तब ही मिल गया था जब मनेरी में ही सुबह के समय सरेआम दो दरिंदों ने बारी बारी से तांडव नृत्य करते हुए छः लोगों का कत्लेआम किया था तब भी पुलिस उस वक्त पहुँची जब आरोपियों ने इस घटना को अंजाम तक पहुँचाकर खुद को एक कमरे में कैद कर लिया था।
फिर ऐसे सिस्टम को सुधारने और कारखाने में लापरवाही वरतने वाले जिम्मेदारों पर कड़ी कार्यवाही न कर एक कोटवार की सेवा समाप्त करना न्यायसंगत नहीं लगता?
फिर इस औद्योगिक क्षेत्र में सैकड़ों कारखाने और कंपनी चल रही हैं जहाँ घातक रसायनों का उपयोग कर कई प्रकार के उत्पाद बनाये जा रहे हैं, गैस रिफलिंग के साथ ही केमिकल का भण्डारण भी रहता है,जिनकी तासीर बिगाड़ने बिजली की एक चिंगारी ही काफी है और इस घटना आगजनी को बढ़ाने ऑक्सीजन के सिलेंडर अपनी भारी भूमिका निभाएंगे जो इधर उधर बिखरे पड़े हुये हैं । और इस परिस्थिति में भयानक हादसे से कोई भी इंकार नहीं कर सकता। और इससे भी बड़ी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है।
__फिर इस कारखाने के मकड़जाल क्षेत्र परिसर में आज तक एक अस्पताल भी स्थापित नहीं किया गया? जिससे आकस्मिक और अप्रत्याशित घटनाओं में चोटिल और प्रभावित मजदूरों को त्वरित प्राथमिक उपचार देकर सहायता पहुँचाई जा सके।
उक्त घटना के पहले और बाद में ऐसे ज्वलंत मामलों और लापरवाह कारखाने मालिकों और जिम्मेदारों पर आज तक प्रशासन द्वारा कड़ी कार्यवाही न कर अभयदान देना,और एक अदने से सन्देश वाहक पर गाज गिराना कहाँ तक उचित है।
आज सत्ता और शासन का कर्तव्यनिष्ट और पहला खबरिया ये कोटवार अपने पर बिना बुलाये आयी इस आफत से परिवार सहित बेहद दुखी और सदमे में है।

No comments:
Post a Comment