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Sunday, February 14, 2021

शिक्षा गुणवत्ता की रणनीति तैयार जनजाति कार्य विभाग आया एक्शन में





रेवांचल टाईम्स :-  मंडला जिला में 215 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है। स्कूल शिक्षा विभाग के 7 मॉडल स्कूलों को छोड़कर शेष स्कूल जनजाति कार्य विभाग के अधीनस्थ संचालित हैं । जिले की शिक्षा व्यवस्था में नियंत्रण हेतु शिक्षा विभाग एवं जनजाति कार्य विभाग है ।आदिवासी बाहुल्य जिला होने के कारण सुदूर ग्रामीण अंचलों में विषय शिक्षकों की बहुत कमी है। जिसे अतिथि शिक्षक रखकर पूरी की जाती है। प्राचार्य के अधिकांश पद खाली पड़े हैं। इतना सब होने के बाद भी विगत वर्ष को यदि छोड़ दिया जाए तो मंडला जिले का परीक्षा परिणाम सराहनीय आता रहा है। वर्ष 2020 की हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा का परिणाम पूर्व वर्षों से कम आने पर वरिष्ठ अधिकारियों ने नाराजगी प्रकट की है । वर्तमान में कोरोना संक्रमण संकट के कारण विद्यालय विधिवत समय पर संचालित नहीं हो पाए हैं। विगत 1 माह से कक्षा 9 से 12 तक की कक्षाएं कोविड-19 प्रोटोकाल का पालन करते हुए प्रारंभ की गई है। जिस में भी विद्यार्थियों की उपस्थिति शत प्रतिशत नहीं देखी जा रही है। छात्रावास बंद पड़े हैं। इन सभी जद्दोजहद के बाद भी हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा 2021 का परीक्षा परिणाम शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कैसे लाया जाए , इसके लिए जनजाति कार्य विभाग एक्शन में आ गया है। विजय सिंह तेकाम  सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग एवं डी एस उद्दे सहायक संचालक शिक्षा द्वारा अलग-अलग विकास खंडों में प्राचार्य एवं  शिक्षकों की कार्यशाला आयोजित कर आवश्यक दिशा निर्देश दिए जा रहे हैं। विगत दिवस नारायणगंज एवं बीजाडांडी विकासखंड में प्राचार्य एवं शिक्षकों की कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसी तारतम्य में रविवार अवकाश के दिन मंडला विकासखंड के प्राचार्य एवं शिक्षकों की कार्यशाला शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय मंडला में आयोजित की गई। कार्यशाला में विगत 2 वर्षों के हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम में आए अंतर की गहन समीक्षा की गई एवं कारण जानना चाहा गया । कार्यशाला में उपस्थित प्राचार्यों ने अपनी अपनी समस्याओं को तर्क सहित प्रस्तुत किया एवं कम परीक्षा परिणाम आने के कारण गिनाए। सहायक संचालक डी एस उद्दे द्वारा अलग-अलग विषयों एवं अलग-अलग विद्यालयों के परीक्षा परिणाम को कार्यशाला के समक्ष प्रस्तुत किया गया एवं गणित, अंग्रेजी, विज्ञान, भौतिक शास्त्र, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान जैसे कठिन विषयों की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। कार्यशाला के दौरान विजय सिंह तेकाम सहायक आयुक्त द्वारा प्राचार्यों को विगत 5 वर्षों के प्रश्न पत्रों को विद्यार्थियों से हल करवाने की सलाह दी गई। इसके अलावा सी और डी ग्रेड के कमजोर विद्यार्थियों के लिए विषय विशेषज्ञ शिक्षकों से ऐसे इकाइयों की जानकारी ली गई जिनके प्रश्नों को विद्यार्थी आसानी से हल कर सकें।इस के तहत विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को कमजोर विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के चयन कर उनके उत्तर सहित नोट्स बनाकर कार्यालय में एक सप्ताह के अंदर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।प्राचार्यों से  कहा गया कि इस प्रकार की पाठ्य सामग्री को प्रत्येक कमजोर विद्यार्थियों को एसएमडीसी मद से उसकी छाया प्रति करवा कर वितरित की जाए। प्राचार्य को निर्देश दिए गए कि वह विद्यालय में प्रत्येक विषय शिक्षक की उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए उन्हें गृह कार्य एवं समय-समय पर जांच परीक्षा लेने के लिए निर्देश दें। सहायक आयुक्त ने यह भी कहा कि समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण भी किया जाएगा एवं विद्यार्थियों के नोट्स एवं गृहकार्य आदि की स्थल पर जांच भी की जाएगी। परीक्षा परिणाम कम आने पर संस्था प्रमुख एवं संबंधित शिक्षकों की गोपनीय चरित्रावलीयो में प्रतिकूल टिप्पणी भी अंकित की जावेगी तथा इस बात का उल्लेख उनकी सेवा पुस्तिका में भी किया जाएगा । कार्यशाला के दौरान विभिन्न विषय शिक्षकों ने अपने अपने सुझाव भी दिए। कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों की शत प्रतिशत उपस्थिति पर जोर दिया गया। जिसके लिए संबंधित विद्यार्थियों के पालको एवं उस गांव के सरपंच एवं सचिव से भी सामंजस्य बैठाकर विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए सुझाव दिए गए । यह भी आशा व्यक्त की गई की कम समय होते हुए भी यदि प्राचार्य और शिक्षक चाहे तो मेहनत करके अपने विद्यालय का परीक्षा परिणाम अच्छा ला सकते हैं,अन्यथा अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए तैयार रहें।

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