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Monday, February 1, 2021

गीत इस देश की मिट्टी में रमा हुआ है- मनहर जी राष्ट्रीय कवि संगम मण्डला का गीत इस देश की मिट्टी में रमा हुआ है- मनहर जी राष्ट्रीय कवि संगम मण्डला का

  




रेवांचल टाईम्स :- मण्डला राष्ट्रीय कवि संगम, मध्य प्रदेश के नव निर्वाचित अध्यक्ष, विख्यात कवि आद. शंभू सिंह 'मनहर' जी एवं प्रांतीय महामंत्री आद. मनीष तिवारी के मण्डला प्रथम आगमन पर श्रीमती रेखा ताम्रकार 'राज' अध्यक्ष, रा.क.सं. मण्डला द्वारा संपर्क समारोह/कवि गोष्ठी का आयोजन रविवार की शाम कों गोंडी पब्लिक ट्रस्ट के सभागार में किया गया। 


काव्य गोष्ठी का शुभारंभ माँ सरस्वती की पूजा अर्चना के साथ हुआ। ततपश्चात  प्रान्तीय अध्यक्ष शंभू सिंह 'मनहर' जी एवं महामंत्री मनीष तिवारी जी का राष्ट्रीय कवि संगम मण्डला इकाई के सदस्यों द्वारा शाल श्रीफल देकर सम्मान कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर प्रन्तीय अध्यक्ष ने उपस्थित साहित्यकारो को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय कवि संगम राष्ट्रवाद संस्कृतिनिष्ठ रचनाकारों का वृहद संगठन है, जिसका उद्देश्य भारतीय संस्कृति और ऐतिहासिक द्रष्टिकोण से भुला दिए गए पात्रों एवं ऐसी ही महान घटनाओं के पुनर्लेखन हेतु लेखकों का समूह तैयार करना है। देश के सभी प्रान्तों में इसका संगठन है तथा 10 से अधिक देशों में इसकी इकाइयाँ काम कर रही है। 07 फरवरी को मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले राष्ट्रीय कवि संगम का संभागीय अधिवेशन होने जा रहा है, जिसमें मण्डला एवं महाकोशल के विभिन्न जिलों के रचनाकार सम्मलित होंगे  मेरे प्रांताध्यक्ष बनने के बाद मैंने व्रत लिया है कि प्रत्येक जिले में जाकर वहाँ की इकाइयों के पदाधिकारियों, रचनाकारों एवं साहित्यकारों से व्यक्तिगत रूप से भेंट कर उन्हें राष्ट्रीय कवि संगम की मूल धाराओं से अवगत कराना है। उन्होंने वर्तमान में हिंदी भाषा के अतिरिक्त अन्य भाषाओं के प्रति लोगों के बढ़ रहे  रुझान के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुये कहा कि सनातनी समाज को प्रखंडों में बांट दिया गया है जिसे एकाकार करना होगा। सबसे पहला जिहाद हिंदी भाषा के साथ हुआ और इसे दूषित किया गया, हिंदी भाषा सौ सालों से ऊपर की है भाषा है लेकिन आज उसे दूषित कर दिया गया है। जब देश आजाद हुआ तब एक रुपया के बराबर एक डॉलर और एक पोंड था भ्रष्टाचार ने हमारी आर्थिक कमर तोड़ दी, कवियों से कहा कि ऐसा लिखे जिसके लिखे बिना काम न बने और उनकी प्रतिक्रिया निकले भले कम लिखें लेकिन मंथन करके लिखें, रामचंन्द्र शुक्ल का उदाहरण दिया जिन्होंने सैकड़ो कृतियाँ लिखी लेकिन आज विदेशी शब्द के चलन से हिंदी भाषा को ढूंढना पड़ रहा है। उन्हौंने बताया गीत इस देश की मिट्टी में रमा हुआ है किन्तु आज गीत की उपेक्षा हो रही है। हमारी कविता गीत, छंद हमारे जीवन के साथ चलते हैं जो हमारे दुख-सुख में गाये जाते है, संस्कृति बढ़ते द्वंद्व को साहित्यकारों को समझना चाहिए, आपके शब्द ही आपकी संस्कृति को बतलाते हैं। हमे सनातनी एवं राष्ट्रवादियों को जोड़ कर एक जाति विहीन समाज तैयार करना है ताकि आने वाले बच्चेंं राष्ट्रवाद, साहित्य एवं हिंदी भाषा का अनुसरण कर सकें। मंच संचालन हेमंत श्रीवास्तव 'अश्रुज', महामंत्री रा.क.सं. मण्डला ने किया। श्री इंद्रेश खरया (बब्बल भैया), श्री अनील वर्मा, श्रीमती कौशल्या चौहान ने काव्य पाठ किया। अंत में आभार प्रदर्शन श्रीमती कल्पना पाण्डेय महामंत्री रा.कव.सं. मण्डला द्वारा किया गया। उक्त कार्यक्रम में आद. अशोक पाण्डेय, सुनील मिश्रा, रेनु कछवाहा, सुरेंद्र कुमार तिवारी, पत्रकार संतोष तिवारी, मीडिया प्रभारी, रा.क.सं. मण्डला, श्रीमती गीता साहु, अन्नपूर्णा त्रिपाठी, मंजूषा राय आदि की उपस्थिति सराहनीय रही।

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