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Monday, February 8, 2021

कोरोना त्रासदी के संक्रमण काल में मोदी सरकार ने दिया ऐतिहासिक बजट : विष्णुदत्त शर्मा





रेवांचल टाईम्स :- मंडला कोरोना त्रासदी के कारण जब दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ संकट का सामना कर रही हैं, ऐसे संक्रमण काल में ऐतिहासिक, व्यावहारिक और विकासोन्मुखी बजट पेश करने के लिए मैं प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री निर्मला सीतारमन को धन्यवाद देता हूँ। मुझे पूरा भरोसा है कि यह बजट समस्त भारतीयों की वित्तीय अपेक्षाओं को पूरा करने वाला सिद्ध होगा। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णुदत्त शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी कार्यालय मंडला में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही।  केन्द्रीय मंत्री फग्गनसिंह कुलस्ते जिला अध्यक्ष भीष्म द्विवेदी उपस्थित थे। 

बजट में आम आदमी की आकांक्षाओं को आकार देने का सामर्थ्य : विष्णुदत्त शर्मा

प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार के इस आम बजट में आम आदमी के सपनों को साकार करने और उनकी आकांक्षाओं को आकार देने का सामर्थ्य तो है ही साथ ही देश को समृद्ध एवं शक्तिशाली राष्ट्र बनाने की दिशा में एक विजन और मिशन के साथ उठाया गया यह महत्वपूर्ण कदम है। कैपिटल एक्सपेंडिचर में वृद्धि का मतलब स्पष्ट है कि सरकार की मंशा इंफ्रास्ट्रक्चर को और बड़ा करने की है। केन्द्र की नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली हमारी सरकार ने बजट में आने वाले वित्तीय वर्ष में 5.54 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत व्यय (केपिटल एक्सपेंडिचर) और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का प्रावधान किया है। जो पिछले वर्ष की तुलना में 34.5 प्रतिशत अधिक है। शेयर बाजार ने सरकार की मंशा और कोशिशों का बजट के तुरंत बाद  स्वागत किया है और केंद्र सरकार के बजट के तत्काल बाद सेंसेक्स टॉप पर पहुँच गया । इसका मतलब बहुत स्पष्ट है कि बजट के प्रावधानों की वजह से विदेशी निवेश बढ़ने वाला है।

आधारभूत ढांचे के विकास के बजट में अभूतपूर्व वृद्धि

       वही विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में आय में करीब 5-6 लाख करोड़ की कमी, लगभग 80 करोड़ लोगों को 8 महीनों तक निःशुल्क खाद्यान्न, गैस सिलेंडर और गरीब महिलाओं को 500 रु. हर महीने देने के पुनीत कार्य के बावजूद हमारी सरकार ने इस वर्ष के बजट में कोई अतिरिक्त कर, कोई नया टैक्स नहीं लगाया है। बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आधारभूत ढांचे के विकास के बजट में अभूतपूर्व वृद्धि की है। यह कोरोना त्रासदी के चलते बनीं विश्वव्यापी चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों में आये इस बजट की अद्भुत उपलब्धि है।

आत्मनिर्भर भारत का ऐतिहासिक बजट

श्री शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार स्कीम बनाकर उनको लागू करने में पिछली सब सरकारों से 50 गुना तेज परिणाम दे रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन के द्वारा पेश किया गया केंद्र सरकार का यह बजट कोरोना त्रासदी की कठिन चुनौतियों के साये में देश की अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवन देने वाला आत्मनिर्भर भारत का ऐतिहासिक बजट है। इस बजट में किये गए होलिस्टिक प्रावधानों से व्यापक रूप से देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार को उछाल मिलेगा क्योंकि इससे राष्ट्रीय संपत्ति का सृजन होगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अभूतपूर्व प्रावधान

श्री शर्मा ने कहा कि हमारे इस बजट में निर्धनता उन्मूलन के ठोस प्रयास किये गए हैं। हमारे देश में निर्धनता संरचनात्मक और बहुआयामी है। संरचनात्मक इस रूप में कि निर्धन को हर उद्यम के लिए संघर्ष करना पड़ता था। हमारी निर्धनता बहुआयामी भी रही है। बहुआयामी से मतलब यह है कि हम आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, बिजली-पानी, भोजन की किल्लत और कुपोषण की समस्या के कारण भी निर्धन हैं। केवल आय बढ़ा देने से वह निर्धनता दूर नहीं हो सकती है। इसलिए बजट में स्वास्थ्य सेवाओं के विकास के लिए 137 प्रतिशत की वृद्धि करके सरकार ने कुल 2,23,846 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया है। स्वास्थ्य बजट में अभूतपूर्व वृद्धि और ’प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर स्वस्थ भारत योजना’ की सौगात  प्रधानमंत्री के ’स्वस्थ भारत’ के संकल्प को पूरा करेगी, ऐसा मुझे भरोसा है। इस योजना के तहत 70 हज़ार गाँवों में देखभाल केंद्र (वेलनेस सेंटर) बनाए जाएंगे। इसके अलावा कोरोना वैक्सीन से जुड़े अनुसंधान कार्यों के लिये 35 हज़ार करोड़ रुपए भी आवंटित किये गए हैं।

बजट में दिखी किसानों की चिंता

श्री शर्मा ने कहा कि सरकार किसानों के कल्याण के प्रति कटिबद्ध है। एमएसपी की व्यवस्था में मूलभूत परिवर्तन किया गया है जिससे सभी प्रकार की जिंसों के मामलों में उत्पादन लागत का 1.5 गुना कीमत मिल सके। खरीद का कार्य भी अब तेजी से जारी है इसके परिणामस्वरूप किसानों को पर्याप्त भुगतान किए जाने के मामले में बढ़ोतरी हुई है।गेहूं के मामले में 2013-14 में किसानों को कुल 33,874 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। 2019-20 में यह राशि 62,802 करोड़ रुपये थी और 2020-21 में स्थिति और भी अच्छी हुई है तथा किसानों को कुल 75,060 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया है। गेहूं उत्पादन करने वाले उन किसानों की संख्या जिनको इनका लाभ मिला है 2019-20 के 35.57 लाख से बढ़कर 2020-21 में 43.36 लाख पहुंच गई है। जहां तक धन की बात है तो 2013-14 में 63,928 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया था। 2019-20 में यह राशि बढ़कर 1,41,930 करोड़ रुपये हो गई थी। यहां तक कि 2020-21 में स्थिति और भी बेहतर हुई और इस अवधि में यह राशि बढ़कर 1,72,752 करोड़ रुपये के हो जाने का अनुमान है। इसका लाभ प्राप्त करने वाले किसानों की संख्या जो 2019-20 में 1.24 करोड़ थी वह बढ़कर 2020-21 में 1.54 करोड़ हो गई है। इसी तरह दालों के मामले में 2013-14 में 236 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया थाद्य यह राशि बढ़कर 2019-20 में 8,285 करोड़ रुपये हो गई थी।

और अब 2020-21 में यह राशि 10,530 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है जो कि 2013-14 की तुलना में 40 गुना अधिक है।

श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के यशस्वी नेतृत्व में भारत के कृषि विकास पथ को मजबूत बनाने के लिए नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट  के अंतर्गत 1,000 मंडियों को और लाये जाने का प्रावधान किया गया है। माइक्रो इरिगेशन फंड में 5,000 करोड़ के अतिरिक्त बजट आवंटन से भारत का अन्नदाता सशक्त होगा। कांग्रेस के जमाने मे जिन चीजों की महंगाई बढ़ाई जाती थी वो चीजें बजट के 3 महीने पहले से ही मार्किट में शॉर्टेज हो जाती थीं। इस जघन्य लूट पर हमारी सरकार ने लगाम लगायी।

विदेशी मानसिकता के गुलाम कर रहे बजट की निंदा

श्री शर्मा ने कहा कि वामपंथी और कांग्रेसी आज भी मन और विचार से विदेशी मानसिकता के गुलाम है। इसलिए आत्मनिर्भर भारत का यह बजट उन्हें कभी अच्छा नहीं लगेगा। देश तो 1947 में आजाद हो गया मगर वामपंथी और कांग्रेसी आज भी मन और विचार से विदेशी मानसिकता के गुलाम बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि जो कांग्रेसी आज तक दरबार की गुलामी और राजा-रानी परंपरा से खुद आजाद नहीं हो पाये हैं, जिन वामपंथियों की सोच और जड़ आज भी लेनिन, मार्क्स से बंधी है, उन्हें ’आत्मनिर्भर भारत’ का यह ऐतिहासिक बजट कैसे अच्छा लग सकता है?

मण्डला की पत्रकार वार्ता में प्रदेश मंत्री आशीष दुबे, जिलाध्यक्ष भीष्म द्विवेदी, विधायक देव सिंह सैयाम उपस्थित थे।

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