रेवांचल टाइम्स:- हर वर्ष माघ मास की पूर्णिमा तिथि पर संत रविदास (रैदास) जयंती मनाई जाती है। इस बार संत रविदास जयंती 27 फरवरी को मनाई जाएगी। इस दिन इनके अनुयाई पवित्र नदी में स्नान करते हैं। भजन-कीर्तन और रविदास जी के दोहे गाते हैं। इस दिन इनके जन्म स्थान पर इनके बहुत सारे भक्त पहुंचते हैं और इस दिन को उत्सव की तरह मनाते हैं।
भारत की पवित्र धरती में 644 वर्ष जन्मे संत रविदास जी का सम्पूर्ण विश्व में बड़े ही धूम धाम से मनाया जाएगा। इस शुभअवसर पर संत रविदास मंदिर मेहरसिवनी में सभी क्षेत्रीय बंधुओ के द्वारा मनाया जा रहा है, हर वर्ष के इस मौके पर भी ग्राम मेहरसिवनी में विशाल वाहन रैली निकाली जाएगी।
जूते बनाने का काम इनका पैतृक व्यवसाय था। ये जूते बनाते समय इतने मग्न हो जाते थे जैसे स्वयं भगवान के लिए बना रहे हो। संत रविदास जी एक ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भगवान की भक्ति में समर्पित होने के साथ अपने सामाजिक और पारिवारिक कर्त्तव्यों का भी बखूबी निर्वहन किया। इन्होंने लोगों को बिना भेदभाव के आपस में प्रेम करने की शिक्षा दी, और इसी तरह से वे भक्ति के मार्ग पर चलकर संत रविदास कहलाए। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रेरणादायक हैं।
'मन चंगा तो कठौती में गंगा' उनका यह प्रसंग बहुत ही लोकप्रिय है, इसका अर्थ है कि अगर आपका मन साफ और पवित्र है और कार्य करते समय ईश्वर को भक्ति में लीन हो जाते है,उससे बढ़कर कोई तीर्थ स्नान नहीं है।
रेवांचल टाइम्स निवास से देवेन्द्र चौधरी की रिपोर्ट

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