रेवांचल टाईम्स :- क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा भी लोगों के जुबान पर जोर पकड़ा हुआ है। प्रशासन की लापरवाही से स्वास्थ्य केंद्र खुद वर्षो से बीमार पड़ा है। कोरोना के कहर के बीच भी इसकी हालत नहीं सुधरी। नैनपुर के पास स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिंडरई इसका जीता जागता उदाहरण है।
केंद्र की बदहाली के कारण लोगों को निजी क्लीनिकों पर निर्भर रहने को विवश होना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि डिजिटल इंडिया, स्कील इंडिया, स्मार्ट इंडिया, हेल्थ फॉर ऑल, आयुष्मान भारत जैसी विभिन्न योजनाओं के बीच भी लोगों को बुनियादी स्वास्थ्य सेवा तक उपलब्ध नहीं होना रहनुमाओं को आईना दिखाने के लिए काफी है। लापरवाह व हांफती स्वास्थ्य व्यवस्था के चलते मजबूरी में लोग निजी क्लीनिक व निजी चिकित्सक के शरण में जाने को मजबूर हैं।
पिंडरई स्वास्थ्य केंद्र में लंबे समय से स्थायी डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर नीरज राज के अस्पताल में अधिक ना रहने के चलते ड्रेसर के भरोसे ही मरीजों का इलाज हो रहा है। कभी इस स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह से शाम तक मरीजों का आना-जाना लगा रहता था। आसपास के लोग यहां इलाज करवाने आते हैं । अब जब स्वास्थ्य सेवा में सुधार के दावे किए जा रहे है तो लोगों को स्वास्थ्य केंद्र की कुव्यवस्था से आहत होकर निजी अस्पताल के शरण में जाना पड़ रहा है।
इस व्यवस्था का विरोध करते हुए पिंडरई एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने आंदोलन का बिगुल बजा दिया है। 30 से 40 गांव का जंक्शन (केंद्र बिंदु) पिंडरई उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की पदस्थापना स्थाई एवं एंबुलेंस हेतु जब तक मांग पूरी नहीं होती है तब तक सभी ग्राम के एवं नगर के nsui के कार्यकर्ता एवं आम नागरिक भूख हड़ताल करने के लिए सड़कों पर उतर चुके है।
हड़ताल की अगुवाई मे,NSUI प्रभारी अध्यक्ष रूपेंद्र बिट्टू राठौर,
पिंडरई Nsui नगर अध्यक्ष मुकेश गुमास्ता,
नगर उपाध्यक्ष संदीप मरकाम कृष्ण कुमार पटेल,
नगर सचिव मंसूर आलम अक्षय राजपूत,
नगर महासचिव राजा गुमास्ता,
यह सभी एवं समस्त ग्रामवासी इस आंदोलन में शामिल हुए एवं उनका कहना है कि मांग पूरी नहीं होने पर आमरण अनशन भी किया जाएगा।

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