रेवांचल टाईम्स :- पुलिस की निष्क्रियता से क्षेत्र में अवैध शराब, जुआ, सट्टा, जैसे सामाजिक बुराई वाले अपराधों में निरंतर वृद्धि होते जा रही है। नैनपुर पुलिस की लापरवाही से अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि ये पुलिस के छोटे कर्मचारियों को कुछ नहीं समझते है कुछ समय पहले नगर वासियों में संतुष्टि की लहर थी क्योंकि नगर में सिंघई जी जैसे टाउन स्पेक्टर की पदस्थापना होने से नगरवासियों की आस जागी थी कि वे उनके खिलाफ कार्यवाही करेंगे। लेकिन नगर के क्राइम माफियाओं ने अपनी राजनीतिक पकड़ एवं तगड़ा चंदा पार्टियों को देने के बलबूते पर इनका भी तबादला करवा दिया। और एक बार फिर नगर में जुआ सट्टा एवं शराब खोरी जैसे क्राइम बढ़ गए हैं लेकिन नगर प्रशासन ने आंखों में पट्टी बांध ली है।
नैनपुर क्षेत्र में विगत वर्षों में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में अपराधों में काफी वृद्धि हुई। इसमें अवैध शराब एवं सट्टा पट्टी जैसी सामाजिक बुराइयों में काफी अधिक वृद्धि हुई है। नैनपुर नगर के चौक चौराहों पर सटोरिया पुलिस वालो को महीना देकर खुलेआम सट्टा खिलाते देखे जातेे है। इन सटोरियों को नैनपुर पुलिस का कोई भय नहीं है। जब जिला पुलिस की ओर से नैनपुर पुलिस को कोई निर्देश मिलता है तो छोटे-मोटे सट्टा पट्टी लिखने वाले को पकड़ लिया जाता है और उसके विरुद्ध केस बनाकर उससे भी रकम ऐंठ ली जाती है। क्षेत्रवासियों को यह मालूम है कि नगर सहित आस पास के ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे दर्जनों गांव है, जहां अवैध कच्ची शराब की अघोषित भट्ठियां है। इसके अलावा नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में देशी एवं अंग्रेजी शराब के विक्रेता है, जिन पर नैनपुर पुलिस कभी कार्यवाही नहीं करती। जब नैनपुर के शराब ठेकेदार के गुर्गों द्वारा पुलिस को छापामार कार्यवाही के लिए कहा जाता है तब उनके बताए व्यक्ति के घर में पुलिस छापा मारती है। नगर के ऐसे कई वार्ड है जहां अवैध रूप से शराब की छोटी दुकानें संचालित है। नैनपुर क्षेत्र में गांजा तस्करी भी जोरों पर है। नशे के आदि लोग का अटल आवास क्षेत्र में अक्सर देखा जाता है। यह सब नैनपुर पुलिस के नाक के नीचे होता है लेकिन नैनपुर प्रशासन निरंतर चुप्पी साधे हुए हैं।
नैनपुर में जुए सट्टे व नशाखोरी की लत तेजी से अपने पैर पसार रही है। इसकी गिरफ्त में युवा पीढ़ी भी आ रही है। इन सामाजिक कुरीतियों की वजह से अधिकांश परिवार जहां आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं तो वहीं काफी युवाओं के कदम अपराध की दुनिया की ओर भी बढ़ रहे हैं। इससे युवाओं का भविष्य भी संकट में आ रहा है। दूसरी तरफ नशीले पदार्थो की बिक्री करने वाले और जुआ-सट्टा चलाने वालों की चांदी हो रही है। जुए के साथ बच्चों व युवाओं में नशाखोरी की लत भी लग रही है। आलम यह है कि स्कूलों के सामने भी नशीले पदार्थ बेचने वाले पान ठेले जमे हुए हैं। स्कूल में पढ़ने वाले विद्यार्थी चोरी छिपे यहां आकर सिगरेट एवं गुटके का नशा करते हैं। शराब के साथ आजकल के युवा गांजे का भी सेवन कर रहे है। गांजे को सिगरेट में भरकर लंबे-लंबे कश लेते हुए बच्चों को देखा जा सकता है। गांजे से भरी सिगरेट के कुछ कश लगाने के बाद उन्हें होश नहीं रहता कि वे कहां हैं।
कई युवा ऐसे है जो शराब का नशा करने या फिर जुआ में रकम हारने के बाद अपराध की दुनिया में कदम रखते है। कई स्कूली विद्यार्थियों के ऐसे मामले आए है जिन्होंने पहले शहर में वाहनों से डीजल चोरी करने के साथ-साथ लोगों की दुकान से नगदी भी चोरी की है। जबकि कुछ युवा लोगों के वाहनों के इजन, मोटर व अन्य सामानों को चोरी करने के साथ-साथ बडे़ अपराधों को भी अंजाम देते है।
शासन प्रशासन जनता की रक्षा के लिए होता है लेकिन नगर में यह देखा जा रहा है कि अपराधिक गतिविधियां निरंतर बढ़ रही है लेकिन शासन प्रशासन इस ओर किसी भी प्रकार की कड़ी कार्यवाही करता नजर नहीं आ रहा जिससे नगर का माहौल प्रतिदिन दूषित होता जा रहा है।

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