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Wednesday, January 6, 2021

जनपद पंचायत नारायणगंज बना भ्रष्टाचार का अड्डा एक के बाद एक ग्राम पंचायतों के फर्जीवाड़े की खुल रही है परत दर पोल



 रेवांचल टाईम्स :-  आदिवासी बहुल्य जिला मंडला के अंतर्गत आने वाली जनपद पंचायत नारायणगंज बहुप्रतीक्षित योजनाओं में से एक मनरेगा जो कि केंद्र सरकार की योजना है। सबको 100 दिन का रोजगार देने की जिसमें सरकार द्वारा गारंटी दी जाती है। वही हितग्राही मूलक कार्यों का सृजन कर कृषि आदी क्षेत्रों में गरीब किसानों को मजबूती प्रदान करने की कोशिश की जा रही है जहां भ्रष्टाचारियों द्वारा लगाया गया है सेंध।

मामला जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत शाहा के ग्राम रोजगार सहायक द्वारा फर्जीवाड़ा करने का कारनामा सामने आया है रोजगार सहायक द्वारा अपने चहेते जॉब कार्ड धारियों का मस्टर जारी कर उनके खातों में मजदूरी भुगतान की राशि डालकर वापस वसूली कर जेब गर्म कर लिया गया है। हितग्राहियों को जब पता चला कि उनके नाम से मेड बन्धान कार्य विगत वर्ष मई 2020 में स्वीकृत हुआ और कागजों में ही पूर्ण भी हो गया। तब वे हक्के बक्के से रह गए। हितग्राही मोहन पिता गंजन के नाम से राशि 89400 व हितग्राही कंधी पिता बखरू के नाम राशि 92640 रुपए ग्राम शाहा के मेड़बन्धान के कार्य के नाम से वाकायदा मस्टर जारी कर रोजगार सहायक अशोक कुमार द्वारा कार्य संपन्न भी करा दिया गया। जबकि उक्त दोनों हितग्राहियों के खेतों में कोई कार्य ही नहीं हुआ है। हितग्राहियों के बच्चों द्वारा ऑनलाइन मनरेगा साइट पर जब यह देखा गया। जिसके उपरांत हितग्राहियों द्वारा रोजगार सहायक से पूछताछ किया गया रोजगार सहायक द्वारा जब संतुष्टि जनक जवाब नहीं दिया गया। तब हितग्राहियों ने ऑनलाइन प्राप्त  दस्तावेजों सहित लिखित शिकायत पत्र जनपद पंचायत कार्यालय पहुंचकर मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नाम दीया। और फर्जीवाड़ा कर रहे रोजगार सहायक अशोक कुमार को शीघ्र हटाते हुए कार्यवाही की मांग की गई।


अनियमितताओं के चलते पूर्व में भी रोजगार सहायक को उक्त ग्राम पंचायत से हटाया गया था


 ग्राम पंचायत  शाहा में पदस्थ रोजगार सहायक अशोक कुमार को कार्य में अनियमितताओं के चलते ग्रामीणों की शिकायत पर पूर्व में भी हटाया जा कर ग्राम पंचायत खैरी में लगभग 5 माह के लिए कार्य सौंपा गया था। जिसके उपरांत वापस पुनः ग्राम पंचायत शाहा में रखा गया है। परंतु उसके कार्य व्यवहार में किसी प्रकार का सुधार नहीं हो सका है।


मुख्यालय में बैठे आला अधिकारियों की मिलीभगत से चल रहा भ्रष्टाचार का खेल


केंद्र सरकार की मनरेगा योजना में खुला सेंध लगाया जा रहा है सरकारी धन सहित हितग्राहियों को मिलने वाले लाभ को भी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। मनरेगा योजना अंतर्गत किसी भी कार्य के लिए योजना प्राक्कलन तैयार करने की संपूर्ण जवाबदेही उपयंत्री को होता है जैसे मेडबंधान, खेत तालाब, लघु तालाब या अन्य हितग्राही मूलक कार्य जिनका प्राक्कलन लागत राशि और किस स्थान पर कार्य किया जाना है जिसका खसरा नक्शा भी बाकायदा संलग्न फाइल में किया जाता है। वही उक्त कार्य की निगरानी का भी जिम्मा संबंधित उपयंत्री के ऊपर रहता है। परंतु यहां इसके विपरीत उपयंत्री अपने बंगले में बैठकर आंख बंद करके एमबी जारी कर रहा है जमीनी हकीकत क्या है इन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं सिर्फ अपने हिस्से का चढ़ावा समय में मिल जाए सब भला है। सारे रिकॉर्ड सही है। ऐसे ही हाल जनपद पंचायत में बैठे ए ई के हैं। जमीनी सच्चाई से इन्हें कोई सरोकार नहीं ग्राम पंचायत के नुमाइंदों द्वारा कार्यालय में पहुंचकर दस्तावेज दिखा दिया जाता है। आंख बंद करके टीएस जारी कर सीसी तक पूर्ण कर दिया जा रहा है। भले ही जमीन में कोई कार्य ना हुआ हो। कागजों में लाखों के काम दिखाने में महारथ हासिल है।


शिकायतों पर अधिकारी नहीं दिखा रहे गंभीरता


        विगत 2 माह पहले ग्राम पंचायत रतनपुर चौकी में भी स्थानीय पंचो व ग्राम वासियों द्वारा मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़ा करने की शिकायत की गई थी। परंतु अब तक जांच कच्छप गति में ही चल रहा है। ऐसे ही हाल ग्राम पंचायत शाहा की शिकायत का हैं। शिकायत प्राप्त होने के बाद उच्च अधिकारी सांठगांठ कर लीपापोती करने में जुट जा रहे हैं। किसी प्रकार की सख्त कार्यवाही नहीं की जा रही है। जिसके चलते खुलेआम ग्राम पंचायतों में सरपंच सचिव रोजगार सहायकों द्वारा भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जा रहा है।


 उपयंत्री के कार्यप्रणाली से त्रस्त प्रधान सचिव


         विगत दिनों ग्राम पंचायत रतनपुर चौकी, माडोगढ़, कोबरीकला, सलैया, शाहा, बनार, बबलिया, देवरीकला, सुखराम, मैली, डोभी, डालाकापा आदि 12 पंचायतों में पदस्थ उपयंत्री राजेश तोमर के कार्यप्रणाली से असंतुष्ट होकर सभी ग्राम प्रधानों द्वारा शिकायत पत्र विधायक व सांसद आदि जनप्रतिनिधियों को भी दिया गया। था परंतु उपयंत्री का पैठ ऐसा की उच्च अधिकारियों से सांठगांठ करके ग्राम प्रधानों के ऊपर दबाव बनाकर आधे से ज्यादा ग्राम प्रधानों से वापस सहमति ले लिया गया। कुछ एक प्रधान नाम सामने ना लाने का कहते हुए बताते हैं की हर एक काम की एवज में मोटी रकम का नजराना उपयंत्री को चाहिए होता है। जिस कारण परेशान होकर जनप्रतिनिधियों से उपयंत्री को हटाने की मांग को लेकर शिकायत किया गया था। उपयंत्री के साथ ही जनपद पंचायत में बैठे प्रत्येक अधिकारी का कार्य लागत अनुसार प्रतिशत चढ़ावा का फिक्स रहता है।


इनका कहना है 


             मण्डला जिले में प्रशासनिक अधिकारी सिर्फ भ्र्ष्टाचार की नीयत और उद्देश्य से साम दाम से यहां पोस्टिंग करवाता है, लगभग 2 वर्षो से जनपद स्तर की किसी भी प्रकार की बैठक भी नहीं हो रही हैं, नोकरशाही पूरी तरह हावी है प्रशासनिक निरंकुशता व कमीशन प्रणाली पहले से ही चरम पर थी 

सी. ई. ओ. नारायणगंज स्वयं हफ्ते में 2- 3 दिन जबलपुर से कार्यालय आती हैं वो भी निजी वाहन से।

नाव घाटों को बिना नीलामी गोपनीय तरीके से उपहार पाकर उपकृत करके लगभग लाख रुपये का जनपद राजस्व को नुकसान पहुचाया गया है।

वर्तमान में जारी 15वें वित्त की राशि को भी पंचायतो को नियम विरुद्ध खर्च कर बंदरबाट करने की  छूट की भी जानकारी प्राप्त हो रही है।

कार्यालय से RTI के तहत जानकारियां नहीं दी जा रही।

आज नतीजा सबके सामने है मण्डला जिले में ही नहीं पूरे प्रदेश में  नारायणगंज जनपद भ्रष्टाचार में नम्बर वन होगा।

                 पूर्व में सभी लम्बित शिकायतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए रोजगार सहायक शाहा व रतनपुर चौकी के सचिव हटाने की कार्यवाही करने के साथ ही सी. ई.ओ. नारायणगंज को भी हटाते हुए ई.ओ. डब्लू. जाँच एजेंसी से जाँच करवाते हुए भ्रष्ट और भ्रष्टाचार में सहयोग करने वाले सभी पर उचित कार्यवाही होना चाहिए।

        शासन की उदाशीनता के चलते स्थानीय जनप्रतिनिधि और छेत्र की जनता बड़े आंदोलन या हड़ताल को बाध्य हो सकते हैं।


                       इंजी. भूपेन्द्र वरकड़े

                       उपाध्यक्ष जनपद पंचायत


       मैं छुट्टी पर थी कल ही ज्वाइन की हूं शिकायत के संबंध में जानकारी नहीं है देख कर बता पाऊंगी। 


                      वत्सला शिवहरे 

           मुख्य कार्यपालन अधिकारी 

               जनपद पंचायत नारायणगंज

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