BREAKING
जवाहर नवोदय विद्यालय से दो छात्र लापता | एमपी में बड़ा प्रशासनिक फैसला | जबलपुर में सनसनीखेज वारदात
मकर संक्रांति और उससे जुड़ी मान्यताएं - revanchal times new

revanchal times new

निष्पक्ष एवं सत्य का प्रवर्तक

Breaking

aaj ka akhbar padhen

आज का ई-पेपर

पूरा अखबार पढ़ने के लिए नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करें।

ई-पेपर Viewer

Wednesday, January 13, 2021

मकर संक्रांति और उससे जुड़ी मान्यताएं

 



रेवांचल टाइम्स - भारत भूमि विभिन्न सामाजिक 'धार्मिक 'और राष्ट्रीय पर्व एवं उत्सवों की भूमि है इन्हीं में से एक मकर संक्रांति का पर्व भी है ,जो नेपाल सहित भारत के विभिन्न भागों में मनाया जाता है इस वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी 2021 दिवस गुरुवार को मनाया जाएगा इस दिन अखिल ब्रह्मांड को प्रकाशित करने वाले भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि की मकर राशि में प्रवेश करते हैं भारत भूमि के अनेकानेक ज्योतिष आचार्यों ने इस रहस्य पर प्रकाश डाला है कहा जाता है कि इस दिन भगवान श्री हरि ने हजारों वर्षों से चल रहे देवासुर संग्राम को रोककर संपूर्ण जगत को शांति का संदेश दिया था इसके अतिरिक्त एक मान्यता यह भी है कि महाभारत कालीन पितामह भीष्म ने अपनी इच्छा मृत्यु के वरदान के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही अपने नश्वर शरीर का परित्याग कर माता गंगा की शरण में विश्राम पाया था इसी के साथ जुड़ा है इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व इससे जुड़ी एक पौराणिक गाथा 'जिसके कारण इसका महत्व और भी बढ़ जाता है एक बार ब्रह्म मुहूर्त में भगवान शिव और माता पार्वती आकाश मार्ग से मकर संक्रांति काल में जा रहे थे 'तभी लाखों लोगों की भीड़ दिखाई दी यह देख कर पार्वती ने शिव जी से पूछा -प्रभु यह सब लोग कहां जा रहे हैं 'शिव जी ने बताया देवी आज मकर संक्रांति का पर्व है यह सब गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं ।जो सच्चे मन और कर्म से इस दिन गंगा स्नान करता है वह मोक्ष को पाता है इसमें कोई संदेह नहीं पार्वती ने उत्सुकता पूर्वक पूछा -प्रभु इतने सभी लोगों को एक साथ मोक्ष की प्राप्ति होगी 'शिव जी ने कहा नहीं देवी इनमें से कोई एक भाग्यशाली होगा जिसे मोक्ष की प्राप्ति होगी वह कैसे प्रभु ? तब शिव जी ने कहा -चलो परीक्षा ले लेते हैं शिव जी ने वृद्ध दुर्बल और कोढ़ी काया का रूप लिया पार्वती ने सुंदर मोहनी रूप धारण कर नव विवाहित युवती का रूप लेकर गंगा किनारे एक वृक्ष के नीचे बैठ गए वृद्ध दुर्बल और कोढ़ी दिन भर दर्द से कराहते रहा पास में बैठी वह नव विवाहित युवती उसकी सेवा में लगी रही देखते ही देखते लाखों लोग उनके पास से गुजरे किसी को भी तरस ना आया जिसने भी देखा तो उस सुंदर रूपमती नव विवाहित युवती को पाने की लालच से ही देखा सुबह से शाम हो चली कितने ही लोगों ने गंगा के घाट पर मल मूत्र का त्याग किया गंगा मैया की पवित्रता को नष्ट किया रोगी को देखकर थू थू किया 'रूपमती युवती को देखकर प्रेम प्रसंग की बात की किसी ने कहा इसे छोड़ो हमारे साथ चलो अंत में एक बूढ़ा व्यक्ति आया सारा हाल जाना पूछा -बेटी यह कौन है 'और इस तरह क्यों बैठी हो  युवति ने उत्तर दिया -पिताजी यह मेरे पति हैं ,यह दुर्बल और कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं मैं इन्हें गंगा स्नान कराने लाई हूं हो सकता है गंगा मैया की कृपा से यह स्वस्थ हो जाएं इतना सुनकर उस वृद्ध ने हाथ पकड़ कर उस बीमार व्यक्ति को गंगा स्नान कराया , उन्हें भोजन कराया  दोनों की पूरी मदद की फिर उन्हें विदा किया इस तरह गंगा मैया की कृपा से उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई तभी शिवजी ने पार्वती से कहा देखा देवी मुश्किल से कोई एक मोक्ष का अधिकारी हो पाया 

आज मानव जाति ऐसे ही लो भी 'और स्वार्थी होते जा रही है युगों युगों से प्रवाहित होने वाली गंगा जैसी अनेकानेक नदियों की पवित्रता पर प्रदूषण का संकट गहरा रहा है वन्य प्राणी और वन संपदा का अस्तित्व खतरे में है मानव अब प्रकृति का सहयोगी ना होकर उसका शत्रु  बनते जा रहा है प्रकृति से विमुख होकर अट्टालिकाओं मैं कितना सुखी है मानव यह देखा जा सकता है 


 रेवांचल टाइम्स से मदन चक्रवर्ती की खबर

No comments:

Post a Comment