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Monday, December 7, 2020

आदर्श आंगनबाड़ी की स्थापनाओं मे हुआ फर्जीबाड़ा झोला छाप पेंटर के नाम से लाखों के लगे बिल


शिकायत पर नही हुई  कोई कार्यवाही

 

रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला के अंतर्गत आने वाले विकास खण्ड मवई जो बहुत ही पिछड़ा हुआ और जिले के जिम्मेदार अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधियों के द्वारा भ्रष्टाचार करने और भ्रष्ट अधिकारियों को पनाह देने में कोई कसर नही छोड़ी गई है गरीब और गरीब हो गया है बड़े और बड़े हो गए है।

        वही जिले के सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार का खेल जिस तरह से जारी है। उसे देखकर अब लगने लगा है कि इस भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना न तो प्रशासन के वश की बात है। और न ही यहां का राजनैतिक नेतृत्व ही इस पर कोई अंकुश कोई अंकुश लगा सकता है। जिस पर कोई शिकायत होती है तो जिले में बैठे आला अधिकारी उसे ठंडे बस्ते में डाल देते हैं। थक हार कर शिकायतकर्ता को उम्मीद लोकायुक्त पर जा टिकती है।


जिले की आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना मे हुआ खुल के फर्जी बाड़ा-


महिला बाल विकास के अन्तर्गत जिले की अधिकांश परियोजनाओं मे आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना पर भारी भ्रष्टाचार हुआ है। जिस पर आरटीआई कार्यकर्ता एस.पी.तिवारी द्वारा महिला बाल विकास परियोजना मवई से आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना मे हुए आय-व्यय की जानकारी ली गई। जिसपर बड़ा खुलासा सामने आया। कि झोला छाप लकी पेंटर, पंक्षीपानी, मोहगांव के बिल लगाये गये है। और इन बिलों के माध्यम से लकी पेंटर को तदर्थ समितियों द्वारा करीबन 4 लाख 23 हजार का भुगतान किया गया। इन बिलो मे मटेरियल सप्लाई से लेकर निर्माण कार्य और पेंटिंग कार्य दर्शाया गया है। जबकि इस पेंटर के पास न  ही टिन नम्बर है और न ही जीएसटी नम्बर है। इसके बाद भी इस के बिल के माध्यम से शासन राशि का आहरण किया गया। साथ ही और बहुत सी  ऐसी फर्मों के बिल लगे हैं जिनका अतापता ही नही है। मुख्यतौर से अगर परियोजना मवई के साथ-साथ परियोजना बिछिया एवं मोहगांव मे आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना हुए आय-व्यय  की जांच  की जाय तो अनेकों फर्जी बिल निकलकर सामने आ जावेगें। साथ ही मौके पर इन आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने पर बहुत बड़ा खुलासा सामने आ जावेगा। क्योंकि इन केन्द्रों की स्थापना कार्य मे शासन की गाईड लाईन का ध्यान नहीं रखा गया ।और परियोजना द्वारा निरीक्षण कर इन्हें पूर्णतया प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया । उससे यह स्पष्ट होता है कि यह पूरी मिलीभगत जिला कार्यालय की है अब जिला प्रशासन पर यह जिम्मेदारी आती है कि  वे  पूरी गंभीरता से पूरी जांच कराए ताकि जिला प्रशासन पर लग रहे  अनदेखी के दागों को धोया जा सके।


शिकायत पर नही हुई कार्यवाही-


महिला बाल विकास परियोजना मवई अन्तर्गत आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना मे हुए भ्रष्टाचार की जांच हेतु जिला कलेक्टर को दिनांक 24/09/2019 को लिखित शिकायत कर जांच की मांग की गई थी । साथ ही कई समाचार पत्रों मे समाचार प्रकाशित  होने के बाद भी इस फर्जीवाड़े की ओर शासन -प्रशासन का ध्यान नहीं गया। शिकायत को  एक बर्ष से अधिक समय होने के बाद भी जांच नही हुई। जिससे भ्रष्टाचारियों के हौसले और बुलंद होते नजर आ रहे है। 


शिकायत कर्ता द्वारा मागा गया जांच प्रतिवेदन-


शिकायतकर्ता द्वारा की गई शिकायत के जांच प्रतिवेदन की जानकारी दिनांक 21/10/2020 को कार्यालय कलेक्टर से  आरटीआई द्वारा चाही गई जिसपर कार्यालय कलेक्टर द्वारा जावक क्रमांक 1724 दिनांक 27/10/2020 को आरटीआई की जानकारी संबंधित को देने हेतु जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बालविकास, मण्डला को निर्देशित किया गया। जिसपर महिला बाल विकास द्वारा संबंधित को पत्र क्रमांक- म.बा.वि./सू.आ./2020/4620 मण्डला दिनांक 05/11/2020 देकर उल्लेखित किया गया की इस कार्यालय मे जानकारी उपलब्ध नहीं है इसलिए जानकारी निरंक है। अर्थात इतने बड़े फर्जी बाड़े की जांच नही कराई गई। जो बहुत बड़े प्रश्न की ओर ईशारा करता है।


पुनः की गई निष्पक्ष जांच हेतु शिकायत-


महिला बाल विकास परियोजना मवई मे आदर्श आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना के कार्यों मे हुये फर्जीबाड़े की शिकायत पर कार्यवाही न होने पर शिकायतकर्ता एस.पी.तिवारी द्वारा दिनांक 25/11/2020 को जिला कलेक्टर को पुनःशिकायत की गई  है। पर अब देखना यह है की इसके बाद भी जांच हो पाएगी या नहीं? 

      बड़ा आश्चर्य यह है कि प्रत्येक सप्ताह दो से अधिक बैठकें जिला मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की होती हैं जिसमें इस तरह की फाइलें भी सम्मिलित की जाती होंगी लेकिन नियमों की इस अनदेखी पर क्यों नहीं जिम्मेदारों की नजर पड़ती है?


जिले के मुखिया से जनमांग है-


       जिला कलेक्टर से जन मांग है की महिला बाल विकास परियोजनाओं मे आर्दश आंगनबाड़ी केन्द्रों की स्थापना हेतु जो शासन द्वारा राशि स्वीकृत कर दी  गई थी। जिसमें शासन की यह मंशा थी कि जिले की हर परियोजनाओं करीबन 9-10  आंगनबाड़ी केन्द्रों को अच्छे तरीक़े से सुसज्जित किया जाये। और उन्हें आर्दश केन्द्रों का दर्जा दिया जाये। ताकि उस पर नन्हे-नन्हे बच्चे आकर खेलें, कूदें एवं अध्ययन करना सीखें। पर भ्रष्टाचारियों ने इन मासूमों के हक मे डाका डालने मे बाज नही आये एवं  शासन की राशि पर भ्रष्टाचार का खेल खेला गया। उसकी सूक्ष्मता से जांच कर दोष पाये जाने पर कठोर कार्यवाही की जाये। ताकि भविष्य मे ऐसी पुनरावृत्ति न हो।


               इनका कहना है-


         मवई विकास खण्ड जिले का अंतिम छोर है जो आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। इस विकास खण्ड मे अनेक भ्रष्टाचार की शिकायत मुझे प्राप्त हुई हैं। सभी शिकायतों के विषय मे कलेक्टर से जल्द जांच हेतु चर्चा करूंगा। 

          विधायक, विधानसभा बिछिया, मण्डला।

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