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Monday, December 7, 2020

भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा शाला भवन, ग्यारह वर्ष ही मे हुआ जर्जर नये भवन निर्माण की स्वीकृति, डिस्मेंटल प्रमाण पत्र के पूर्व ही मिली


रेवांचल टाईम्स - आदिवासी बाहुल्य मण्डला जिले मे जिला शिक्षा केन्द्र के अन्तर्गत अधिकांश शाला भवन का निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन तरीक़े से होने के कारण समय से पूर्व ही जर्जर या खण्डहर हो रहे है। और कुछ भवन आज भी अधूरे खण्डहर तब्दील होकर अपनी कहानी बयां कर रहे हैं। साथ ही शालाओं मे निर्मित शौचालयों की स्थिति और कुछ है। निर्माण ऐजेंसी के ऊपर नहीं हुईं कार्यवाही होती है क्योंकि कही न कही निर्माण एजेंसी ने जिम्मेदार अधिकारियों को गांधी जी के तीन बंदर जो बना दिया है।

           वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी मुताबिक जिले मे बहुत से स्कूलों के शौचालय विभागीय पोर्टल मे पूर्ण बता रहे हैं पर इनकी जमीन हकीकत कुछ और है। जिसकी जांच होने पर बड़ा खुलासा सामने आ जावेगा। इनके निर्माण कार्यों मे निर्माण एजेंसी द्वारा शासन की राशि जमकर चूना लगाया गया है। यह सब जिले मे बैठे आला अधिकारियों के संज्ञान मे होने के बाद भी निर्माण एजेंसी के ऊपर को कार्यवाही नही की जा रही है जिससे जाहिर होता है इस खेल मे इनकी भी मिलीभगत है। जिसका  जीता जागता उदाहरण का खुलासा आरटीआई से हुआ। कि प्राथमिक शाला सिवनी माल का भवन विकास खण्ड नारायणगंज जो मात्र ग्यारह वर्ष मे ही जर्जर हालत मे हो गया और इस भवन को अनुपयोगी घोषित कर दिया गया।




ये है मामला-


       विकास खण्ड नारायणगंज के अन्तर्गत सिवनी माल का प्राथमिक शाला भवन का बर्ष 2006 मे निर्माण कार्य हुआ था जिसकी निर्माण ऐजेंसी शाला प्रबंधन समिति थी। समिति द्वारा भवन एक बर्ष के अन्दर बना तो दिया गया। किन्तु भवन का निर्माण कार्य शासन के दिशा निर्देशों और गुणवत्ता को ध्यान मे न रखते हुई कराया गया जिसके चलते यह ग्यारह साल मे ही खण्डहर होने की दशा मे बर्ष 2017 मे सुरक्षा की दृष्टि से अनुपयोगी घोषित कर दिया गया।


भवन डिस्मेंटल(अनुपयोगी) घोषित-


    बता दें कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग मण्डला ने  पत्र क्र.-4183/ता./भवन/2017-18 दिनांक 07/10/2017 को जिला परियोजना समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र मण्डला को पत्र देकर कहा था कि- "पी.एस.शाला भवन सिवनी माल ब्लाक नारायणगंज जो बर्ष 2006 मे निर्मित होना बताया गया है। चूंकि भवन ग्यारह वर्ष पूर्व ही निर्मित है। भवन वर्तमान स्थिति को देखते हुए निर्माण के विरूद्ध   कार्यवाही किया जाना प्रस्तावित किया जाता है। एवं सुरक्षा की दृष्टि कोण से इसे डिस्मेंटल (अनुपयोगी) किया जावे।"


निर्माण एजेंसी के ऊपर नहीं हुई कार्यवाही-


जिला शिक्षा केन्द्र ने भवन को अनुपयोगी तो कर दिया किन्तु निर्माण एजेंसी शाला प्रबंधन समिति के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई। यहां निर्माण ऐजेंसी के विरूद्ध कार्यवाही हो आवश्यक थी क्योंकि भवन निर्माण गुणवत्ता हीन एवं शासन के दिशा निर्देशों का पालन न किये जाने से भवन समय से पूर्व ही मात्र ग्यारह बर्ष मे ही  जर्जर हो गया। और शासन की राशि मे भ्रष्टाचार का खेल-खेला गया।

 

नये भवन की स्वीकृति डिस्मेंटल के पूर्व ली गई-


जिला शिक्षा केन्द्र मण्डला द्वारा राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल से दिनांक 06/07/2017 मे नये भवन निर्माण की स्वीकृति ले ली गई जबकि पुराने जर्जर भवन को 07/10/2017 मे डिस्मेंटल (अनुपयोगी ) घोषित किया गया। अर्थात डिस्मेंटल होने के लगभग तीन माह पहले ही नये भवन की स्वीकृति ले ली गई  जबकि कोई भी पुराने जर्जर भवन को पहले डिस्मेंटल किया जाता है इसके बाद वहां पुनः नये भवन की स्वीकृति मिलती है। पर यहां ऐसा नही हुआ। बगैर डिस्मेंटल किये नये भवन की स्वीकृति राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा कैसे दे दी गई? जो जांच का विषय है। 


ग्यारह बर्ष के अन्दर दूसरा भवन हुआ स्वीकृत-


जिला शिक्षा केन्द्र मण्डला ने राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल से नया भवन निर्माण हेतु स्वीकृत कर राशि मांग की गई। जिस पर राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के पत्र क्रमांक राशि के/निर्माण/2017/4883 दिनांक 06/07/2017 को बर्ष 2017-18 की बार्षिक कार्य योजना में नवीन भवन हेतु 13,46,000/-रू. की राशि स्वीकृत कर दी। जिस पर जिला शिक्षा केन्द्र ने निर्माण ऐजेंसी ग्राम पंचायत को बनाते हुए कार्य प्रारंभ कर दिया गया । जो शाला के बच्चों की सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक था। इस पर किसी प्रकार का प्रश्न चिन्ह नही है। प्रश्न तो है जो भवन ग्यारह बर्ष के अन्दर ही जर्जर हो गया उस मे हुई शासन की छति की भरपाई कोई करेगा? इसकी जबाव देही जिला शिक्षा केन्द्र की है।


जांच हेतु कलेक्टर को हुई  शिकायत-


शाला के मासूम बच्चों के साथ खिलवाड़ करते हुए। निर्माण ऐजेंसी ने जो शासन की राशि को बन्दरबाट किया है। उसकी सूक्ष्म जांच हेतु आरटीआई कार्यकर्ता एस.पी.तिवारी ने कलेक्टर को शिकायत कर जांच करवाने की मांग की है। जांच मे दोष सिद्ध होने पर शासन की राशि पर हुआ भ्रष्टाचार की भरपाई संबंधित से करवाते हुए उनके ऊपर कठोर कार्यवाही की मांग की है। 




         इनका कहना है-


        कोई भी भवन की एक आयु होती है अगर समय से पूर्व भवन जर्जर हो गया है। तो निर्माण ऐजेंसी के ऊपर एफआईआर होना चाहिए।

 

         डा.अशोक मर्सकोले, विधायक 

        निवास विधानसभा क्षेत्र, मण्डला।


रेवांचल टाइम्स से एस पी तिवारी की रिपोर्ट

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