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Tuesday, November 24, 2020

उच्याधिकरियो के सहयोग से जिले में हो रहा है शराब एवं अवैध रेत उत्खनन धड़ल्ले से कारोबार लोगो का आरोप

 


           चोर चोर मौसेरे भाई  कि  कहावत सत्य है

 रेवांचल टाइम्स - बालाघाट जिले में ऐसे ही कहावत चल रही है जो सत्य है अगर गांव का या घर का मुखिया सही हो तो का यहां घर नहीं बिगड़ता अगर घर का मुखिया ही खराब हो तो घर गांव क्या पूरा एरिया खराब हो जाता है उसी प्रकार बालाघाट जिले के कलेक्टर खुद रेत एवं शराब ठेकेदारों के साथ इनकी मिलीभगत है इसलिए यह आईपीएस अधिकारी कच्ची शराब के ऊपर ज्यादा जोर देते हैं जबकि बालाघाट जिले में कच्ची शराब के एवज में पक्की शराब की बिखरी गांव-गांव हो रही है ठेकेदार के आदमी द्वारा घर-घर शराब दुकान से अपने पैरों के शराब दे रहे हैं जो नियम के अनुसार गलत है रहा

        क्या मध्यप्रदेश शासन शराब ठेकेदारों को घर घर पहुंचाने के लिए शराब का ठेका दिया जाता है 

क्या शराब दुकान का ठेका मध्यप्रदेश शासन द्वारा दिया जाता है जो ठेकेदार के द्वारा मनमानी करते हुए गोवा में अपने बिल्डरों के माध्यम से कई के घर में शराब पहुंचाया जा रहा है क्या यह उचित है

      क्या मध्य प्रदेश मैं बेरोजगारों की कमी है जो अन्य राज्यों के व्यक्तियों को मध्य प्रदेश मैं शरण दी जा रहा है

    बता दें कि मध्य प्रदेश के सभी जिलों में उत्तर प्रदेश एवं बिहार के व्यक्तियों द्वारा मध्यप्रदेश में कब्जा कर  शराब का अवैध कारोबार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश की आबकारी विभाग के द्वारा इस बिंदु पर गौर नहीं किया गया है क्योंकि मध्य प्रदेश में नेता अभिनेता एवं ठेकेदार सभी चोर है वही अब जनता का भी कहना कि आज कल गरीबो की कौन सुनता है अधिकारी हो जनप्रतिनिधि सब उसी की सुनते है जिसकी लाठी उसकी भेंस

      मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में चाहे नेता हो या अधिकारियों सभी को पनपने की आजादी मिलती है ऐसा क्यों

       मध्यप्रदेश शासन द्वारा किसानों एवं गरीब मजदूरों के हित में कई योजनाओं का उद्घाटन एवं रचनाएं की जाती है किंतु बालाघाट जिले में गरीब मजदूर के साथ अन्य क्यों हो रहा है

       बालाघाट जिले के किसी भी कार्यालय में कोई भी काम करवाने के लिए अगर गरीब मजदूर या किसान अपने आवेदन लेकर जाता है 

    उस कार्यालय का बाबू सबसे पहले काम की आवाज में पैसे की पहले बात करता है ऐसा क्यों

    इससे प्रतीत होता है कि प्रशासन चोर है या गरीब मजदूर किसान चोर है जो काम के एवज में कर्मचारियों के द्वारा पैसे की बात किया जाता है

      क्या बालाघाट जिले में कच्ची शराब पकड़ने की अनुमति दी जाती है पक्की शराब पकड़ने की अनुमति क्यों नहीं दिया क्या जाता

      जबकि कच्ची शराब की एवज में पक्की शराब की बिक्री बालाघाट जिले में घरों घर किया जा रहा है क्या आबकारी विभाग आखिर मोहन के हैं

       जिसकी दुकान खोलने की समय सीमा एवं बंद होने की समय सीमा निर्धारित नहीं है आखिर क्यों और

अगर घर का ही मुखिया चोर हो तो दूसरों को क्या दोष दें


 अपना भारत देश विक्षिप्त नहीं हो पा रहा है और ना होगा


रेवांचल टाइम्स बालाघाट से खेमराज बनाफरे की रिपोर्ट

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